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मदुरै चित्तिरै उत्सव: हरे वर्ण के वस्त्र धारण कर कल्लझगर का वैगै नदी में प्रवेश

मान्यता है कि भगवान सुंदरराज पेरुमाल ने इस दिन कल्लझगर रूप में मांडूक महर्षि को श्राप से मुक्ति प्रदान की। सुंदरराज पेरुमाल के रूप में पूजे जाने वाले कल्लझगर, अपने निवास स्थल अझगरमलै की पहाड़ियों से कुल 42 किलोमीटर लंबी यात्रा कर मदुरै पहुंचते हैं।

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Lord Kallazhagar

मदुरै. तमिलनाडु के मदुरै के प्रसिद्ध वार्षिक चित्तिरै उत्सव के तहत अझगर मंदिर के अधिष्ठाता भगवान कल्लझगर (Lord Kallazhagar) ने वैगै नदी में पारंपरिक प्रवेश किया। इस मौके पर ‘गोविंदा.. गोविंदा...’ के गगनभेदी जयकारों के बीच लाखों श्रद्धालु उपस्थित रहे और पुण्य स्नान के रूप में नदी के जल को उछाला। उन्हें हरे रंग की रेशमी पोशाक पहनाई गई, जो समृद्धि और बेहतर फसल का प्रतीक मानी जाती है।

मान्यता है कि भगवान सुंदरराज पेरुमाल ने इस दिन कल्लझगर रूप में मांडूक महर्षि को श्राप से मुक्ति प्रदान की। सुंदरराज पेरुमाल के रूप में पूजे जाने वाले कल्लझगर, अपने निवास स्थल अझगरमलै की पहाड़ियों से कुल 42 किलोमीटर लंबी यात्रा कर मदुरै पहुंचते हैं। इस यात्रा के दौरान वे स्थानीय कल्लर समुदाय की पारंपरिक वेशभूषा और वे स्थानीय 'वलरी' धारण करते हैं, जिससे इस उत्सव में लोक परंपराओं और वैष्णव संस्कृति का अनूठा संगम दिखाई देता है। इस वर्ष उत्सव की शुरुआत 27 अप्रेल को अलगर की पहाड़ियाें से हुई थी, जब भगवान को स्वर्ण पालकी में रवाना किया गया था।कल्लझगर के मदुरै आगमन से एक दिन पूर्व देवी मीनाक्षी व भगवान सुंदरेश्वर का दिव्य विवाह संपन्न होता है। इसके बाद भगवान शहर में रात्रि विश्राम करते हैं, जिसके बारे में एक लोकप्रिय कथा है कि कल्लझगर अपनी प्रिय थुलुका नचियार (मुस्लिम महिला) से मिलने आते हैं।शुक्रवार सुबह भगवान के नगर में प्रवेश के बाद एथिर सेवा (भव्य स्वागत समारोह) मूंड्रमावड़ी पर हुई। इसके बाद शोभायात्रा पुदुर और तल्लाकुलम समेत विभिन्न इलाकों से होते हुए आगे बढ़ी। तल्लाकुलम के प्रसन्न वेंकटचलपति मंदिर में भगवान ने श्रीविल्लीपुथुर अंडाल मंदिर से आई माला धारण की और फिर हजार स्तंभों वाले वाहन पर दर्शन दिए। शोभायात्रा के दौरान कई श्रद्धालुओं ने कल्लझगर और करुप्पनास्वामी का रूप धरकर इत्रयुक्त पानी का छिड़काव किया, इस अवसर पर महिलाओं ने गुड़ से बने दीयों से प्रार्थना की।

दो टन फूलों और कमल पत्रों से सजाया

वैगै के तट पर भगवान का स्वागत भगवान वीरराघव पेरुमाल ने रजत अश्व वाहन पर किया। नदी क्षेत्र को विशेष रूप से दो टन फूलों और कमल पत्रों से सजाया गया था। इकट्ठी भीड़ को आशीर्वाद देने के लिए क्षेत्र की तीन बार परिक्रमा करने के बाद, हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग तथा वीरराघव पेरुमाल मंडगापडी (विश्राम स्थल) में विशेष प्रार्थनाएं और दीपाराधना संपन्न की गईं।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

मदुरै पुलिस आयुक्त अभिषेक दीक्षित ने सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की। भारी पुलिस बल, लोहे की बैरिकेडिंग, अग्निशमन तथा मेडिकल टीमें भी तैनात रहीं। नदी में प्रवेश के बाद भगवान का रथ रामराया मंडपम के लिए रवाना हुआ, जहां ‘तीर्थवारी’ अनुष्ठान हुआ। हजारों श्रद्धालुओं ने नदी किनारे बाल दान कर अपनी मनोकामना पूरी की।

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