
सीकर के धोद बैंड के कलाकार (फाइल फोटो)
सीकर। राजस्थान की लोकधुनें एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजने जा रही हैं। सीकर जिले के धोद गांव से जुड़े प्रसिद्ध लोक कलाकार रहीस भारती और उनका धोद बैंड फ्रांस में आयोजित प्रतिष्ठित 'फ्वार द टूर्स' ट्रेड फेयर में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। 1 से 10 मई तक फ्रांस के सांत्र वाल द ल्वार क्षेत्र में होने वाले इस आयोजन में करीब 20 साल बाद भारतीय दल को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है, जिससे यह अवसर और भी खास बन गया है।
करीब 25 वर्षों से लोक कला को समर्पित यह बैंड अब तक 119 देशों में 1500 से अधिक प्रस्तुतियां दे चुका है। स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, जर्मनी और फिनलैंड जैसे देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके इस समूह ने राजस्थानी संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस बार भी उनकी प्रस्तुतियां विदेशी दर्शकों के सामने राजस्थान की परंपराओं, संगीत और लोकनृत्य की जीवंत झलक पेश करेंगी।
इस अंतरराष्ट्रीय मेले में रहीस भारती का समूह अकेले नहीं होगा, बल्कि उनके साथ 25 से अधिक कलाकारों की टीम भी भाग लेगी। इनमें जयपुर महाराजा ब्रास बैंड, आफरीदी भारती ट्रियो और बॉलीवुड मसाला ऑर्केस्ट्रा जैसे समूह शामिल हैं, जो भारतीय संस्कृति की विविधता को अपने-अपने अंदाज में प्रस्तुत करेंगे। 10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में राजस्थानी लोक प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण बनने की उम्मीद है।
रहीस भारती बताते हैं कि उनका सफर चुनौतियों से भरा रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी कला को न केवल जीवित रखा, बल्कि उसे वैश्विक मंच तक पहुंचाया। उनके समूह में गायक, वादक, नर्तक, फकीर और कठपुतली कलाकार शामिल होते हैं, जो मिलकर एक अनूठा सांस्कृतिक अनुभव प्रस्तुत करते हैं। इसी कारण इस बैंड को 'एम्बेसडर ऑफ राजस्थान' के रूप में भी पहचान मिली है।
उनकी प्रेरक यात्रा से प्रभावित होकर फ्रांसीसी लेखिका मार्टिन ले कोज ने 'Dhod: Heartbeat of Rajasthan' शीर्षक से पुस्तक भी लिखी है, जिसमें उनके संघर्ष और कला के प्रति समर्पण को दर्शाया गया है। यह बैंड पीएम नरेंद्र मोदी के सम्मान में आयोजित ‘नमस्ते फ्रांस 2023’, एलिजाबेथ द्वितीय के समारोह, ग्रीस ओलंपिक और सिंगापुर ग्रांप्री जैसे बड़े मंचों पर भी अपनी छाप छोड़ चुका है।
अब यह बैंड एक बार फिर फ्रांस में अपनी सुरों की शक्ति से न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने जा रहा है।
Published on:
01 May 2026 05:46 pm
