
अष्टम पोषण पखवाड़ा
राजस्थान ने एक बार फिर राष्ट्रीय फलक पर अपनी सफलता का परचम लहराकर यह साबित कर दिया है कि जब बात बच्चों के पोषण और भविष्य की हो, तो 'वीर प्रसूता भूमि' सबसे आगे खड़ी है। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित “अष्टम पोषण पखवाड़ा” (9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026) के परिणामों ने पूरे देश को चौंका दिया है।
राजस्थान ने इस अभियान के दौरान सर्वाधिक गतिविधियां आयोजित कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस ऐतिहासिक सफलता पर उपमुख्यमंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री दिया कुमारी ने विभाग के अधिकारियों और मैदानी कार्यकर्ताओं की पीठ थपथपाई है।
राजस्थान की यह जीत महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि सुनियोजित रणनीति का परिणाम है। शासन सचिव पूनम के अनुसार, प्रदेश ने 112.33 प्रतिशत की अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है।
अष्टम पोषण पखवाड़ा
इस वर्ष पोषण पखवाड़े की मुख्य थीम “जीवन के प्रथम 06 वर्षों में अधिकतम मस्तिष्क विकास” रखी गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के मस्तिष्क का 80% विकास इन्ही शुरुआती सालों में होता है। इसी को केंद्र में रखकर राजस्थान ने कई नवाचार किए:
अभियान की दिन-वार गतिविधियों ने जन-जन को इससे जोड़ा:
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने सफलता का श्रेय शासन सचिव पूनम, आईसीडीएस निदेशक वासुदेव मालावत, अतिरिक्त निदेशक अनुपमा टेलर और पूरी टीम को दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला पर्यवेक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत ने ही इस सरकारी अभियान को एक 'जन-आंदोलन' में तब्दील कर दिया।
राजस्थान की इस जीत ने अन्य राज्यों के लिए एक 'बेंचमार्क' सेट कर दिया है। 23 अप्रैल को समापन समारोह में साझा की गई 'सफल कहानियों' ने यह उम्मीद जगाई है कि जल्द ही राजस्थान 'कुपोषण मुक्त' होने का गौरव भी हासिल कर लेगा। डिजिटल जुड़ाव और सोशल मीडिया क्विज के जरिए युवा माता-पिता तक पहुँचना इस बार की सबसे बड़ी कामयाबी रही।
Updated on:
01 May 2026 04:06 pm
Published on:
01 May 2026 04:06 pm
