
सीकर. चिकित्सा विभाग ने भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए सरकारी अस्पतालों में मरीजों को राहत दिलाने के दावे किए हो लेकिन हकीकत यह है कि नेहरू पार्क के पास बना जिले का सबसे बड़े सरकारी जनाना अस्पताल इस भीषण गर्मी में संकट का केंद्र बना हुआ है। हाल यह है कि इस अस्पताल में पीने के पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। मरीजों और उनके परिजनों को बाहर से पानी खरीदकर लाना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि अस्पताल के लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर, एमटीसी वार्ड जैसे संवेदनशील स्थानों के एयर कंडीशनर तक बंद पड़े हैं। जहां जिंदगी बचाने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, वहीं गर्म हवा मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। आश्चर्य की बात है कि विभाग के जिम्मेदारों की अनदेखी और ढीलपोल का फायदा उठाकर ठेकेदार ने अब तक एयरकंडीशन तो दूर डक्टिंग तक की मरम्मत या सफाई नहीं करवाई है। यही हाल चौकी में आने वाली अन्य शिकायतों का है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार ठेकेदार जिस तरह से अनदेखी कर रहा है उस लिहाज से गर्मी के इस सीजन में पूरा काम होना बेहद मुश्किल है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में नेहरू पार्क के पास जनाना अस्पताल का उद्घाटन किया गया था। उस समय पूरे अस्पताल को डक्टिंग प्रणाली से जोड़ा गया था।
बिजली, पानी, मरम्मत जैसे कार्य को समय पर पूरा करने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से गर्मी से राहत दिलाने के लिए अस्पतालों में सार्वजनिक निर्माण विभाग की चौकी बनाई है लेकिन हकीकत में विभाग ने कल्याण अस्पताल में तो चौकी बना दी लेकिन जनाना अस्पताल को भगवान भरोसे छोड दिया। जबकि जनाना अस्पताल में रोजाना डेढ सौ से ज्यादा प्रसूताएं भर्ती रहती है और एक हजार से ज्यादा ओपीडी है। कल्याण अस्पताल की तुलना में जनाना अस्पताल में सबसे ज्यादा ऑपरेशन किए जाते हैं। वहीं मेडिकल रीलिफ सोसाइटी के खाते में आने वाली 50 प्रतिशत से ज्यादा राशि जनाना अस्पताल के जरिए आती है। इसके बाद अस्पताल की अनदेखी की जा रही है। इसके बावजूद जनाना अस्पताल राशि खर्च करने के लिए अधिकृत नहीं है। निर्देशों के अनुसार प्रबंधन केवल चिकित्सकीय कार्य देखे। अस्पताल संबंधी पूरी समस्याएं विभाग की चौकी में दर्ज करवाएं। चौकी में लगाए गए पलम्बर, बिजलीकर्मी और बढ़ई के जरिए फौरन काम करवाने की जिम्मेदारी रहेगी। वहीं शिकायत की अनदेखी करने पर संबंधित कार्मिक व विभाग पर कार्रवाई का प्रावधान है।
सार्वजनिक निर्माण विभाग के कल्याण अस्पताल प्रबंधन ने सार्वजनिक निर्माण विभाग की चौकी के लिए एक वर्ष के लिए करीब एक करोड़ 12 लाख रुपए जमा करवाए गए हैं। इस राशि में से लगभग 70 प्रतिशत बजट सिविल कार्यों पर खर्च होगा, जबकि शेष राशि इलेक्ट्रिकल कार्यों के लिए निर्धारित की गई है। चौकी में तीन शिफ्ट में कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। जिनमें एक पलम्बर, बेलदार, कारपेंटर, मेशन की ड्यूटी सुबह व दोपहर की पारी में रहती है। रात्रि के समय अस्पताल परिसर में एक बेलदार और एक पलम्बर रहता है। जनाना अस्पताल में सप्ताह में महज दो दिन कर्मचारी जाते हैं। जिनकी जानकारी न तो प्रबंधन को होती है न ही स्टॉफ को। ऐसे में
जनाना अस्पताल में अव्यवस्थाओं को लेकर सार्वजनिक निर्माण विभाग को कई बार अवगत कराया जा चुका है। जिम्मेदार न तो समस्याओं का समाधान करवा रहे हैं और न ही निर्देशों को गंभीरता से ले रहे हैं। निरीक्षण के लिए चिकित्सकों की टीम बना दी है।
डॉ. प्रिंयका अमन, अधीक्षक कल्याण अस्पताल
विभाग को अस्पताल प्रबंधन की ओर से जो राशि मिली है उस राशि से कार्य करवाए गए हैं। अस्पताल के सभी बिजली संबंधी उपकरणों की सालाना मरम्मत और देखरेख के लिए अभी तक अस्पताल ने राशि जमा नहीं करवाई है। शेष राशि के लिए अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
आदित्य जौहरी, एक्सईएन, इलेक्ट्रिक पीडब्ल्यूडी
Updated on:
30 Apr 2026 11:52 am
Published on:
30 Apr 2026 11:52 am
