चेन्नई

रेत माफिया ने नदी का सीना किया छलनी

इस बीच सोशल मीडिया पर एक संगठन पीएमके का एक वीडियो वायरल हो रहा है...
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Updated: 16 Apr 2018, 1:46 PM IST
Sieve for river sand

कोय बत्तूर. शहर से सटी बरसाती नदी नॉयल को अब रेती के लिए लूटा खसोटा जा रहा है। पानी सूख चुका है। कई इलाकों की नालियों और फैक्ट्रियों को दूषित पानी जरूर नदी में आ रहा है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक संगठन पीएमके का एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें नदी किनारे रेती का अवैध खनन होता दर्शाया गया है। वीडियो वायरल होने के साथ ही पुलिस के कान खड़े हो गए व आनन -फानन में एक ट्रक को भी सीज कर लिया गया । कथित वीडियो में कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन पुलिस ने सभी आरोपों को गलत बताया है। वीडियो में रेत माफिया का एक गुर्गा बता रहा है कि यह काम एक अधिकारी की छत्र छाया में हो रहा है। स्थानीय पुलिस को प्रत्येक ट्रक के लिए 2,000 रुपए का भुगतान करते हैं। राजस्व अधिकारियों को पैसा दिया जाता है। गुर्गे का कहना है कि रिश्वत दिए बिना कोई काम नहीं होता। हमारी पीठ पर अधिकारियों का हाथ है। इसलिए हमें किसी का डर नहीं।


पिछले दिनों एक संगठन पाताली मक्कल काची के कार्यकर्ताओं ने जब रेती से भरे एक ट्रक को रोका तो पुलिस प्रशासन ने उलटे उन्हें ही गिर तार कर लिया। पीएमके ने भी रेती तस्करी का विरोध किया तो पुलिस ने उन्हें भी पकड़ कर झूठे आरोपों में बंद कर दिया। इससे संगठन के कार्यकर्ताआहत थे। वे जनता के सामने ठोस सबूत रखना चाहते थे। इस बार उन्होंने नदी में खुदाई कर रेती ले जा रहे माफिया के कारिन्दों से बातचीत व पूरे घटनाक्रम का वीडियो तैयार कर लिया। हालांकि पुलिस ने सभी आरोपों से इनकार किया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिसे पीएमके कार्यकर्ता बजरी रेत बता रहे हैं। वह सामान्य मिट्टी है न कि नदी से खोदी गई रेती। एक ट्रक पकड़ा है। रेती की जांच के बाद स्पष्ट हो जाएगा कि यह सामान्य मिट्टी है या भवन निर्माण में काम आने वाली बजरी । जांच में यह सामान्य निकली तो पीएमके कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


संगठन के अशोक श्री निधी ने कहा है कि लोग नदी में आ कर खुद देख ले ,किस तरह रेती के लिए नॉयल का सीना छलनी किया जा रहा है। इस बारे में हमने जब शिकायत की और रेती तस्करों को घेरा तो हमें ही झूठा ठहरा कर गिर तार कर लिया गया।
उल्लेखनीय है कि मरणासन्न नॉयल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए करीब दो साल पहले १३ मार्च को शहर के कुछ संगठनों ने अभियान शुरु किया था। समाज सुधारक अन्ना हजारे को बुलवा कर अभियान की शुरुआत उनके हाथों से कराई गई पर इच्छा शक्ति की कमी के कारण नॉयल को उसके हाल पर छोड़ दिया गया

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