
आनन्दतीर्थ महिला परिषद के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
चेन्नई। नारी दया, प्रेम, वात्सल्य, करुणा और त्याग की प्रतिमूर्ति है। ये सारे गुण एक नारी में समाहित है। जिस समाज में नारी का सम्मान होता है, उसका भविष्य उदीयमान होता है। नारी शब्द ही अपने आप में एक सार्थक शब्द है।
उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने यह बात कही। वे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर श्री वद्र्धमान श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन संघ अम्बत्तूर में उद्बोधन दे रहे थे। आनन्दतीर्थ महिला परिषद के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मुनि ने कहा कि हम बंधन को तोडऩे में समर्थ बनें लेकिन मर्यादा तोडऩे में समर्थ न बनें। माता का अपने पुत्र-पुत्री के प्रति नैसर्गिंक स्नेह ही वात्सल्य है।
उन्होंने कहा कि ऐसे गुणों को अपनाकर ही नारी सशक्त बन सकती है। आनन्दतीर्थ महिला परिषद की अध्यक्ष मोहिनी चौरडिय़ा ने कहा कि आज महिला अधिक सशक्त बनकर उभरी है। वे आज पुरुष प्रधान समाज में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही है। महिलाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं हैं। उन्हें अवसर दिया जाएं तो वे बहुत कुछ करने में समर्थ है। जरूरत केवल उन्हें पहचानने की है।
नवकार संस्कार क्रिएशन की संयोजिका कुसुम ओस्तवाल ने कहा कि नारी में हम कर सकते हैं की शक्ति है। जितने नारी पर संकट आते हैं, उतनी ही अधिक सशक्त बनकर उभरती है नारी। हम खुद को इम्प्रूव करेंगे तभी नारी मजबूत बनकर उभर सकेगी। नारी अपनी शक्ति खुद को सशक्त बनाने में लगाएं।
अरुणा मुणोत ने कहा कि हम छोटी-छोटी आदतों को जीवन में स्थान देकर सुन्दर जीवन जी सकते हैं। एक-दूसरे से तुलना करना छोड़ें।
प्रसन्न चौरडिय़ा ने कहा क हम आत्मशक्ति की जागृति की तरफ कदम बढ़ाएं। आत्म शक्ति का जागरण जरूरी है।
आशा पोकरना ने कहा कि मौजूदा समय में शिक्षा जरूरी है। शिक्षा के साथ हम स्वावलम्बी बनें। जीवन में कई तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं लेकिन यदि शिक्षित महिला होगी तो उन कठिनाइयों से पार पाने का रास्ता भी ढूंढ लेंगी।
पिंकी चौपड़ा, रेखा समदडिय़ा, प्रियदर्शना बोहरा, प्रमिला, कांता, पुष्पा समेत अन्य महिलाओं ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त की।