छतरपुर

70 करोड़ रुपए की लागत से जिले में शुरु होंगी 16 नई पेयजल योजनाएं

पहले चरण में मिले 2 करोड़, लवकुशनगर व गौरिहार में 6 जगह पहले होगा काम

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Dec 21, 2021
पहले चरण में मिले 2 करोड़

छतरपुर। जिले के ग्रामीण अंचल में पेयजल की समस्या को देखते हुए 16 नई परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। 70 करोड़ की लागत से जिले में इन परियोजनाओं का निर्माण किया जाएगा। पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री एचएल अहिरवार ने बताया कि 70 करोड़ रूपए की लागत से जिले में नई पेयजल योजनाओं की शुरूआत की जानी है। जिसमें 16 योजनाओं के लिए स्वीकृति प्राप्त हुई है। इनमें से लवकुशनगर और गौरिहार के अंतर्गत 6 स्थानों पर काम शुरू हो चुका है। वहीं, ग्राम कटिया में बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज 2 के तहत भी काम शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि अन्य स्थानों पर पेयजल स्त्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं मिल पाने के कारण योजना शुरू नहीं की जा रही है। फिलहाल शासन से कुछ गांव में पेयजल योजनाओं को शुरू करने हेतु 2 करोड़ रूपए की राशि प्राप्त हुई है।

योजना के लिए बड़ी मुश्किल से मिल रहा पानी
जिले के शहरी क्षेत्रों के अलावा अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल का संकट बढ़ता जा रहा है। पीने के पानी के लिए गांव में पर्याप्त जलस्त्रोत मौजूद नहीं है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और पंचायतों के माध्यम से नए जलस्त्रोतों को खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन ये प्रयास भी सफल नहीं हो पा रहे हैं। हाल ही में पीएचई विभाग ने छतरपुर जिले के 97 गांव में नल-जल योजना के लिए पेयजल स्त्रोतों की खोज की है लेकिन सिर्फ 16 जगह ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सका है।

अवर्षा और जल की बर्बादी से सूख रहे गांव
दरअसल जिले में पिछले 10 वर्षों से लेकर लगातार वर्षा का औसत गिरता रहा है। इस वर्ष भी जिले में औसत से कम बारिश हुई है जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद कूप एवं तालाबों में पर्याप्त पानी मौजूद नहीं है। नवीन पेयजल योजनाएं ट्यूबवैल के जरिये शुरू की जाती हैं लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण इन योजनाओं के कारण ग्रामीण आबादी को लंबे समय तक पानी नहीं मिल पाता। जिले के कई गांव तो ऐसे हैं जहां आबादी को जरूरत का पानी लेने के लिए एक से दो किमी दूर जाना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट की एक बड़ी वजह वर्षा जल का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण न करना भी है। कई गांव ऐसे हैं जो नदियों के किनारे हैं इसके बावजूद यहां पानी का संकट है।

इनका कहना है
नई नल-जल योजनाओं के लिए पेयजल स्त्रोतों की खोज के लिए विभाग ने जो प्रयास किए हैं उसके अंतर्गत नतीजे निराशाजनक हैं। 97 स्थानों में से सिर्फ 16 स्थानों में ही पर्याप्त पेयजल मिला है। इन स्थानों पर काम प्रारंभ कर दिया गया है। अन्य गांव के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।
एचएल अहिरवार, कार्यपालन यंत्री, पीएचई, छतरपुर

Published on:
21 Dec 2021 06:00 am
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