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पार्किंग के अभाव में रेंग रहा शहर, ग्राहकों के स्वाभिमान और राहगीरों के समय से खिलवाड़

शहर के हृदय स्थल से लेकर बाहरी व्यापारिक क्षेत्रों तक संचालित दर्जनों सरकारी और निजी बैंक बिना किसी वैध पार्किंग व्यवस्था के चल रहे हैं।

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बैंक के सामने सडक़ तक बेतरतीब खड़े वाहन

 शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली मुख्य सडक़ें इन दिनों बैंकों की लापरवाही और प्रशासनिक अनदेखी के कारण पार्किंग में तब्दील हो गई हैं। शहर के हृदय स्थल से लेकर बाहरी व्यापारिक क्षेत्रों तक संचालित दर्जनों सरकारी और निजी बैंक बिना किसी वैध पार्किंग व्यवस्था के चल रहे हैं। नतीजा यह है कि हर दिन हजारों राहगीरों का कीमती समय जाम की भेंट चढ़ रहा है और बैंक आने वाले ग्राहकों को अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्टाफ के लिए वीआइपी व्यवस्था, ग्राहकों के लिए सडक़ का किनारा

शहर के अधिकांश बैंक भवनों के एग्रीमेंट में पार्किंग का स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है। जहां कहीं अंडरग्राउंड या कैंपस पार्किंग मौजूद भी है, वहां केवल बैंक अधिकारियों और स्टाफ के वाहन खड़े किए जाते हैं। बैंक को करोड़ों का बिजनेस देने वाले ग्राहकों को दोयम दर्जे का मानते हुए उन्हें सडक़ किनारे वाहन पार्क करने के लिए मजबूर किया जाता है। जब ट्रैफिक पुलिस की गाड़ी आती है या जाम लगता है, तो सबसे ज्यादा जिल्लत इन्हीं ग्राहकों को झेलनी पड़ती है।

अव्यवस्थित ट्रैफिक के मुख्य केंद्र

एसबीआई मुख्य शाखा- छत्रसाल चौराहा से आकाशवाणी मार्ग पर स्थित इस बैंक के कारण सबसे ज्यादा जाम लगता है। निजी भवन में संचालित इस बैंक में पार्किंग केवल स्टाफ के लिए आरक्षित है, जबकि सैकड़ों ग्राहक रोज सडक़ पर वाहन खड़े करते हैं।

यूनियन बैंक व पीएनबी- सरस्वती सदन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थित बैंकों में पैर रखने तक की जगह नहीं है। बुजुर्गों और महिलाओं को दूर वाहन खड़ा करके पैदल बैंक तक संघर्ष करना पड़ता है।

पन्ना रोड व अस्पताल मार्ग- बजाज फाइनेंस और सद्भावना बैंक जैसे संस्थानों के बाहर फुटपाथ तक अतिक्रमित हैं, जिससे पैदल चलने वालों के लिए भी जगह नहीं बची है।

नियमों की धज्जियां उड़ाते भवन मालिक और मैनेजमेंट

नगरपालिका के नियमों के अनुसार किसी भी व्यावसायिक भवन को अनुमति तभी मिलती है जब उसमें पर्याप्त पार्किंग स्पेस हो। लेकिन छतरपुर में बैंक प्रबंधन और भवन मालिकों की सांठगांठ ने इन नियमों को ताक पर रख दिया है। बैंक प्रबंधन सुविधा देने के नाम पर पल्ला झाड़ लेता है और सारा बोझ शहर की सडक़ों पर आ जाता है।

नगरपालिका की चेतावनी

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरपालिका छतरपुर की सीएमओ माधुरी शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जल्द ही शहर के सभी बैंकों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। जिन संस्थानों के पास पार्किंग सुविधा नहीं मिलेगी, उनके खिलाफ न केवल जुर्माने की कार्रवाई होगी, बल्कि उनके लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।