19 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एमपी में 2300 हुए गेहूं के भाव, किसानों को 325 रुपए प्रति क्विंटल का घाटा

Wheat- छतरपुर में गेहूं खरीदी का गणित बिगड़ा… सेटेलाइट सत्यापन और स्लॉट बुकिंग बनी बाधा , 10 हजार पंजीयन अधिक हुए लेकिन आवक पिछले साल से 10 हजार क्विंटल कम; 20 केंद्रों पर नहीं खुला खाता

3 min read
Google source verification
Wheat Farmers in Chhatarpur Face a Loss of ₹325

Wheat Farmers in Chhatarpur Face a Loss of ₹325 (AI Image-ChatGpt)

Wheat- छतरपुर जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की प्रक्रिया 15 अप्रेल से शुरू हो चुकी है, लेकिन शुरुआती चार दिनों के आंकड़े प्रशासन की चिंता बढ़ाने वाले हैं। एक तरफ जहां पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या में भारी उछाल आया है, वहीं दूसरी ओर केंद्रों पर गेहूं की आवक में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आलम यह है कि पिछले साल की तुलना में इस बार 10 हजार अधिक पंजीयन होने के बावजूद, खरीदी पिछले साल के मुकाबले 10 हजार क्विंटल कम हुई है। छोटे किसानों को पैसों की सख्त जरूरत है लेकिन खरीदी में विभिन्न कारणों से विलंब हो रहा है। ऐसे में उन्हें सीधे व्यापारियों को अपनी उपज बेचनी पड़ रही है। बाजार में कम दाम मिलने से किसानों प्रति क्विंटल 325 रुपए का नुकसान हो रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में जिले के लगभग 25 हजार किसानों ने एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया था। इस साल यह संख्या बढ़कर 35193 हो गई है, जिनमें से 26 हजार से अधिक किसानों का सत्यापन भी पूर्ण हो चुका है। रिकॉर्ड पंजीयन के बावजूद बीते चार दिनों में पूरे जिले से मात्र 23 हजार क्विंटल गेहूं की खरीदी हो पाई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में आवक कहीं अधिक थी।

गेहूं की सुचारू खरीदी के लिए जिले में कुल 80 केंद्र बनाए गए हैं। विडंबना यह है कि अभियान शुरू हुए चार दिन बीत जाने के बाद भी 20 केंद्रों पर अभी तक खाता भी नहीं खुल सका है। जिला मुख्यालय के बेहद करीबी केंद्र जैसे सेवारी, गोरैया और बगौता में सन्नाटा पसरा हुआ है। गढ़ीमलहरा ब्लॉक सहित जिले के कई अन्य केंद्रों पर भी खरीदी प्रक्रिया तकनीकी कारणों से रुकी हुई है।

छोटे किसानों को नकदी की जरूरत…325 रुपए का नुकसान उठाकर व्यापारियों को बेच रहे गेहूं

अलग अलग कारणों से रुकी खरीदी के कारण गेहूं किसानों को खासा नुकसान हो रहा है। शासन ने इस बार एमएसपी 2585 रुपए और 40 रुपए बोनस मिलाकर कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर तय की है। इधर बाजार में गेहूं का भाव वर्तमान में 2300 रुपए के आसपास ही है। छोटे किसानों को तत्काल नकदी की जरूरत है लेकिन सरकारी केंद्रों की लंबी कागजी कार्यवाही पर भारी पड़ रही है। सरकारी प्रक्रिया की जटिलता और भुगतान में होने वाले 15 दिनों के इंतजार के कारण किसान सीधे व्यापारियों को अपनी उपज बेच रहे हैं। ऐसे में उन्हें गेहूं में प्रति क्विंटल 325 रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है।

इस बार प्रशासन को लक्ष्य प्राप्त करना कठिन

जिले के लिए इस साल 82 मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का विशाल लक्ष्य रखा गया है। पोर्टल पर दर्ज 73341 हेक्टेयर के रकबे को देखते हुए लक्ष्य तो बड़ा है, लेकिन वर्तमान व्यवस्थाओं और किसानों के कम होते रुझान को देखकर इस लक्ष्य की प्राप्ति कठिन नजर आ रही है।

ये तकनीकी बाधाएं बन रही परेशानी का कारण

स्लॉट बुकिंग और ओटीपी:
किसानों को ई-टोकन के लिए स्लॉट बुक करना अनिवार्य है, लेकिन रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी न आने के कारण बुकिंग नहीं हो पा रही है।
सेटेलाइट सत्यापन का पेच: स्लॉट बुक करते समय पोर्टल पर सेटेलाइट द्वारा असत्यापित किया गया है का संदेश आ रहा है, जिससे किसान सोसाइटियों और एमपी ऑनलाइन की दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
अस्पष्ट जानकारी: रकबे और पोर्टल की पात्रता को लेकर किसानों के पास स्पष्ट जानकारी का अभाव है, जिससे वे केंद्रों पर आने से कतरा रहे हैं।

छतरपुर के जिला आपूर्ति अधिकारी सीताराम कोठारे बताते हैं कि चार दिनों में लगभग 25 हजार क्विंटल गेहूं की खरीदी हुई है। पिछले साल की तुलना में पंजीयन अवश्य बढ़े हैं, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण सत्यापन और स्लॉट बुकिंग में कुछ देरी हो रही है। हम तकनीकी खामियों को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं और जल्द ही सभी केंद्रों पर सक्रियता दिखेगी।