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बाबा रामदेव की ‘पतंजलि कंपनी’ को बड़ा झटका, दलिया लैब टेस्ट में फेल, छतरपुर ADM कोर्ट ने ठोका जुर्माना

Baba Ramdev Patanjali: बाबा रामदेव की पतंजलि कंपनी को छतरपुर एडीएम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया। कोर्ट ने दलिया के पैकेट पर पोषण संबंधी जानकारी छिपाने पर 3.40 लाख का ठोका जुर्माना।

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Baba Ramdev Patanjali Ayurved Limited Fined dalia misbranded chhatarpur adm court

Patanjali Ayurved Limited Fined: एडीएम कोर्ट ने बाबा रामदेव की पतंजलि कंपनी पर लगाया जुर्माना (फोटो - Patanjali Yogpeeth Website)

Patanjali Ayurved Limited Fined: स्वदेशी और शुद्धता के बड़े-बड़े दावों के बीच योगगुरु बाबा रामदेव (Baba Ramdev) की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (Patanjali Ayurved Limited) को छतरपुर में एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। बाजार में बिकने वाले पतंजलि के पैकेट बंद दलिया का सैंपल लैब टेस्ट में फेल हो गया है। छतरपुर के अपर जिला मजिस्ट्रेट एवं न्याय निर्णायक अधिकारी नम: शिवाय अरजरिया की अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड सहित उसकी पूरी सप्लाई चेन को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई करते हुए सभी अनावेदकों पर कुल 3 लाख 40 हजार रुपए का अर्थदंड (जुर्माना) लगाया है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

यह कानूनी कार्रवाई आज से करीब साढ़े तीन साल पहले शुरू हुई एक औचक जांच का नतीजा है। 17 नवंबर 2022 को शाम 4 बजे सागर रोड बगौता तिराहा (छतरपुर) स्थित अपना किराना बाजार से तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने संदेह के आधार पर टाटा टी अग्नि और पतंजलि दलिया पैक्ड (500 ग्राम) के नमूने कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त किए थे। इन नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में जहां एक तरफ टाटा टी का सैंपल मानक स्तर पर पूरी तरह खरा (पास) पाया गया, वहीं पतंजलि दलिए का सैंपल नियमों के विरुद्ध यानी मिसब्रांडेड' (मिथ्याछाप) घोषित कर दिया गया।

क्यों फेल हुआ पतंजलि दलिए का सैंपल?

भोपाल प्रयोगशाला की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, पतंजलि दलिए के पैकेट पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग एवं डिस्प्ले) विनियम 2020 के नियम 5(3) का खुला उल्लंघन किया गया था। कंपनी ने पैकेट के ऊपर अनिवार्य रूप से छापी जाने वाली पोषण संबंधी जानकारी को छिपा लिया था। नियमों के मुताबिक, उपभोक्ताओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वे जो उत्पाद खरीद रहे हैं, उसमें पोषण की मात्रा क्या है, लेकिन पतंजलि के इस पैकेट पर यह जानकारी गायब थी।

अदालत में कंपनी की दलील हुई ढेर

सुनवाई के दौरान पतंजलि कंपनी की ओर से यह तर्क देकर बचने की कोशिश की गई कि 6 जनवरी 2023 से गेहूं के टूटे स्वरूप (दलिया) को न्यूट्रिशन लेबलिंग से छूट मिल चुकी है। हालांकि, एडीएम कोर्ट ने कंपनी की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा यह सैंपल 17 नवंबर 2022 को लिया गया था, और उस पिछली तारीख पर यह छूट कानूनी रूप से लागू नहीं थी। नियम का उल्लंघन जिस वक्त हुआ, सजा उसी के आधार पर तय होगी।

जुर्माने का पूरा गणित- विनिर्माता से लेकर रिटेलर तक पर कार्रवाई

एडीएम कोर्ट ने लोक स्वास्थ्य के हित को सर्वोपरि मानते हुए इस पूरी लापरवाही में शामिल हर कड़ी की जवाबदेही तय की है। कोर्ट ने मुख्य विनिर्माता कंपनी से लेकर उसे बेचने वाले छोटे दुकानदार तक पर निम्नलिखित जुर्माना लगाया है।

  • पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (विनिर्माता कंपनी - हरिद्वार, उत्तराखंड)- 1,00,000 रुपए
  • एस परणीत राजन (कंपनी के मनोनीत अधिकारी / नॉमिनी)- 1,00,000 रुपए
  • रविकान्त दुबे (सप्लायर - प्रोपराइटर, स्वदेशी ट्रेड लिंक, झांसी, उ.प्र.) 50,000 रुपए
  • संजय कुमार अग्रवाल (स्थानीय कारोबारी - प्रो. लक्ष्मी सेनेटरी हाउस, छतरपुर) 50,000 रुपए
  • संदीप विश्वकर्मा एवं कृष्ण कुमार विश्वकर्मा (दुकानदार - अपना किराना बाजार, छतरपुर) 20,000 रुपए (प्रत्येक पर)

एक सप्ताह का समय

न्यायालय ने इस आदेश के साथ ही सभी दोषियों को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शासन के निर्देशों और जन स्वास्थ्य से जुड़े नियमों का पालन करना हर छोटी-बड़ी कंपनी का अनिवार्य कर्तव्य है। ब्रांड चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, नियमों से ऊपर नहीं हो सकता। एडीएम कोर्ट ने आदेश पारित करते हुए सभी अनावेदकों को एक सप्ताह के भीतर जुर्माने की यह राशि शासकीय कोष में जमा करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

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