
108 एम्बुलेंस
जिले की सड़कों पर हर दिन दुर्घटनाओं का खूनी खेल जारी है। 108 एम्बुलेंस सेवा के ताजा आंकड़े रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में छतरपुर जिले में 2,050 से अधिक सड़क हादसे दर्ज किए गए हैं, जो जिले में सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़े करते हैं।
आंकड़ों की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि छतरपुर जिले में हर महीने औसतन 150 से 200 के बीच दुर्घटनाएं हो रही हैं। वहीं, पूरे मध्यप्रदेश का परिदृश्य और भी डरावना है। राज्य भर में कुल 1,03,294 'ट्रॉमा' (दुर्घटना) केस दर्ज किए गए हैं, जो प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं की भयावह तस्वीर पेश करते हैं।
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो हादसे के शिकार होने वालों में युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। ट्रॉमा के आंकड़ों के अनुसार, 16 से 30 वर्ष के आयु वर्ग के लोग सबसे ज्यादा (61%) इन हादसों का शिकार हो रहे हैं। इसके बाद 31 से 45 वर्ष के आयु वर्ग का हिस्सा 24% है। यह साफ दर्शाता है कि लापरवाह ड्राइविंग, तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी का खामियाजा युवा पीढ़ी अपनी जान देकर चुका रही है।
छतरपुर जिले के मासिक डेटा पर गौर करें तो मई 2025 में 250 दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो साल के अंत और शुरुआत में कम-ज्यादा होती रहीं, लेकिन अप्रेल 2026 तक यह आंकड़ा 201 पर पहुंच गया। यह दर्शाता है कि सड़कों पर हादसों का ग्राफ थमने का नाम नहीं ले रहा है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छतरपुर में बढ़ते हादसों का मुख्य कारण सड़कों की स्थिति, हेलमेट का इस्तेमाल न करना और ओवरस्पीडिंग है। जिला प्रशासन और यातायात विभाग को अब सख्त कदम उठाने की जरूरत है।सुधार के लिए जरूरी कदम
सड़क सुरक्षा अभियान: जिले के प्रमुख चौराहों और राजमार्गों पर पुलिस द्वारा सघन चेकिंग और हेलमेट/सीट बेल्ट अनिवार्य करना।
युवाओं में जागरूकता: कॉलेजों और स्कूलों में सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष वर्कशॉप का आयोजन।
अस्पताल प्रबंधन: ट्रॉमा सेंटर्स में घायलों के लिए बेहतर और तत्काल उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करना ताकि इलाज के दौरान होने वाली मौतों को रोका जा सके।
Published on:
11 Jun 2026 10:52 am
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