यह मशीन कभी-कभार ही सडक़ पर दिखाई देती है और आम नागरिक इसे देखकर ही मशीन के फायदों की कल्पना कर सकते हैं।
नगर पालिका ने सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए चार करोड़ रुपए की लागत से आठ नई कचरा मशीनें खरीदी थीं। शुरुआत में शहरवासियों में उम्मीद जगी कि अब गली-नुक्कड़ तक सफाई का व्यापक अभियान चलेगा। लेकिन अब कुछ ही दिनों के भीतर यह महंगी मशीनें नगर पालिका के गैराज में धूल खा रही हैं।
मशीनों को चलाने के लिए न तो पर्याप्त ड्राइवर हैं और न ही ऑपरेटिंग कर्मचारी। नगर पालिका ने इस समस्या को हल करने के लिए आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से करीब 150 कर्मचारियों की भर्ती की है, लेकिन इन मशीनों के चलने की कोई ठोस गतिविधि नजर नहीं आ रही। पार्षदों का कहना है कि पूर्व कर्मचारियों के नाम केवल कागजों में दर्ज कर दोगुने कर्मचारियों का वेतन निकाला जा रहा है। इस मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ये कर्मचारी कहां काम कर रहे हैं।
नगर पालिका ने 1.21 करोड़ रुपए की लागत से ऑटोमेटिक रोड स्वीपिंग मशीन खरीदी थी। यह मशीन 8 किलोमीटर लंबी सडक़ को एक घंटे में साफ करने का दावा करती थी। वैक्यूम क्लीनर और छिडक़ाव के माध्यम से धूल-मुक्त सफाई की भी सुविधा दी गई थी। लेकिन आज यह मशीन कभी-कभार ही सडक़ पर दिखाई देती है और आम नागरिक इसे देखकर ही मशीन के फायदों की कल्पना कर सकते हैं।
इसके अलावा नगर पालिका ने 30 लाख की जेटिंग कम फॉगिंग मशीन, 30 लाख की वैक्यूम मशीन, 60 लाख की कॉम्पैक्ट मशीन, 78 लाख की दो जेसीबी, 21 लाख की तीन ट्रैक्टर, 26 लाख की छोटी जेसीबी और 28 लाख की चार टिपर भी खरीदी हैं। लेकिन कर्मचारियों की कमी और आउटसोर्सिंग में गड़बड़ी के कारण यह मशीनें भी काम नहीं कर पा रही हैं।
नगर पालिका के रिकॉर्ड में कुल 678 सफाई कर्मचारी हैं, लेकिन सैकड़ों वीआईपी ड्यूटी में तैनात हैं। हर वार्ड में 10 से अधिक कर्मचारियों की जरूरत होने के बावजूद, आमतौर पर केवल 2-3 कर्मचारी ही सक्रिय हैं। मुख्य सडक़ों तक ही सफाई अभियान सीमित है और डोर-टू-डोर सफाई नाममात्र की ही हो रही है।
अंदरूनी सडक़ों और वार्डों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। कचरा वाहन होने के बावजूद घर-घर तक सफाई नहीं हो रही। अधिकांश नालियां पॉलीथिन और कचरे से भरी हुई हैं, जिससे गंदा पानी जमा हो रहा है। इससे स्वास्थ्य और स्वच्छता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
सभी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। बारिश में सडक़े गीली होने से समस्या हो रही है। धूल की समस्या का समाधान करने का पूरा प्रयास होगा।
माधुरी शर्मा, सीएमओ, छतरपुर