पटवारी मौजा छतरपुर के 1939-40 के बंदोबस्त रिकॉर्ड खंगालने पर पता चलता है कि यह पूरी 5.90 एकड़ जमीन घास भूमि सरकारी के रूप में दर्ज थी। नियमानुसार यह जमीन केवल सार्वजनिक या शैक्षणिक कार्यों के लिए उपयोग की जा सकती थी।
शहर के हृदय स्थल में स्थित पीएमश्री बहुउद्देशीय विद्यालय क्रमांक 2 के खेल मैदान को लेकर एक सनसनीखेज सच सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, स्कूल के खेल मैदान और सार्वजनिक उपयोग के लिए कुल 5.90 एकड़ जमीन (खसरा नंबर 3206) आरक्षित थी। लेकिन वर्तमान में इस बेशकीमती जमीन के लगभग आधे हिस्से, यानी ढाई एकड़ पर रसूखदारों ने कब्जा कर वहां अनुराग सिटी सेंटर मॉल और अन्य व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स तान दिए हैं। शेष जमीन पर आज खेल मैदान तो है, लेकिन कब्जाई गई ढाई एकड़ जमीन वापस न मिलने से स्कूल का विकास और बच्चों की खेल गतिविधियां पर असर पड़ रहा है।
पटवारी मौजा छतरपुर के 1939-40 के बंदोबस्त रिकॉर्ड खंगालने पर पता चलता है कि यह पूरी 5.90 एकड़ जमीन घास भूमि (सरकारी) के रूप में दर्ज थी। नियमानुसार यह जमीन केवल सार्वजनिक या शैक्षणिक कार्यों के लिए उपयोग की जा सकती थी।
खेल मैदान की जमीन पर मॉल: कुल रकबे में से ढाई एकड़ जमीन को बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के, साठगांठ कर निजी घोषित कर दिया गया।
अवैध निर्माण: इसी कब्जाई गई ढाई एकड़ जमीन पर आज अनुराग सिटी सेंटर मॉल, महतो पेट्रोल पंप और गर्ग मार्केट जैसे बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान सीना ताने खड़े हैं।
बचा हुआ हिस्सा: शेष जमीन फिलहाल खेल मैदान के रूप में उपयोग हो रही है, लेकिन मुख्य सड़क की कीमती जमीन रसूखदारों के कब्जे में जा चुकी है।
समाजसेवी नीलेश दुबे की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, तत्कालीन एसडीएम छतरपुर ने वर्ष 2017 की एक अपील पर सुनवाई करते हुए दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया था। एसडीएम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था।
तहसीलदार का पूर्व का फैसला (जिसने शिकायत खारिज की थी) पूरी तरह आधारहीन और गलत है।
5.90 एकड़ जमीन का बंदोबस्त रिकॉर्ड सरकारी है, अतः इसे निजी करना धोखाधड़ी है।
कब्जाई गई जमीन से अतिक्रमण हटाने और दोषियों को सिविल जेल भेजने के सख्त आदेश दिए गए थे।
विडंबना देखिए कि कोरोना काल में एसडीएम चंदेल के निधन के बाद, प्रशासन मानो इस आदेश को ही भूल गया। 8 साल बीत जाने के बाद भी ढाई एकड़ की वह सरकारी जमीन भू-माफियाओं के चंगुल में है।
आज जब केंद्र सरकार ने इस विद्यालय को पीएमश्री योजना में शामिल कर इसे मॉडल स्कूल बनाने का लक्ष्य रखा है, तब स्कूल के पास अपनी ही ढाई एकड़ जमीन का न होना एक बड़ा सवालिया निशान है।
पीएम श्री नंबर 2 स्कूल का खेल मैदान बाउंड्रीवॉल के अंदर है। मॉल की जमीन बंदोबस्त के सरकारी रिकॉर्ड में क्या थी, इसकी जानकारी नहीं है। मैं पता करता हूं, स्कूल को आंवटित जमीन पूरी है या नहीं। उस अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
एएस पांडेय, जिला शिक्षा अधिकारी