
जिला मुख्यालय का डेरा पहाड़ी स्कूल
जिले के सरकारी स्कूलों में 1 अप्रेल से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 का शंखनाद हो गया है। शासन और प्रशासन स्तर पर बच्चों के सर्वांगीण विकास और खेल प्रतिभाओं को निखारने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के ठीक उलट और डराने वाली है। छतरपुर के 889 स्कूलों में खेल के मैदान पूरी तरह से लापता हैं। नया सत्र शुरू होने को है, लेकिन हजारों बच्चों के पास न भागने की जगह है और न ही खेलने का ठिकाना। विशेष रूप से राजनगर और बिजावर ब्लॉक में हालात सबसे ज्यादा खराब बने हुए हैं।
जिले के कुल 2240 शासकीय स्कूलों के माध्यम से बच्चों का भविष्य गढ़ने का सपना दिखाया जा रहा है, लेकिन खेल और शारीरिक विकास के मोर्चे पर बुनियादी ढांचा पूरी तरह फेल नजर आता है। जिले के लगभग 40 प्रतिशत स्कूलों के पास बच्चों के खेलने के लिए खुद का मैदान तक नहीं है। शासन एक ओर खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं तैयार करने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले के हजारों छात्र धूल भरी संकरी गलियों, असुरक्षित सड़कों या उबड़-खाबड़ खुले स्थानों पर खेलने को मजबूर हैं।
जिले के शिक्षा विभाग के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि बुनियादी ढांचे के मामले में राजनगर और बिजावर ब्लॉक की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है:
राजनगर ब्लॉक: जिले का यह हिस्सा विकास के दावों में सबसे पीछे नजर आ रहा है। यहाँ संचालित स्कूलों में से 50 प्राथमिक और 15 माध्यमिक स्कूलों में खेल मैदान की सुविधा पूरी तरह शून्य है। यहां के बच्चों के लिए पीटी और अन्य खेल गतिविधियां केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई हैं।
बिजावर ब्लॉक: यहां की स्थिति और भी बदतर है। बिजावर के 50 प्राथमिक स्कूलों के पास बच्चों की खेल गतिविधियों के लिए कोई निश्चित या सुरक्षित स्थान उपलब्ध नहीं है। स्कूल परिसर के नाम पर केवल कुछ कमरों का ढांचा खड़ा है, जहां खेल की घंटी का कोई मतलब नहीं रह जाता।
जिले के स्कूलों में सुविधाओं के अभाव को इन विभागीय आंकड़ों से समझा जा सकता है:
कुल शासकीय स्कूल: 2240
खेल मैदान विहीन स्कूल: 889 (लगभग 40%)
बाउंड्रीवॉल वाले स्कूल: मात्र 555
सुरक्षा का संकट: 1685 स्कूलों में बाउंड्रीवॉल नहीं है, जिसका सीधा मतलब है कि जहां थोड़े-बहुत खुले मैदान हैं भी, वहां सुरक्षा का भारी अभाव है।
बोर्ड परीक्षाएं समाप्त हो चुकी हैं और अब बच्चे नए उत्साह के साथ नए सत्र की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खेल के बिना बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास अधूरा है। खेल शिक्षकों का कहना है कि मैदानों के अभाव में खेल गतिविधियों का संचालन केवल कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रह गया है। जिन स्कूलों में बाउंड्रीवॉल नहीं है, वहां बचे-कुचे खुले स्थानों पर भी आवारा पशुओं, कचरे के ढेर और बाहरी तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे छात्राओं की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं।
बजट के अनुसार स्कूलों में व्यवस्थाओं में सुधार की प्रक्रिया जारी है। सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम लगातार चल रहा है। निर्माण कार्यों और भूमि आवंटन की प्रक्रिया के माध्यम से हमारा प्रयास है कि सभी स्कूलों में जल्द से जल्द खेल मैदान और अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।
एएस पांडेय, जिला शिक्षा अधिकारी, छतरपुर
Published on:
02 Apr 2026 11:23 am
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