
साहिल खान
बुंदेलखंड की तपती धरती और अभावों के बीच पले-बढ़े एक युवा ने साबित कर दिया कि अगर हौसले फौलादी हों, तो शारीरिक अक्षमता और गरीबी भी रास्ता नहीं रोक सकती। राजनगर विधानसभा क्षेत्र के छोटे से ग्राम तालगांव के निवासी साहिल खान उर्फ शहीद का चयन श्रीलंका में टी 20 सीरीज के लिए राष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट टीम में हुआ है।
इस माह श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित होने वाली त्रिकोणीय सीरीज में भारत का मुकाबला मेजबान श्रीलंका और बांग्लादेश से होगा। शहीद खान इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। गौरतलब है कि शहीद इससे पहले पटना और उज्जैन में भी अपने शानदार ऑलराउंडर प्रदर्शन से धाक जमा चुके हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा आयोजित 100 घंटे के क्रिकेट महाकुंभ में भी शहीद का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा था।
साहिल खान की इस स्वर्णिम सफलता के पीछे संघर्ष की एक ऐसी दास्तान छिपी है, जो रोंगटे खड़े कर देती है। साहिल बचपन में अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिएगांव-गांव जाकर बर्फ बेचा करता था। बेटे के सपनों को पंख देने के लिए पिता व मां ने दिल्ली के निर्माण स्थलों पर मजदूरी की और सिर पर ईंट-तसले उठाए, ताकि साहिल क्रिकेट के मैदान पर अपनी प्रतिभा निखार सके।
अपनी सफलता से गदगद साहिल खान का युवाओं के लिए एक ही संदेश है पॉवर शरीर में नहीं, बल्कि इरादों में होती है। अगर हौसले बुलंद हों तो दिव्यांगता कोई मायने नहीं रखती। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की खेल प्रोत्साहन नीतियों और ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने के विजन के बीच, साहिल की यह उपलब्धि राजनगर क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन गई है।
साहिल की इस ऐतिहासिक कामयाबी पर बधाई देने वालों का उनके घर पर तांता लगा हुआ है। तालगांव सरपंच मनोज पटेल, अवध पटेल, हरियाणा पटेल और मोहम्मद इमरान (ललपुर) ने साहिल के निवास पहुंचकर परिजनों का मुंह मीठा कराया और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। ग्रामीणों को पूरी उम्मीद है कि साहिल श्रीलंका दौरे पर शानदार प्रदर्शन कर तिरंगे का मान पूरी दुनिया में बढ़ाएंगे।
Published on:
02 Apr 2026 11:31 am
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