
ट्राइसाइकिल सुधरने पर खुशी जताती दिव्यांग महिला
जिले के सिमरिया चंदला निवासी दिव्यांग महिला गिल्ली पाल की मार्मिक व्यथा, जिसे पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, उसका सकारात्मक असर देखने को मिला है। अपने तीन साल के घायल मासूम बेटे को गोद में लेकर न्याय की गुहार लगाने पहुंची इस लाचार माँ की पुकार अंततः प्रशासन के कानों तक पहुंची। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के कड़े निर्देशों के बाद सामाजिक न्याय विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए गिल्ली पाल की खराब पड़ी बैटरी वाली ट्राइसाइकिल को दुरुस्त कर दिया है।
दिव्यांग गिल्ली पाल पिछले छह महीनों से अपनी खराब ट्राइसाइकिल की बैटरी बदलवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रही थीं। दिव्यांग पुनर्वास केंद्र ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए थे कि एक साल की सर्विस अवधि बीत जाने के बाद बैटरी का खर्च लाभार्थी को खुद उठाना होगा। आर्थिक रूप से कमजोर गिल्ली पाल के लिए यह खर्च उठाना असंभव था। 17 मार्च को जब वह 100 किलोमीटर दूर से कलेक्टर कार्यालय आ रही थीं, तभी सड़क पार करते समय उनके साथ मौजूद उनका मासूम बेटा गिरकर घायल हो गया था। घायल बेटे को पट्टी बंधी हालत में गोद में लेकर जब वह जनसुनवाई में पहुंचीं, तो यह तस्वीर सिस्टम की संवेदनहीनता का प्रतीक बन गई थी।
17 मार्च को सामाजिक न्याय विभाग के प्रभारी उपसंचालक कौशल सिंह और कर्मचारी नफीस खान ने इस पूरे मामले और गिल्ली पाल की गंभीर आर्थिक स्थिति से कलेक्टर पार्थ जैसवाल को अवगत कराया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल दिव्यांग पुनर्वास केंद्र को निर्देश दिए कि बिना किसी देरी के महिला की ट्राइसाइकिल में सुधार किया जाए।
प्रशासनिक सक्रियता का नतीजा यह रहा कि गिल्ली पाल की ट्राइसाइकिल में नई बैटरी डालकर उसे पूरी तरह चलने लायक बना दिया गया है। अपनी सवारी फिर से ठीक होते देख गिल्ली पाल के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। उन्होंने इस मदद के लिए जिला कलेक्टर और सामाजिक न्याय विभाग का सहृदय धन्यवाद किया है।
Published on:
01 Apr 2026 11:23 am
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