
मोबाइल टावर
उपभोक्ताओं के साथ टेलीकॉम कंपनियां छल कर रही हैं। 5जी नेटवर्क की स्पीड का वादा करके अभी शहर समेत जिले में पूरी तरह से लाइन बिछाने में भी कंपनियां खरी नहीं उतर पाई हैं। नतीजन हर सौ-दो सौ मीटर के बाद नेटवर्क बदल रहा है। जबकि उपभोक्ताओं से कंपनियां 5जी स्पीड का चार्ज वसूल रही हैं। वहीं जिले के अंचल में तो नेटवर्क है ही नहीं, लोगों को पेड़ों या ऊंचाई पर जाकर नेटवर्क खोजना पड़ रहा है। इसमें चंदला क्षेत्र में तो लोग नेटवर्क न होने से गांव से बाहर आकर बात कर रहे हैं।
टेलीकॉम कंपनियों ने 5जी के नाम पर करीब डेढ़ गुना ज्यादा चार्ज बढ़ा दिए हैं। इसके बाद भी नेटवर्क स्पीड में कोई सुधार नहीं हुआ है। इसका मतलब कंपनियों ने पैसा तो वसूला, लेकिन उपभोक्ताओं को सुविधा नहीं दी गई। छतरपुर शहर में अभी तक पूरी तरह से फाइव जी की स्पीड देने में टेलीकॉम कंपनियां विफल हैं।
टेलीकॉम कंपनियों को अकेले जिले से हर महीने करोड़ों का फायदा हो रहा है। जिले की लगभग 20 लाख आबादी है जिसमें सात से आठ लाख मोबाइल उपभोक्ता हैं। प्रत्येक उपभोक्ता कम से कम तीन सौ रुपए का रिचार्ज करा रहा है। वहीं टेलीकॉम कंपनियों ने 5जी डाटा का चार्ज 350 रुपए तय किया है, उस हिसाब से केवल 28 दिनों में कंपनी के पास 28 करोड़ रुपए पहुंच रहे हैं। वहीं कुछ लोग इससे बड़ा रिचार्ज कराते हैं तो यह संख्या और भी बढ़ रही है।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने कंपनियों को 28 की जगह तीस दिन रिचार्ज अवधि करने की बात कही थी, लेकिन कंपनियों ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। इसके अलावा पूरी तरह से फाइव जी स्पीड देने में कंपनियां असफल हैं।
-80 डीबीएम- उत्कृष्ट- अधिकतम डाटा गति के साथ मजबूत सिग्नल
-80 से 90 डीबीएम- अच्छा- अच्छी डाटा स्पीड के साथ मजबूत सिग्नल
-90 से-100 डीबीएम- निष्पक्ष से कम विश्वसनीय, डाटा स्पीड तो प्राप्त की जा सकती है, लेकिन डाटा में मामूली कमी संभव है।
-110 डीबीएम- ड्रॉप-आउट प्रदर्शन में भारी गिरावट।
वर्तमान में स्थिति:
3-7 एमबीपीएस डाउनलोड
1-7 एमबीपीएस अपलोड
हम केवल नेटवर्क के प्रसार पर नजर रखते हैं। कंपनियों द्वारा ई-गवर्नेस से बातचीत की जाती है। हम सूचना बस उपलब्ध कराते हैं।
धर्मेंद्र विश्वकर्मा, सूचना विज्ञान अधिकारी
Published on:
30 Mar 2026 10:55 am
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