
रामनवमीं जुलूस
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव रामनवमी के पावन अवसर पर समूचा छतरपुर शहर भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। सुबह से ही मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया था, लेकिन दोपहर होते-होते आस्था का जो सैलाब सड़कों पर उतरा, उसने एक नया इतिहास रच दिया। शहर में निकली तीन किलोमीटर लंबी भव्य शोभायात्रा में लगभग 50 हजार रामभक्तों ने हिस्सा लिया, जिससे चारों ओर केवल जय श्री राम के नारे ही गुंजायमान रहे।
उत्सव की शुरुआत सुबह 11 बजे रामलीला मैदान के भव्य मंच से हुई। यहां रामलीला के कुशल कलाकारों ने पूरी निष्ठा और भक्ति के साथ भगवान राम के जन्म की लीला का जीवंत मंचन किया। दोपहर 2 बजे तक चली इस लीला को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। कार्यक्रम के समापन पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने सामूहिक रूप से भगवान श्री राम की आरती उतारी और भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया।
इस गरिमामयी अवसर पर क्षेत्रीय विधायक ललिता यादव, पूर्व विधायक आलोक चतुर्वेदी, प्रदेश उपाध्यक्ष नंदिता पाठक, नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चौरसिया, पूर्व विधायक उमेश शुक्ला, पूर्व जिलाध्यक्ष पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह, अर्चना सिंह के साथ-साथ कलेक्टर पार्थ जैसवाल, जिला पंचायत सीईओ नम:शिवाय अरजरिया, एसपी अगम जैन और एसडीएम प्रशांत अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आरती के पश्चात जब शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ, तो सबसे आगे प्रताप नवयुवक संघ द्वारा तैयार की गई भगवान गणेश की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। इस वर्ष शोभायात्रा की सबसे बड़ी विशेषता मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी रही। पिछले 15 दिनों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं लगभग 2000 युवतियों और महिलाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। तलवारबाजी, डमरू वादन, फरसा प्रदर्शन, बैंड और झांझर की धुनों पर इन बेटियों ने ऐसे करतब दिखाए कि हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया। भगवा ध्वज थामे इन वीरांगनाओं ने शोभायात्रा की भव्यता में चार चांद लगा दिए।
शोभायात्रा में सजी-धजी बग्घियों पर विभिन्न देवी-देवताओं के स्वरूप विराजमान थे। पैदल चलते हुए भगवान शंकर का स्वरूप भक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। उज्जैन के बाबा महाकाल की तर्ज पर सजाई गई झांकी, भगवान राम के बाल स्वरूप और उनके वनगमन की झांकियों ने त्रेतायुग की यादें ताजा कर दीं। डीजे, बैंड और पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप पर भक्त झूमते रहे।
जैसे-जैसे शोभायात्रा आगे बढ़ी, जनसैलाब बढ़ता गया। छत्रसाल चौराहे के पास पन्नानाका की ओर से आईं झांकियां भी इसमें सम्मिलित हो गईं, जिससे सड़कों पर तिल रखने की जगह नहीं बची। पूरे मार्ग में लगभग 100 से अधिक स्थानों पर विभिन्न राजनैतिक, सामाजिक और व्यापारिक संगठनों द्वारा स्वागत मंच लगाए गए थे। कहीं पुष्पवर्षा की जा रही थी, तो कहीं रामभक्तों के लिए शरबत, जलजीरा, हलवा और स्वल्पाहार की व्यवस्था थी। भीषण गर्मी को देखते हुए नगर पालिका के टैंकर सड़कों पर पानी का छिड़काव कर रहे थे ताकि नंगे पैर चल रहे भक्तों को राहत मिल सके।
श्रीराम सेवा समिति के तत्वावधान में निकाली गई यह यात्रा श्रीराम चरित मानस प्रांगण से शुरू होकर गांधी चौक, महल रोड, छत्रसाल चौक, आकाशवाणी तिराहा, बस स्टैंड और मऊ दरवाजा होते हुए पुनः गांधी चौक स्थित श्रीराम दरबार पहुंची। शोभायात्रा के अंत में भगवान राम का विशाल रथ चल रहा था, जिसे सर्वसमाज के लोगों और मातृशक्ति ने श्रद्धाभाव से खींचा। देर शाम दिव्य राम रथ की महाआरती के साथ इस ऐतिहासिक आयोजन का समापन हुआ।प्रशासनिक मुस्तैदी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से यह भव्य आयोजन न केवल सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ, बल्कि इसने छतरपुर की धार्मिक एकता और अखंडता की एक नई मिसाल पेश की।
Published on:
28 Mar 2026 10:44 am
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