छतरपुर

नकली खाद से सावधान, यूपी के माफिया छतरपुर व आसपास के जिले में खपा रहे अमानक खाद

जिले में खाद की मांग और सप्लाई के बीच के अंतर का लाभ नकली खाद बेचने वाले उठा रहे हैं। महोबा-बांदा जिले में नकली खाद बनाकर खाद माफिया जिले में छोटे मालवाहक वाहनों से सप्लाई कर रहे हैं।

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Nov 13, 2024
प्रेस कॉन्फ्रेंस करते अधिकारी

छतरपुर. जिले में खाद की मांग और सप्लाई के बीच के अंतर का लाभ नकली खाद बेचने वाले उठा रहे हैं। महोबा-बांदा जिले में नकली खाद बनाकर खाद माफिया जिले में छोटे मालवाहक वाहनों से सप्लाई कर रहे हैं। जिले में हरपालपुर रेलवे स्टेशन पर आने वाली खाद की रैक का पता लगाकर माफिया उसी कंपनी के नकली बैग कानपुर से छपवाकर उसमें नकली खाद की पैकिंग कर जिले के गांव-गांव में छोटे-छोटे खाद दुकानदारों व किसानों से संपर्क करते हैं। रैक प्वांइट से चुराया गया खाद सस्ते में बेचने का झांसा देकर नकली खाद थमा रहे हैं। बांदा-महोबा जिले में एक सप्ताह में दो फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद एक बार फिर से ये साफ हो गया कि यूपी के सीमावर्ती इलाके में नकली खाद बनाकर मध्यप्रदेश के छतरपुर-पन्ना, टीकमगढ़ जिले में खपाया जा रहा है।

इस कारण से नकली खाद वालों को मिल रहा मौका


किसानों को सोसाइटियों से केवल उधार खाद मिल रहा है, जबकि जिले में बड़ी संख्या में किसान कर्जमाफी योजना के मकडज़ाल में अब भी फंसे हुए हैं, जिसके चलते उनके पास केवल नकद खाद खरीदने का विकल्प होता है। लेकिन जिले में सरकारी क्षेत्र मेें 80 और निजी में केवल 20 प्रतिशत खाद का कोटा है। सरकारी खाद सोसाइटियों के जरिए ही मिलता है, जहां से ज्यादातर किसान खाद नहीं ले पा रहे हैं, वहीं निजी क्षेत्र में किसानों को खाद जरूरत के मुताबिक मिल नहीं पाती है। इसी का लाभ नकली खाद बेचने वाले उठा रहे हैं।

इस तरह बना रहे नकली खाद


बांदा-महोबा और चित्रकूट इलाके में गांव-गांव में खाद माफिया के लोग नकली खाद बना रहे हैं। 15 से 20 फीट ऊंचाई से या घर की छत से रेत को जमीन पर गिराते हुए उसमें चावल-गेहूं का भूसा मिलाया जाता है। भूसा रेत के साथ गोली का आकार ले लेता है। जिसमें खाद के रंग का कलर मिलाकर उसे खाद का रुप दे दिया जाता है। फिर रैक में आई खाद की कंपनी की बोरियों में इस नकली खाद को भरकर सप्लाई के लिए तैयार किया जाता है।

यूपी में नहीं खप पाता नकली, तो एमपी के जिले बन रहे शिकार


चूंकि यूपी में खाद की सप्लाई चेन इतनी मजबूत है कि किसान नकली खाद के चक्कर में नहीं फंसता। गांव-गांव में सोसाइटी है, जहां किसान को नकद और उधार, दोनों रुप में खाद उपलब्ध है, इसलिए यूपी के किसान को खाद की समस्या नहीं होती है। ऐसे में नकली खाद बेचने वालों को वहां मार्केट नहीं मिल पाता है। लेकिन एमपी के छतरपुर, टीकमगढ़ जिलों में खाद की मांग व सप्लाई के बीच के गैप का लाभ उठाकर नकली खाद खपाई जा रही है।

छतरपुर प्रशासन ने बीते वर्षो में पकड़ा था नकली खाद


पिछले साल यूपी से आया नकली खाद चंदला, ईशानगर और नौगांव में प्रशासन ने पकड़ा था। छोटे मालवाहक वाहनों के जरिए आया ये नकली खाद पकड़े जाने के वाबजूद कार्रवाई नहीं हो पाई। ग्रामीणों की शिकायत पर पकड़ा गया, लेकिन केस की कार्रवाई के दौरान गवाही न मिलने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कृषि विभाग व स्थानीय प्रशासन इस बार भी नकली खाद पर नजर बनाए है, लेकिन किसानों को सस्ते में नकली खाद बेचने वालों से सावधान रहने की जरूरत है।

महोब कंठ में अवैध शराब व नकली खाद मामले में पांच गिरफ्तार


आबकारी व कृषि अधिकारी तथा थाना महोबकंठ पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा अवैध लेवल, ढक्कन शील पन्नी, खाली पौवा शीशी व शराब व अवैध खाद से भरी बोरी व खाली बोरी, बोरी सिलाई मशीन बरामद करते हुए 5 आरोपी गिरफ्तार किए हैं।
आरोपी धीरज कुशवाहा पुत्र चन्द्रभान कुशवाहा उम्र 27 वर्ष निवासी ग्राम रावतपुरकला थाना महोबकंठ जिला महोबा, मूलचन्द्र पाल पुत्र बालमुकुंद पाल उम्र 28 वर्ष निवासी ग्राम चौका थाना महोबकंठ जिला महोबा, दयाराम पाल पुत्र तुलई पाल उम्र 40 वर्ष निवासी ग्राम चौका थाना महोबकंठ जिला महोबा, बालमुकुन्द पाल पुत्र तुलई पाल उम्र 50 वर्ष निवासी ग्राम चौका थाना महोबकंठ जिला महोबा को पुलिस हिरासत में लिया गया। निशांत यादव पुत्र विजय सिंह यादव निवासी ग्राम गुढ़ा थाना हरपालपुर जिला छतरपुर के कब्जे से 53 उर्वरक से भरी बोरी भारत एनपीके ग्रेड 15-15-15 कम्पनी आरसीएफ व भारत एनपीके ग्रेड 15-15-15 कम्पनी आरसीएफ की 238 खाली बोरी व अन्नदाता उर्वरक जिंकेटेड सिंगल सुपर फास्फेट लिखा हुआ 187 खाली बोरी एवं एक अदद बोरी सिलाई मशीन बरामद की गई है। इसके साथ ही से 60 अदद लेबिल प्रिन्स ब्रान्ड, 178 ढक्कन, 180 अदद खाली पौवा शीशी प्लास्टिक, 743 अदद ढक्कन शील पन्नी व एक अदद प्लास्टिक की पिपिया में लगभग 4 लीटर नकली शराब बरामद की गई है।

नकली खाद से गिर रहा उत्पादन


किसान खाद का इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने के लिए करते हैं। लेकिन नकली खाद में खाद के पोषक तत्व न होने से फसल का उत्पादन बढऩे के बजाए घट जाता है। कृषि विभाग के मुताबिक असली यानी शुद्ध डीएपी दानेदार सख्त होती है। असली डीएपी खाद का दाना भूरा, काला और बादामी रंग का होता है। असली डीएपी नाखून से खुरचने पर आसानी से नहीं छूटती है। शुद्ध खाद का दाना एक समान आकार का होगा, कोई बहुत छोटा या बहुत बड़ा नहीं होगा। डीएपी के कुछ दाने लेकर तंबाकू की तरह उसमें चूना मिलाकर मसलने से तीखी गंध निकलती है। अगर ऊपर बताए गए तरीके से जांच के बाद खाद में विपरीत बदलाव होता है तो आप मिलावट को पकड़ सकते हैं।

Published on:
13 Nov 2024 10:52 am
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