छतरपुर

भवन तैयार, लेकिन इलाज नदारद: दो साल से बंद पड़े 9 उपस्वास्थ्य केंद्र, मामूली बीमारी में भी महोबा-बांदा जाने को मजबूर ग्रामीण

सीएचओ, एमपीडब्ल्यू और एएनएम जैसे आवश्यक स्वास्थ्य कर्मचारियों की अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर ग्रामीणों की सेहत पर पड़ रहा है।

2 min read
Jan 13, 2026
गौरिहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

जिले के दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने के उद्देश्य से बनाए गए उपस्वास्थ्य केंद्र आज खुद बदहाली का शिकार हैं। गौरिहार ब्लॉक के अंतर्गत स्वीकृत 34 उपस्वास्थ्य केंद्रों में से 9 केंद्र ऐसे हैं, जहां भवन तो बनकर तैयार हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से इन पर ताले लटके हुए हैं। कारण साफ है सीएचओ, एमपीडब्ल्यू और एएनएम जैसे आवश्यक स्वास्थ्य कर्मचारियों की अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर ग्रामीणों की सेहत पर पड़ रहा है।

इन गांवों में पूरी तरह ठप पड़ी स्वास्थ्य सेवाएं

गौरिहार ब्लॉक के रेवना, ठकुरी, पहरा, रामपुर, कदेला, कौथेहा, नांद, बिगपुर और बदौरा गांवों में बने उपस्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह बंद पड़े हैं। इन केंद्रों का निर्माण 4 से 5 वर्ष पहले इस उद्देश्य से किया गया था कि ग्रामीणों को उनके गांव में ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते ये भवन सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं।

इलाज के लिए जिले से बाहर भटक रहे ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि इन उपस्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से सर्दी, खांसी, बुखार, जुकाम, प्राथमिक उपचार, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की जांच और बच्चों के पोषण से जुड़ी सेवाएं मिलनी थीं। केंद्र बंद होने के कारण अब छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी लोगों को पड़ोसी जिले महोबा और बांदा के अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। दूरी अधिक होने से समय और पैसे दोनों की परेशानी उठानी पड़ रही है। कई बार साधन न मिलने के कारण मरीज समय पर इलाज से वंचित रह जाते हैं।

स्वास्थ्य कार्यक्रमों तक सीमित रह गई व्यवस्था

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जब कभी कोई विशेष स्वास्थ्य अभियान या कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, तब आशा कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनी ताले खुलवाकर औपचारिक रूप से कार्यक्रम करा देती हैं। इसके बाद फिर केंद्र बंद हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की अस्थायी व्यवस्था से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के विधायक के मंत्री पद पर होने के बावजूद ग्रामीणों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

सीएचएमओ ने किया समाधान का दावा

इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरपी गुप्ता ने बताया कि गौरिहार ब्लॉक के उपस्वास्थ्य केंद्रों के बंद होने की जानकारी मिली है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही आवश्यक स्वास्थ्य कर्मचारियों की पदस्थापना की जाएगी, जिससे उपस्वास्थ्य केंद्रों का संचालन शुरू हो सके।

Updated on:
13 Jan 2026 10:40 am
Published on:
13 Jan 2026 10:38 am
Also Read
View All

अगली खबर