सरकार ने 330 नियमित और 205 आउटसोर्स पदों की मंजूरी दे दी है। नियमानुसार सबसे पहले डीन की नियुक्ति होनी है, जिसके बाद ही अन्य प्रोफेसरों और कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो पाएगी।
बुंदेलखंड के विकास की धुरी माने जा रहे छतरपुर मेडिकल कॉलेज के भविष्य पर अनिश्चितता के काले बादल मंडराने लगे हैं। करोड़ों की लागत से बन रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की कछुआ चाल ने न केवल प्रशासन की चिंताओं को बढ़ा दिया है, बल्कि इस सत्र में मेडिकल की पढ़ाई शुरू होने की उम्मीदों को भी गहरा झटका दिया है। यदि अगले दो महीनों में निर्माण कार्य पूरा होकर भवन हैंडओवर नहीं होता है, तो शैक्षणिक सत्र 2026-27 शून्य घोषित हो सकता है।
मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य सितंबर 2023 में शुरू किया गया था। शुरुआती योजना के अनुसार इसे सितंबर 2025 तक पूरा होना था। बाद में भवन की क्षमता विस्तार के चलते इसकी समय सीमा बढ़ाकर दिसंबर 2025 कर दी गई। अब अप्रेल 2026 शुरू हो चुका है, लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि मुख्य बिल्डिंग की पुताई, बिजली की फिटिंग, नल-पाइपलाइन और कैंपस की सडक़ों का काम अब भी अधूरा पड़ा है।
मेडिकल कॉलेज में सुचारू कामकाज के लिए सरकार ने 330 नियमित और 205 आउटसोर्स पदों की मंजूरी दे दी है। नियमानुसार सबसे पहले डीन की नियुक्ति होनी है, जिसके बाद ही अन्य प्रोफेसरों और कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। लेकिन पेच यह फंसा है कि जब तक निर्माण एजेंसी भवन को चिकित्सा शिक्षा विभाग को हैंडओवर नहीं करती, तब तक डीन और अन्य पदों पर ज्वॉइनिंग नहीं कराई जा सकती।
मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) नई दिल्ली से मान्यता मिलना अनिवार्य है। एनएमसी की टीम निरीक्षण के दौरान भौतिक ढांचे को प्राथमिकता देती है।
सीटों का संकट- यदि जुलाई माह तक भवन तैयार नहीं होता और मान्यता की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो नीट के माध्यम से इस कॉलेज को सीटें आवंटित नहीं की जाएंगी।
मुख्यमंत्री की घोषणा पर सवाल- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खजुराहो में घोषणा की थी कि इसी सत्र से एडमिशन शुरू होंगे, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती इस वादे को पूरा करने में बाधा बन रही है।
भवन के साथ-साथ कॉलेज के लिए जरूरी फर्नीचर और लैब उपकरणों की खरीदी की प्रक्रिया भी पिछड़ गई है। पीआइयू ने फर्नीचर सप्लाई के लिए टेंडर तो जारी किया है, लेकिन अब तक वह मंजूर नहीं हो पाया है। ऐसे में यदि भवन तैयार हो भी जाता है, तो बिना संसाधनों के कॉलेज का संचालन नामुमकिन होगा।
मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन और सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता के अनुसार निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं और अगले माह तक भवन पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है।