जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए महिलाओं को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाली महिलाओं के लिए यह प्रक्रिया बेहद थकाऊ और समय लेने वाली बन गई है। सुबह-सुबह टोकन लेने से लेकर जांच और रिपोर्ट मिलने तक तीन से चार घंटे का इंतजार आम […]
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए महिलाओं को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाली महिलाओं के लिए यह प्रक्रिया बेहद थकाऊ और समय लेने वाली बन गई है। सुबह-सुबह टोकन लेने से लेकर जांच और रिपोर्ट मिलने तक तीन से चार घंटे का इंतजार आम बात हो गई है। हालात तब और बिगड़ जाते हैं जब रिपोर्ट मिलने के बाद डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते और मरीजों को दोबारा जिला अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
हैरानी की बात यह है कि बड़ामलहरा और नौगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अल्ट्रासाउंड मशीनें उपलब्ध हैं, इसके बावजूद वहां से बड़ी संख्या में महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। इन क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के कारण जिला अस्पताल पर अतिरिक्त भार बढ़ गया है। स्थानीय स्तर पर सुविधा होने के बाद भी मरीजों को जिला अस्पताल भेजने का कारण स्पष्ट नहीं हो पा रहा है, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अल्ट्रासाउंड कराने पहुंची महिलाओं का कहना है कि उन्हें सुबह 8 बजे से टोकन के लिए लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। इसके बाद अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर भी भीड़ रहती है और जांच के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। रामनगर निवासी सविता बाई ने बताया कि अल्ट्रासाउंड कराने में दो दिन लग गए, जबकि यह काम एक ही दिन में हो सकता था।
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है। नौगांव से आई प्रमिला यादव ने बताया कि सुबह 9 बजे लाइन में लगी थीं, लेकिन नंबर दोपहर 12 बजे आया। वहीं सटई की मुन्नी अहिरवार ने कहा कि सुबह 8 बजे आने के बावजूद उनका अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया। रोजाना की इस अव्यवस्था के चलते महिलाओं के बीच विवाद की स्थिति भी बन जाती है। अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर लंबी कतारें लगती हैं और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से महिलाओं को खड़े रहना पड़ता है।
जिला अस्पताल का अल्ट्रासाउंड कक्ष भी अव्यवस्थाओं से घिरा हुआ है। कक्ष संकरा है, बैठने के लिए कुर्सियां बेहद कम हैं और मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है। बड़ामलहरा और नौगांव जैसे स्थानों पर मशीनें होने के बावजूद मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करना प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इन क्षेत्रों से मरीजों को जिला अस्पताल क्यों भेजा जा रहा है, इसकी जांच की जाएगी। अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे। अल्ट्रासाउंड कक्ष की व्यवस्था सुधारने, स्थानीय स्तर पर सुविधाओं का बेहतर उपयोग करने और मरीजों को अनावश्यक रेफरल से बचाने की जरूरत है। जब तक संसाधन नहीं बढ़ाए जाते और व्यवस्था दुरुस्त नहीं होती, तब तक महिलाओं को इसी तरह घंटों इंतजार और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।