आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित इस व्यवस्था के जरिए अब खनिज परिवहन करने वाले वाहनों पर तीसरी आंख की पैनी नजर रहेगी। यानी कि इन ई-गेट से गुजरने पर ही स्पष्ट हो जाएगा कि संबंधित गाड़ी पर रॉयल्टी है या नहीं।
जिले में खनिजों के अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग की कमर तोड़ने के लिए अब अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। जिले के लवकुशनगर क्षेत्र के पुरा और यूपी-एमपी बॉर्डर पर स्थित रामपुर घाट पर प्रदेश के अत्याधुनिक और मानव रहित ई-चेक गेट शुरू कर दिए गए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित इस व्यवस्था के जरिए अब खनिज परिवहन करने वाले वाहनों पर तीसरी आंख की पैनी नजर रहेगी। यानी कि इन ई-गेट से गुजरने पर ही स्पष्ट हो जाएगा कि संबंधित गाड़ी पर रॉयल्टी है या नहीं।
इस नई व्यवस्था के तहत अब खनिज परिवहन करने वाले सभी वाहनों के फ्रंट विंडशील्ड पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। जैसे ही कोई वाहन इन ई-चेक गेट से गुजरेगा, सिस्टम स्वतः ही वाहन की पूरी जानकारी दर्ज कर लेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि मानवीय हस्तक्षेप खत्म होने से पारदर्शिता भी बढ़ेगी। इसकी मॉनिटरिंग सीधे भोपाल स्थित कंट्रोल रूम से की जाएगी और नियम तोड़ने पर गाड़ी मालिक के पते पर स्वतः ही चालान पहुंच जाएगा।
वेरीफोकल कैमरा: यह दूर से ही वाहनों की स्पष्ट तस्वीर लेगा।
ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर: वाहन के गुजरते ही उसकी नंबर प्लेट को स्कैन कर लिया जाएगा।वजन का स्वतः मिलान: सिस्टम वाहन में लदे खनिज की मात्रा और उसके वजन का मिलान ई-ट्रांजिट पास से करेगा।
जिला खनिज अधिकारियों के अनुसार, यदि कोई वाहन बिना वैध ई-ट्रांजिट पास के पाया जाता है या उसमें निर्धारित मात्रा से अधिक खनिज लोड होता है, तो सिस्टम उसे तुरंत पकड़ लेगा। ऐसी स्थिति में वाहन मालिक के खिलाफ तत्काल ऑनलाइन कार्रवाई की जाएगी। छतरपुर जिले के इन दो महत्वपूर्ण केंद्रों (पुरा और रामपुर घाट) पर यह सिस्टम 24 घंटे सक्रिय रहकर अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण लगाएगा।
अमित मिश्रा, डिप्टी डायरेक्टर माइनिंग