छतरपुर

छतरपुर मेडिकल कॉलेज में इसी सत्र से शुरू होगा पहला एमबीबीएस बैच: नवनियुक्त डीन और प्रोफेसर ने संभाली कमान, एनएमसी की हरी झंडी के लिए 535 पदों पर नियुक्तियां और तैयारियां तेज

शासन द्वारा नियुक्त किए गए पहले डीन डॉ. अमरदीप सिंह राय ने कार्यभार संभालते ही कॉलेज संचालन से जुड़ी शेष औपचारिकताओं को समय पर पूरा करने के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ बैठकों और चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है।

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Jun 23, 2026
medical college
छतरपुर मेडिकल कॉलेज

बुंदेलखंड अंचल के छतरपुर जिले के युवाओं का डॉक्टर बनने का सपना अब स्थानीय स्तर पर ही पूरा होने की राह पर है। बहुप्रतीक्षित छतरपुर मेडिकल कॉलेज में इसी शैक्षणिक सत्र से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने की तैयारियां बेहद तेज कर दी गई हैं। हाल ही में शासन द्वारा नियुक्त किए गए पहले डीन डॉ. अमरदीप सिंह राय ने कार्यभार संभालते ही कॉलेज संचालन से जुड़ी शेष औपचारिकताओं को समय पर पूरा करने के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ बैठकों और चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है। इस बड़े कदम से क्षेत्र के युवाओं और चिकित्सा शिक्षा की राह देख रहे छात्रों में भारी उत्साह है।

भवन निर्माण, फैकल्टी और अन्य नियुक्तियों की फाइलें तलब

कॉलेज को पूरी तरह संचालन योग्य बनाने के लिए नवनियुक्त डीन ने भवन निर्माण की प्रगति, फैकल्टी और अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियों से संबंधित फाइलें मंगा ली हैं। इन फाइलों की बारीकी से समीक्षा कर आवश्यक कार्यों में तेजी लाई जाएगी। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 15 जून को जारी किए गए आदेश के बाद कॉलेज को अपनी पहली मुख्य फैकल्टी मिल चुकी है।

डॉ. अमरदीप सिंह राय (डीन)- मेडिकल कॉलेज सागर में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्राध्यापक डॉ. राय को अस्थाई रूप से छतरपुर मेडिकल कॉलेज का डीन नियुक्त किया गया है। विशेष बात यह है कि डॉ. राय की प्रारंभिक शिक्षा छतरपुर जिले के ही महाराजपुर में हुई है, जिससे उनका इस क्षेत्र से गहरा जुड़ाव है।

डॉ. अभिनव शर्मा (प्राध्यापक, ऑर्थोपेडिक)- मेडिकल कॉलेज सतना में पदस्थ ऑर्थोपेडिक के प्राध्यापक डॉ. अभिनव शर्मा को भी छतरपुर मेडिकल कॉलेज में पदस्थ किया गया है। मूलत: ग्वालियर के रहने वाले डॉ. शर्मा के पास नागपुर से एफआईजेआर और जयपुर से एफआईएएसएम में फेलोशिप सहित भरतपुर मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में करीब साढ़े चार साल का शैक्षणिक व व्यावहारिक अनुभव है।

एनएमसी की मंजूरी पर टिकी निगाहें, भोपाल में उच्च अधिकारियों से होगी चर्चा

कॉलेज प्रशासन की पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की सभी शर्तों को समय पर पूरा करना है। आवश्यक संसाधन, फैकल्टी, प्रयोगशालाएं और अस्पताल संबंधी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद ही अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। डीन डॉ. अमरदीप राय ने बताया कि यदि सभी औपचारिकताएं तय समय पर पूरी हो गईं, तो छतरपुर मेडिकल कॉलेज में इसी वर्ष पहला एमबीबीएस बैच प्रवेश ले सकेगा। इस संबंध में वे जल्द ही भोपाल जाकर उच्च अधिकारियों से विस्तृत चर्चा करेंगे, ताकि बची हुई प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों को एक साथ दूर किया जा सके।

535 नियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति का रास्ता साफ

डीन और वरिष्ठ प्रोफेसर की नियुक्ति होने के बाद अब कॉलेज के अन्य विभागों में प्रोफेसरों और स्टाफ की पदस्थापना की राह काफी आसान हो गई है। कॉलेज को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए राज्य सरकार ने पहले ही 330 नियमित और 205 आउटसोर्स पदों (कुल 535 पद) की मंजूरी दे दी है। अब इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

मेडिकल कॉलेज का अस्पताल बन रहा, जिला अस्पताल से होगी शुरूआत

यह महत्वाकांक्षी मेडिकल कॉलेज कुल 250 सीटों की क्षमता वाला होगा। चूंकि वर्तमान में मेडिकल कॉलेज के खुद के मुख्य अस्पताल का निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए शुरुआती दौर में शैक्षणिक सत्र को गति देने के लिए इसे स्थानीय जिला अस्पताल से अटैच किया जाएगा। भविष्य की योजनाओं की बात करें तो यहां 1150 बेड के एक विशाल और सर्वसुविधायुक्त अस्पताल का निर्माण प्रस्तावित है, जो आने वाले समय में पूरे बुंदेलखंड के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा।

जिले और पूरे बुंदेलखंड के छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा

सागर के बाद यह बुंदेलखंड का दूसरा मेडिकल कॉलेज है। स्थानीय स्तर पर एमबीबीएस की पढ़ाई उपलब्ध होने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों का बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई करने का आर्थिक बोझ कम होगा। साथ ही, क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भविष्य में पर्याप्त संख्या में स्थानीय डॉक्टर तैयार हो सकेंगे।

Published on:
23 Jun 2026 11:03 am
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