पांच साल बीतने के बावजूद योजना की स्थिति जस की तस है। वहीं, योजना की तिथि भी बढ़ाई जा चुकी है, फिर भी जिले में कार्य पूर्ण होने की गति काफी धीमी है। पहले यह योजना 2024 में पूरी होने का लक्ष्य था, जिसे अब बढ़ाकर मार्च 2025 तक कर दिया गया है, लेकिन काम की प्रगति अभी भी बेहद कम है।
छतरपुर. जिले में चल रही हर घर नल जल योजना के तहत घर-घर तक पेयजल सप्लाई पहुंचाने का सपना अब तक अधूरा ही है। इस योजना का कार्य जल निगम द्वारा समूह जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से किया जा रहा है, लेकिन योजना की रफ्तार बेहद धीमी है। पांच साल बीतने के बावजूद योजना की स्थिति जस की तस है। वहीं, योजना की तिथि भी बढ़ाई जा चुकी है, फिर भी जिले में कार्य पूर्ण होने की गति काफी धीमी है। पहले यह योजना 2024 में पूरी होने का लक्ष्य था, जिसे अब बढ़ाकर मार्च 2025 तक कर दिया गया है, लेकिन काम की प्रगति अभी भी बेहद कम है।
पेयजल योजना के तहत जिले के विभिन्न गांवों में 1045 गांवों को कवर करने के लिए 1500 करोड़ रुपए की लागत से योजना बनाई गई थी। जल निगम ने बड़ामलहरा और बकस्वाहा में ही इस योजना के तहत काम पूरा किया है। इसके अलावा, राजनगर, नौगांव, छतरपुर, बिजावर, लवकुशनगर और गौरिहार में 40 प्रतिशत से भी कम काम हुआ है। इन क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने के लिए सडक़ों को खोदकर छोड़ दिया गया है, जिनकी मरम्मत का काम अब तक नहीं हुआ है। इससे न केवल आम जनता को परेशानी हो रही है, बल्कि पंचायत कर्मी भी इस लापरवाही के कारण परेशान हैं।
छतरपुर जिले में कुल 250 गांवों में नल जल योजना का कार्य अब तक शुरू ही नहीं हो पाया है। इसके अलावा, 154 टंकियों का निर्माण भी शुरू नहीं हुआ है। जहां कुछ काम हुआ है, वह भी आधा-अधूरा पड़ा हुआ है। उदाहरण के तौर पर, बड़ामलहरा और बकस्वाहा को छोडक़र अन्य किसी भी गांव का काम पूरा नहीं हुआ है।
जिले में योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक में अलग-अलग समूह जल प्रदाय योजनाओं के तहत काम चल रहा है। छतरपुर ब्लॉक में 280 करोड़ रुपए से तरपेड़ समूह जल प्रदाय योजना की शुरुआत की गई है, जिसमें 143 गांव शामिल हैं और 74 टंकियों का निर्माण होना है। वर्तमान में यहां पर केवल 37 टंकियों का काम शुरू हुआ है, जबकि 95 गांवों में पाइपलाइन का काम चल रहा है।
नौगांव ब्लॉक में 196 करोड़ रुपए की लागत से गर्रोली समूह जल प्रदाय योजना द्वारा 118 गांवों को कवर किया गया है। यहां पर 64 टंकियों और 2 एमबीआर (मिनी बैलेंस रिजर्व) का निर्माण होना है, लेकिन यहां भी केवल 32 टंकियों और 48 गांवों में ही काम शुरू हो सका है। इसी तरह, राजनगर ब्लॉक में 254.36 करोड़ रुपए की लागत से समूह जल प्रदाय योजना के तहत 131 गांवों को कवर किया गया है, जिसमें 66 टंकियों और 3 एमबीआर का निर्माण होना है, लेकिन यहां भी केवल 34 टंकियों, 1 एमबीआर और 80 गांवों में ही काम शुरू हुआ है।
लवकुशनगर और चंदला ब्लॉक में 492 करोड़ रुपए से समूह जल प्रदाय योजना से 278 गांवों को कवर किया गया है, जिसमें 101 टंकी और 1 एमबीआर का निर्माण होना है। यहां पर 57 टंकी और 132 गांवों का काम शुरू हुआ है, लेकिन ये भी अधूरा है। हालांकि बिजावर ब्लॉक में स्थिति थोड़ी बेहतर है, जहां तीन योजनाओं के तहत काम चल रहा है। यहां 214 करोड़ रुपए की लागत से 99 गांवों और 33 टंकियों का निर्माण किया जाना है, जिसमें से 71 गांव और 24 टंकियों का काम चल रहा है।
कार्य में ढिलाई का एक मुख्य कारण भूमि चिन्हांकन की समस्या रही है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अब इस समस्या का समाधान कर लिया गया है और जल्द ही बाकी कार्य शुरू कराए जाएंगे। जल निगम के महाप्रबंधक एलएल तिवारी ने बताया कि योजना बहुत बड़ी है और इसे पूरा करने में समय लगेगा। हालांकि, कार्य की उच्च स्तर से मॉनिटरिंग की जा रही है और जो टंकियां अभी शुरू नहीं हो पाई हैं, उनका काम जल्द शुरू किया जाएगा।
हर घर नल जल योजना की महत्वाकांक्षी योजना का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है, जिससे जिले के हजारों ग्रामीणों को पानी की समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। अधिकारियों द्वारा समय-सीमा में काम पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन योजना की स्थिति अभी भी अधूरी है। इस परियोजना की सफलता के लिए जरूरी है कि इसके कार्यों में तेजी लाई जाए और समयबद्ध तरीके से इसे पूरा किया जाए, ताकि जिले के सभी गांवों में स्वच्छ और पर्याप्त जल आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।