संतोष आए दिन उसके साथ मारपीट और झगड़ा करता था, जिससे वह तंग आ चुकी थी। इस रोज-रोज के विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने के इरादे से उसने खौफनाक साजिश रची।
बड़ामलहरा थाना क्षेत्र में बीते दिनों हुई संतोष उपाध्याय की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा किया है। जिस मौत को आत्महत्या बताकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश की गई थी, वह असल में एक सोची-समझी और बर्बर हत्या निकली। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि मृतक की पत्नी ने ही अपने साथियों और नाबालिग बेटी के साथ मिलकर इस खूनी खेल को अंजाम दिया था।
मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि 28 मार्च 2026 को वार्ड क्रमांक 01 निवासी संतोष उपाध्याय का शव उनके घर में फांसी पर लटका मिला था। मृतक की पत्नी रानी उपाध्याय ने ही पुलिस को इसकी सूचना दी थी, जिस पर थाना बड़ामलहरा में मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई। शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या दिखाने की पूरी कोशिश की गई थी, लेकिन कानून की नजरों से अपराधी बच नहीं सके।
पुलिस टीम ने जब शव का सूक्ष्म निरीक्षण किया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विश्लेषण किया, तो संतोष की गर्दन पर सामान्य फांसी के फंदे के अलावा कुछ अन्य संदेहास्पद निशान मिले। ये निशान इशारा कर रहे थे कि फांसी पर लटकने से पहले मृतक का गला किसी और चीज से घोंटा गया था। इसी सुराग ने पुलिस के शक की सुई पत्नी रानी उपाध्याय की ओर घुमा दी।
जब पुलिस ने रानी उपाध्याय से कड़ाई और वैज्ञानिक तरीकों से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। रानी ने बताया कि उसका पति संतोष आए दिन उसके साथ मारपीट और झगड़ा करता था, जिससे वह तंग आ चुकी थी। इस रोज-रोज के विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने के इरादे से उसने खौफनाक साजिश रची।
साजिश के तहत रानी ने अपने सहयोगियों दीपक शुक्ला (20) और विक्की उर्फ विक्रम सिंह (19) तथा अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों ने पहले टीवी की केबल से संतोष का गला घोंट दिया। मौत सुनिश्चित करने के बाद, साक्ष्य छिपाने के लिए उन्होंने शव को साड़ी का फंदा बनाकर लटका दिया। इतना ही नहीं, मामले को पूरी तरह सुसाइड दिखाने के लिए सह-आरोपियों ने घर के अन्य सदस्यों के कमरों को बाहर से ताला लगा दिया। उनका मकसद यह दिखाना था कि संतोष ने परिजनों को कमरों में बंद किया और फिर खुदकुशी कर ली।
पुलिस ने मुख्य आरोपी रानी उपाध्याय (37), दीपक शुक्ला और विक्की परमार को गिरफ्तार कर लिया है। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त टीवी केबल, चादर, तौलिया, शर्ट और ताले की चाबियां बरामद कर ली हैं। वहीं, मामले में शामिल विधि विरुद्ध बालिका (नाबालिग बेटी) को अभिरक्षा में लेकर किशोर न्यायालय छतरपुर में पेश किया गया है।
इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करने में एसडीओपी रोहित सिंह अलावा के निर्देशन और थाना प्रभारी निरीक्षक श्रद्धा शुक्ला के नेतृत्व में पूरी टीम ने महत्वपूर्ण कार्य किया। कार्रवाई में सउनि भान सिंह घोष, कृष्ण कुमार सौर, प्रधान आरक्षक संदीप कुमार, पंकज तिवारी, सरमन लाल, महिला आरक्षक सीता अहिरवार, शोभना राय, रचना रावत, रंजना डुडवे, और आरक्षक सतीश यादव, विनोद कुमार, सोनू यादव सहित अन्य पुलिसकर्मियों का विशेष योगदान रहा।