
रबी उपार्जन
जिले में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत समर्थन मूल्य पर संचालित गेहूं खरीदी का महा-अभियान आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया है। प्रशासन द्वारा जारी अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, जिले के सभी 80 केंद्रों पर कुल मिलाकर 1 लाख 61 हजार 938 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया है। लेकिन, इस पूरी खरीदी प्रक्रिया के समापन के बाद जो मुकम्मल तस्वीर उभरकर सामने आई है, वह किसानों के लिए चिंताजनक और प्रशासनिक दावों पर सवाल उठाने वाली है। एक तरफ जहां हजारों किसान अपनी उपज बेचकर अभी भी आधे से ज्यादा भुगतान के लिए चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खरीदे गए अनाज का शत-प्रतिशत उठाव न होना आगामी मानसून को देखते हुए एक बड़ी लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है।
इस वर्ष सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए जिले के 35,141 किसानों ने पंजीयन कराया था। प्रशासन को उम्मीद थी कि इस बार उपार्जन के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट जाएंगे। लेकिन अंतिम रिपोर्ट आने तक महज 21,860 किसानों से ही वास्तव में खरीदी की जा सकी।
स्लॉट बुकिंग का अंतर- कुल पंजीकृत किसानों में से 24,629 ने ही स्लॉट बुक कराया था, जिनमें से भी करीब 2,769 किसान केंद्रों पर अपनी उपज लेकर नहीं पहुंचे।
खुले बाजार का आकर्षण- विश्लेषण के अनुसार, लगभग 13 हजार से अधिक पंजीकृत किसानों का सरकारी केंद्रों पर न आना यह साफ करता है कि इस बार खुले बाजार (मंडियों) में व्यापारियों द्वारा समर्थन मूल्य से बेहतर या उसके आसपास नगद दाम दिए जा रहे थे। साथ ही सरकारी केंद्रों की कड़े नियमों और तौल की कछुआ चाल से परेशान होकर किसानों ने अपनी फसल कौडिय़ों के दाम बिचौलियों को बेचना मुनासिब समझा।
खरीदी बंद होने के बाद जो सबसे बड़ा संकट किसानों के सामने खड़ा है, वह है उनकी मेहनत की कमाई का भुगतान। आंकड़े बताते हैं कि जिले के अन्नदाताओं को उनकी बेची गई फसल के बदले कुल 425 करोड़ 08 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि का भुगतान किया जाना है।
आधा भुगतान अटका- अब तक किसानों के बैंक खातों में महज 204 करोड़ 63 लाख रुपए ही पहुंच पाए हैं। यानी कुल देय राशि का लगभग 52 प्रतिशत हिस्सा (करीब 220 करोड़ रुपए) अभी भी सरकारी खजाने में ही अटका हुआ है।
कागजी स्वीकृतियां और जमीनी हकीकत- जिला प्रबंधक और नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा 259 करोड़ 53 लाख रुपए जारी करने की बात कही जा रही है, लेकिन बैंक ट्रांसफर की तकनीकी दिक्कतों और सुस्त प्रशासनिक गति के कारण यह पैसा किसानों के खातों तक नहीं पहुंच पा रहा है। समिति स्तर पर भले ही मात्र 75 लाख रुपए का ईपीओ पेंडिंग हो, लेकिन ऊपरी स्तर पर फंड क्लीयरेंस की रफ्तार बेहद धीमी है।
मौसम विभाग लगातार आने वाले दिनों में आंधी- बारिश की चेतावनी दे रहा है। ऐसे में उपार्जित गेहूं को सुरक्षित गोदामों (कैप्स) तक पहुंचाना सबसे अनिवार्य काम था।
खुले आसमान के नीचे गेहूं- जिले में कुल 1,61,938 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया, जिसमें से 1,32,506 मीट्रिक टन का ही परिवहन हो सका है।
17.30 प्रतिशत उठाव बाकी- परिवहन का कुल प्रतिशत 82.70 प्रतिशत रहा है, जिसका सीधा मतलब है कि लगभग 17.30 फ़ीसदी (करीब 29,432 मीट्रिक टन) गेहूं आज भी खरीदी केंद्रों पर खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है। अगर अगले दो-चार दिनों में आंधी-तूफान या बारिश होती है, तो करोड़ों रुपए की यह सरकारी संपदा और किसानों की मेहनत पानी में मिल जाएगी। उपार्जन से स्वीकृत मात्रा का प्रतिशत भी मात्र 72.90 प्रतिशत होना परिवहन ठेकेदारों की लापरवाही की पोल खोलता है।
इस पूरे उपार्जन सीजन में यदि कुछ बेहतर रहा, तो वह था बारदाने (जूट बैग) का प्रबंधन। अमूमन हर साल खरीदी केंद्रों पर बारदाने की किल्लत के कारण काम ठप होने की खबरें आती थीं, लेकिन इस बार योजनाबद्ध तरीके से काम हुआ।जिले को कुल 6,435 गठान बारदाना उपलब्ध कराया गया था, जिसमें से 6,284 गठान समितियों को प्रदाय कर दी गईं और मात्र 151 गठान शेष बचीं।बंडलों के मामले में भी 7,014 में से 7,012 बंडल बांटे जा चुके हैं। इस सटीक मैनेजमेंट के कारण कम से कम बारदाने की कमी का बहाना बनाकर खरीदी को नहीं रोका जा सका।
बी उपार्जन वर्ष 2026-27 का यह सीजन भले ही कागजों पर समाप्त घोषित कर दिया गया हो, लेकिन प्रशासन की असली अग्निपरीक्षा अब शुरू होती है। गेहूं की खरीदी पूरी कर लेना आधी सफलता है, असली सफलता तब है जब अनाज सुरक्षित गोदामों में पहुंच जाए और किसान को उसकी उपज का पूरा दाम मिल जाए।जिले के आला अधिकारियों को तुरंत हरकत में आते हुए दो स्तरों पर युद्धस्तर पर काम करना होगा। पहला, परिवहन ठेकेदारों पर सख्ती कर केंद्रों पर पड़े शेष 17 फ़ीसदी गेहूं का 48 घंटे के भीतर उठाव कराना। दूसरा,बैंकों और नागरिक आपूर्ति निगम से समन्वय बनाकर शेष 220 करोड़ रुपए की बकाया राशि सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर करवाना, ताकि आगामी खरीफ सीजन के लिए किसान खाद-बीज की व्यवस्था समय पर कर सकें।
Updated on:
29 May 2026 10:55 am
Published on:
29 May 2026 10:55 am
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