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माफिया के आगे नतमस्तक हुआ सिस्टम: कॉलोनाइजर को फायदा पहुंचाने के लिए तोड़ दी सरकारी दीवार

शहर में कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर रसूखदारों के इशारे पर नाच रहे नगर पालिका प्रशासन और जल संसाधन विभाग के कुछ अधिकारियों ने मिलकर एक चहेते कॉलोनाइजर के लिए रेड कार्पेट बिछा दिया है।

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Boundary wall broken

बॉउंड्रीवॉल तोड़ी

जिला मुख्यालय में सरकारी अमला, रसूखदार पूंजीपतियों और भू-माफियाओं के आगे किस कदर नतमस्तक हो चुका है, इसकी एक जीती-जागती और शर्मनाक बानगी पन्ना रोड इलाके में देखने को मिल रही है। शहर में कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर रसूखदारों के इशारे पर नाच रहे नगर पालिका प्रशासन और जल संसाधन विभाग के कुछ अधिकारियों ने मिलकर एक चहेते कॉलोनाइजर के लिए रेड कार्पेट बिछा दिया है। पूरा मामला पन्ना रोड स्थित महावीर कॉलोनी क्षेत्र का है, जहां रसूख और पैसे के बल पर सरकारी तंत्र को बंधक बना लिया गया है।

निजी इमारत को मुख्य मार्ग से जोडऩे के लिए ढहा दी सरकारी दीवार

सरेराह नियमों की धज्जियां उड़ाने का यह पूरा खेल महावीर कॉलोनी क्षेत्र में बन रहे शहर के रसूखदार कॉलोनाइजर राजेश गंगेले के एक बड़े भवन से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि इस निर्माणाधीन निजी आलीशान भवन का रास्ता काफी पीछे से है और इसकी मुख्य पन्ना रोड से कोई सीधी कनेक्टिविटी (सीधा रास्ता) नहीं थी। अब इस निजी इमारत की व्यावसायिक कीमत चमकाने और उसे मुख्य सडक़ से सीधे जोडऩे के लिए सरकारी खजाने और सरकारी मशीनरी का खुलकर दुरुपयोग किया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब कॉलोनाइजर को मनमाफिक वीआईपी रास्ता देने के लिए जल संसाधन विभाग की शासकीय बाउंड्रीवॉल को ही जमींदोज कर दिया गया। सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाकर अब वहां से धड़ल्ले से सरकारी सडक़ निकाली जा रही है, लेकिन विडंबना देखिए कि जिम्मेदार महकमा सब कुछ अपनी आंखों के सामने होते देख भी धृतराष्ट्र बना बैठा है।

आम जनता के लिए नो , भू-माफिया के लिए यस

इस पूरे खेल में स्थानीय नेताओं और भू-माफियाओं का एक बड़ा गठजोड़ उजागर हुआ है। क्षेत्र की वार्ड पार्षद गीता दिनेश तिवारी ने इस मामले में सीधे तौर पर नगर पालिका और प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। पार्षद का सीधा आरोप है कि महावीर कॉलोनी के पीछे भाजपा नेता भागीरथ पटेल और अरविंद यादव द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही है। इसी अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनाइजर राजेश गंगेले को करोड़ों रुपए का सीधा फायदा पहुंचाने के लिए यह पूरा ताना-बाना बुना गया है।

वार्ड पार्षद ने कहा कि शहर समेत उनके खुद के वार्ड में ऐसी अनेक जनहित की गलियां और मुख्य रास्ते हैं, जहां आम जनता सालों से कीचड़, धूल और गड्ढों से त्रस्त है। जनता लंबे समय से सडक़ निर्माण की मांग कर रही है, लेकिन जब भी आम जनता की बारी आती है, तो नपा प्रशासन बजट का रोना रोकर पल्ला झाड़ लेता है। वहीं दूसरी ओर, भू-माफियाओं की अवैध प्लॉटिंग और निजी हितों को साधने के लिए रातों-रात सरकारी दीवारें गिराकर वीआईपी सडक़ें स्वीकृत कर दी जाती हैं। यह दोहरा मापदंड साबित करता है कि नपा के नियम केवल गरीबों के लिए हैं, रसूखदारों के लिए तो सरकारी खजाना खुला है।

विवादास्पद जमीन पर विधायक ने किया भूमिपूजन, प्रशासनिक साख तार-तार

मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक तूल तब और ज्यादा पकड़ लिया, जब इस पूरी तरह से अवैध और विवादास्पद सडक़ निर्माण के लिए क्षेत्रीय विधायक ललिता यादव ने बाकायदा मौके पर पहुंचकर भूमिपूजन कर दिया। विधायक के इस कदम के बाद नगर पालिका की प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर बिना किसी एनओसी और सरकारी विभाग की दीवार तोडकऱ बनाई जा रही सडक़ का भूमिपूजन आनन-फानन में क्यों किया गया?प्रभारी ईई ने साधी चुप्पी, केवल एसपी से शिकायत का सहाराइस पूरे महाघोटाले और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में जल संसाधन विभाग पूरी तरह से रक्षात्मक और संदिग्ध भूमिका में है। जल संसाधन विभाग की प्रभारी ईई लता वर्मा का कहना है कि जल संसाधन विभाग की बाउंड्रीवॉल को रात के अंधेरे में अज्ञात लोगों द्वारा गिराए जाने की लिखित शिकायत एसपी से की गई है। विभाग द्वारा खुद की संरचनाओं को क्षति पहुंचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। पार्षद द्वारा विभाग पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। पुलिस को इस मामले की जांच कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

नंदा कानन एनक्लेव की 7 एकड़ जमीन हथियाने की कोशिश हुई थी नाकाम

छतरपुर शहर के पन्ना रोड स्थित नंदा कानन एनक्लेव कॉलोनी की करीब 7 एकड़ जमीन को अप्रेल 2020 में सरकारी घोषित कर मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज कर दिया गया। कॉलोनाइजर राजेश कुमार गंगेले ने फलदार वृक्ष लगाकर 25 साल से कब्जे का दावा करते हुए पट्टे की मांग की थी, लेकिन तहसीलदार और एसडीएम ने आवेदन खारिज कर दिया। बाद में अपर आयुक्त सागर ने सुनवाई में दस्तावेजों के अभाव में दावा निरस्त कर जमीन को सरकारी मानते हुए शासन के नाम दर्ज करने के आदेश दिए। यह जमीन पहले राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी दर्ज थी।

तीखे सवाल- जिनके जवाब देने से बच रहा है छतरपुर प्रशासन

सवाल 1- जब जल संसाधन विभाग की बाउंड्रीवॉल अज्ञात लोगों ने तोड़ी, तो विभाग ने तत्काल मौके पर जाकर काम बंद क्यों नहीं करवाया और नामजद एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई?सवाल 2- नगर पालिका ने एक दूसरे सरकारी विभाग की ढहाई गई जमीन पर बिना किसी अनापत्ति प्रमाण पत्र के रातों-रात सडक़ निर्माण की स्वीकृति कैसे दे दी?

सवाल 3- आम जनता की मूलभूत सडक़ों के लिए बजट का अभाव बताने वाली नगर पालिका, रसूखदार कॉलोनाइजरों और रसूखदार नेताओं की अवैध प्लॉटिंग के सामने आते ही इतनी मेहरबान कैसे हो गई?सवाल 4- क्या छतरपुर का जिला प्रशासन और पुलिस विभाग इस भू-माफिया और राजनीतिक गठजोड़ की जांच कर दोषियों पर बुलडोजर कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाएगा?

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