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विकास की आड़ में विनाश का खेल: निर्माण कार्यों के नाम पर मुरुम और मिट्टी का अंधाधुंध अवैध उत्खनन, लाखों के जुर्माने के बाद भी नहीं थमी माफियाओं की काली करतूतें

जिला प्रशासन और खनिज विभाग का हंटर सिर्फ गरीब ट्रैक्टर-ट्रॉली चालकों पर चलता है, जबकि करोड़ों का चूना लगाने वाले बड़े मगरमच्छों को खुली छूट दे दी गई है। जिले में अवैध उत्खनन के चार बड़े मामले सामने आए हैं, जिसने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।

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सूरजपुरा में वन भूमि में अवैध खनिज

जिले में इन दिनों विकास की एक ऐसी भयानक तस्वीर सामने आ रही है, जिसके पीछे विनाश का एक संगठित और खूनी खेल खेला जा रहा है। जिले में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों, चाहे वह चमचमाती सडक़ें हों, निर्माणाधीन रेलवे लाइनें हों या नेशनल हाईवे, इनकी आड़ में मुरुम और मिट्टी का ऐसा अंधाधुंध अवैध उत्खनन किया जा रहा है, जिसने पर्यावरण के साथ-साथ सरकारी राजस्व की भी धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि बड़ी रसूखदार कंपनियों पर लाखों रुपए का जुर्माना ठोके जाने के बावजूद, जमीनी स्तर पर अवैध उत्खनन की यह काली रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। जिला प्रशासन और खनिज विभाग का हंटर सिर्फ गरीब ट्रैक्टर-ट्रॉली चालकों पर चलता है, जबकि करोड़ों का चूना लगाने वाले बड़े मगरमच्छों को खुली छूट दे दी गई है। जिले में अवैध उत्खनन के चार बड़े मामले सामने आए हैं, जिसने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।

पहला मामला - चंदला में जीआरटीसी कंपनी पर 36.58 लाख का केस, पर थम नहीं रही मनमानी

अवैध उत्खनन का सबसे प्रामाणिक मामला चंदला क्षेत्र से सामने आया है। यहां बछौन-चंद्रपुरा मार्ग के निर्माण में जुटी जबलपुर की रसूखदार जीआरटीसी कंपनी पर बगैर किसी अनुमति और लीज के मुरुम का अंधाधुंध अवैध उत्खनन करने का गंभीर आरोप लगा है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के बाद जब प्रभारी खनिज अधिकारी ज्ञानेश्वर तिवारी ने 20 अप्रेल को चंदला वार्ड-1 के खसरा नंबर-2236/1/1 (रकबा 7.916 हेक्टेयर) पर मौके पर जाकर जांच की, तो एक बड़ा खनिज घोटाला उजागर हुआ।

जांच में साफ पाया गया कि शासन की दर्ज भूमि के एक बड़े हिस्से से कंपनी द्वारा कुल 2439 घन मीटर मुरुम का अवैध उत्खनन कर उसे चुरा लिया गया। माइनिंग टीम ने मौके पर पंचनामा और स्थल निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करते हुए गौर रोड टार कोट प्राइवेट लिमिटेड, जबलपुर के खिलाफ नियम 18(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। माइनिंग टीम ने अवैध उत्खनन पर 36.58 लाख रुपए की क्षति का केस कलेक्टर न्यायालय में पेश किया है। कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए कंपनी पर जुर्माना भी लगाया।

यह पूरा मामला प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री दिलीप अहिरवार के खुद के क्षेत्र का है, जहां विकास के नाम पर खुलेआम पर्यावरण से खिलवाड़ हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी द्वारा अवैध उत्खनन के साथ-साथ सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों की कटाई भी कर दी गई है। गाडिय़ों से उडऩे वाली धूल के कारण किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं।

दूसरा मामला - राजनगर में एएनपीआर कंस्ट्रक्शन ने फारेस्ट लैंड भी निगली

लूट का यह भयावह खेल केवल चंदला तक सीमित नहीं है। राजनगर तहसील के अंतर्गत खजुराहो-सिंगरौली निर्माणाधीन रेलवे लाइन में तो नियमों को पूरी तरह दफन कर दिया गया है। यहां रेलवे लाइन निर्माण का ठेका लेने वाली कंपनी एएनपीआर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड पर प्रशासन की असीम अनुकंपा बरस रही है।

ग्रामीणों का सीधा और खुला आरोप है कि यह कंपनी बीते दो वर्षों से सरकारी जमीनों से लाखों डंपर मुरुम और मिट्टी खोदकर साफ कर चुकी है। विभाग के मौन और परोक्ष समर्थन से कंपनी के हौसले इतने सातवें आसमान पर हैं कि अब फारेस्ट रेंज (वन विभाग की प्रतिबंधित भूमि) की जमीन से भी दिन-रात धड़ल्ले से मिट्टी और मुरुम उठाई जा रही है। टिकरी, सूरजपुरा पहाड़ी और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारियों की मिलीभगत से प्रतिदिन सैकड़ों डंपर बिना किसी रॉयल्टी और अनुमति के पहाड़ों और नदियों का सीना चीर रहे हैं।

तीसरा मामला - हरपालपुर के सरसेड़ में भी रेलवे लाइन की आड़ में मुरुम की महालूट

इसी तरह का एक और मामला हरपालपुर के ग्राम पंचायत सरसेड़ से सामने आया था, जहां रेलवे लाइन निर्माण के लिए मुरुम का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है। इस मामले में भी ठेकेदार और रसूखदार शासकीय जमीनों को खोदकर खोखला कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर नौगांव एसडीएम जीएस पटेल द्वारा अवैध मुरुम उत्खनन और इसके अवैध परिवहन की जांच कराने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन धरातल पर पोकलेन और जेसीबियों का चलना बंद नहीं हुआ है।

चौथा नया मामला - खैरों-कुर्रा मार्ग पर आरपीसी और बीएमसी कंपनी का खूनी खेल, हादसे में ग्रामीण घायल और मवेशियों की मौत

अब अवैध उत्खनन का एक और बेहद सनसनीखेज और खतरनाक मामला छतरपुर तहसील के ग्राम खैरों से सामने आया है। प्रधानमंत्री सडक कानपुर-सागर हाईवे पर खैरों से कुर्रा होते हुए यह मार्ग ईशानगर और टीकमगढ़ की ओर जाता है। इस मार्ग पर आरपीसी और बीएमसी कंपनियां मिट्टी व मुरुम खनन का काम कर रही हैं। इन कंपनियों ने नियमों को ताक पर रखकर सडक़ के ठीक किनारे, वह भी दुर्घटना बहुल अंधा मोड़ पर बडी-बडी और गहरी खदानें खोद दी हैं।सडक़ के बिल्कुल नजदीक किए गए इस अवैध और खतरनाक खनन के कारण इस मार्ग पर लगातार सडक़ दुर्घटनाएं हो रही हैं। हाल ही में हुए एक भीषण हादसे में स्थानीय ग्रामीण लखन आदिवासी और रामदयाल कुशवाहा गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, वहीं सडक़ किनारे चरने वाली दो गायों की खाई में गिरने से मौत हो गई है।हथियारों के दम पर गुंडागर्दी- स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी वे इस जानलेवा अवैध खनन का विरोध करते हैं, तो कंपनी के लोग गाडिय़ों में हथियारों से लैस होकर आते हैं। ग्रामीणों को डराया-धमकाया जाता है और पुलिस में फर्जी केस लगवाकर जेल भिजवाने की खुली धमकी दी जाती है, जिससे पूरा आम जनमानस भयभीत है।

इन खसरों पर डाका-

कंपनियों द्वारा वन भूमि मध्य प्रदेश शासन खसरा नंबर- 796 स्थित ग्राम खैरो, निजी भूमि खसरा नंबर- 450/5 स्थित भूमि पापटा (भूमिस्वामी लच्छी पुत्र अर्जना अहिरवार निवासी खैरो) और खसरा नंबर- 439 स्थित भूमि पापटा की सरकारी गौचर भूमि (चारागाह) पर पूरी तरह अवैध रूप से उत्खनन किया गया है। इस संबंध में खैरों सरपंच सोनू दुबे का साफ कहना है कि इन कंपनियों ने उत्खनन के लिए ग्राम पंचायत से किसी भी प्रकार की कोई अनुमति या एनओसी नहीं ली है।

प्रकृति के लुटेरों को प्रशासन का सलाम

जिले के प्रशासनिक तंत्र के दोहरे चरित्र का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक तरफ जिला पंचायत सीईओ ओम नम: शिवाय अरजरिया ने ग्राम पंचायत सरसेड़ के सरपंच कल्लू प्रजापति की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए, शासकीय योजनाओं में रुचि न लेने वाले पंचायत सचिव ओम नारायण यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह प्रशासनिक अनुशासन के लिहाज से एक जरूरी कदम है। लेकिन ठीक इसके विपरीत, जब बात अरबों रुपए की शासकीय प्राकृतिक संपदा की चोरी करने और जनता की जान जोखिम में डालने वाली बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियों की आती है, तो यही प्रशासनिक अमला पंगु नजर आने लगता है। लाखों का जुर्माना और नोटिस जारी होने के बाद भी इन कंपनियों का काम धड़ल्ले से चलना यह साबित करता है कि माफियाओं के हौसले प्रशासन से भी ऊंचे हैं।

जनता के सुलगते सवाल, जिनका जवाब देना होगा

1. जुर्माने के बाद भी उत्खनन क्यों नहीं रुका? क्या लाखों का जुर्माना लगाना कंपनियों के लिए अवैध उत्खनन को जारी रखने का एक लाइसेंस बन गया है?

2. फॉरेस्ट और गौचर लैंड की सुरक्षा राम भरोसे क्यों? राजनगर और अब खैरों में वन विभाग तथा खनिज विभाग की नाक के नीचे प्रतिबंधित फारेस्ट रेंज और चारागाह से मुरुम कैसे उठाई जा रही है? इसका जिम्मेदार कौन है?

3. हथियारों के दम पर धमकाने वाली कंपनियों पर एफआईआर कब? खैरों मार्ग पर ग्रामीणों को डराने और हादसों में लोगों को घायल करने व मवेशियों को मारने वाली कंपनियों पर पुलिस और प्रशासन कब कड़ा एक्शन लेगा?

4. क्या केवल छोटे वाहनों पर ही चलेगा कानून का डंडा? खनिज विभाग बड़ी कंपनियों के रसूख के आगे घुटने टेककर, केवल गरीब ट्रैक्टर चालकों को पकडकऱ अपनी झूठी वाहवाही कब तक लूटता रहेगा?

इनका कहना है

अवैध उत्खनन, परिवहन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। कंपनियों पर बड़ा जुर्माना लगाया गया है। खैरों सहित अन्य जगहों पर अवैध उत्खनन रोकने के लिए फिर से टीम मौके पर भेजकर जांच कराई जाएगी। इस बार जुर्माना की राशि बढ़ाई जाएगी और मशीनें सील की जाएंगी। अवैध उत्खनन रोकने और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्ती करने के निर्देश टीम को अभी जारी किए जा रहे हैं। पूरी रिपोर्ट मंगाई जा रही है, मैं खुद इसकी मॉनिटरिंग करूंगा।

अमित मिश्रा, डिप्टी डायरेक्टर, खनिज

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