
ई-गेट
जिले में लंबे समय से बेखौफ होकर अवैध उत्खनन और ओवरलोडिंग को अंजाम दे रहे रेत माफिया के काले कारोबार पर अब माइनिंग विभाग की हाईटेक तकनीक का भारी प्रहार हुआ है। खनिज के अवैध परिवहन को रोकने के लिए स्थापित किए गए आधुनिक ई-चेक पॉइंट के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कैमरों ने माफिया के उस शातिर गोरखधंधे को बेनकाब कर दिया है, जिसके तहत वे कार्रवाई और चालान से बचने के लिए बिना नंबर प्लेट के वाहनों का इस्तेमाल कर रहे थे। इस शातिर शार्टकट के पकड़े जाने और भोपाल से हुई इस सीधी डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक के बाद रेत सिंडिकेट में हडक़ंप मच गया है।
दरअसल, माइनिंग विभाग ने रॉयल्टी चोरी और ओवरलोडिंग पर पूरी तरह लगाम कसने के लिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर स्थित रामपुर घाट और लवकुशनगर के पुरा क्षेत्र में पूर्णत: मानव रहित (बिना इंसानी दखल के) हाईटेक ई-चेक गेट स्थापित किए हैं। इन गेटों पर लगे एआई कैमरों की स्क्रीनिंग में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि कार्रवाई से बचने के लिए माफिया जानबूझकर 13 हाइवा और डंपरों को बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के ही सडक़ों पर दौड़ा रहे थे। कैमरों ने इन संदिग्ध बिना नंबर के वाहनों को तुरंत ट्रेस कर लिया, जिसके बाद विभाग ने तत्काल जाल बिछाकर वाहन मालिकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही दो ओवरलोड डंपरो पर भी कार्रवाई की गई है। दो अन्य वाहन रायल्टी चोरी करने के सामने आए हैं, जिनके नंबर न होने से उनके मालिकों का पता लगाकर कार्रवाई की जा रही है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित इस अभेद्य व्यवस्था के जरिए अब खनिज विभाग अवैध परिवहन करने वाले वाहनों पर 'तीसरी आंख' से पैनी नजर रख रहा है। ई-गेट से गुजरने वाले हर एक वाहन की ऑटोमैटिक स्कैनिंग की जा रही है, जिससे यह चंद सेकेंडों में पता चल जाता है कि गाड़ी के पास वैध रॉयल्टी है या नहीं। इतना ही नहीं, यह एआई सिस्टम ओवरलोड वाहनों का वजन ऑटोमैटिक तरीके से नापकर सीधे गाड़ी के मालिक के घर पर ऑनलाइन चालान भेज देगा। इससे अब सडक़ों पर माफिया और मैदानी अमले के बीच होने वाली सांठगांठ पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
इस नई और पारदर्शी व्यवस्था के तहत अब खनिज परिवहन में लगे सभी भारी वाहनों की फ्रंट विंडशील्ड पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) यानी एआई टैग लगाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। जैसे ही कोई खनिज वाहन इस ई-चेक गेट से गुजरेगा, सिस्टम बिना रुके स्वत: ही उस वाहन की पूरी कुंडली और रॉयल्टी का डेटा दर्ज कर लेगा। इससे न केवल समय की भारी बचत होगी, बल्कि स्थानीय विभागीय अफसरों के हस्तक्षेप की गुंजाइश खत्म होने से भ्रष्टाचार पर भी कड़ा अंकुश लगेगा। इस पूरे सिस्टम की लाइव मॉनिटरिंग सीधे भोपाल स्थित मुख्य कंट्रोल रूम से की जा रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर हेरफेर की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
इस पूरी कार्रवाई और नई तकनीक के क्रियान्वयन को लेकर खनिज विभाग छतरपुर के डिप्टी डायरेक्टर अमित मिश्रा का कहना है कि एआई की इस आधुनिक तकनीक से अवैध परिवहन और ओवरलोड वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई करने में विभाग को बड़ी डिजिटल मदद मिलने लगी है। भोपाल के मुख्य कंट्रोल रूम से जैसे ही इनपुट मिलते हैं, तुरंत संबंधित ओवरलोड और संदेहास्पद वाहनों के मालिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जिन माफियाओं ने कार्रवाई से बचने के लिए वाहनों के नंबर छिपाए हैं या बगैर रजिस्ट्रेशन नंबर के गाडयि़ां चला रहे हैं, उन्हें भी जल्द ही पूरी तरह ट्रेस कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
Published on:
28 May 2026 10:49 am
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