
मकान गिराते हुए
अपनी माटी, अपना घर और पुरखों की निशानियों को छोड़ना किसी भी इंसान के लिए सबसे भावुक पल होता है। लेकिन जब बात देश के विकास और बुंदेलखंड की प्यास बुझाने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना की आई, तो छतरपुर जिले के ग्राम पाठापुर के ग्रामीणों ने एक अनूठी मिसाल पेश की। बुधवार को पाठापुर के 10 विस्थापित परिवारों ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि पूरी तरह स्वेच्छा से अपने पुश्तैनी घरों को खाली कर दिया।
कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा अपनाए गए संवेदनशील और दोस्ताना रुख का यह बड़ा असर है कि कल तक जहां विस्थापन को लेकर असमंजस था, वहीं बुधवार को किशनगढ़ स्थित नए और सर्वसुविधायुक्त सरकारी आवासों में इन परिवारों के गृह प्रवेश की खुशियां तैरती नजर आईं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत बनने वाले ढोड़न डैम की जद में आने वाले पाठापुर गांव के इन ग्रामीणों को मुआवजे की संपूर्ण राशि पहले ही प्राप्त हो चुकी थी। जमीन और आशियाना खोने का दर्द अपनी जगह था, लेकिन ग्रामीणों ने विकास की मुख्यधारा में शामिल होना बेहतर समझा।बुधवार सुबह जब शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू हुई, तो माहौल गमगीन होने के बजाय सौहार्दपूर्ण था। ग्रामीणों ने मुस्कुराते हुए अपने पुराने घरों की चौखट को चूमा और नए सफर की ओर कदम बढ़ा दिए।चौपाल
इस ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण विस्थापन के पीछे जिला प्रशासन की महीनों की मेहनत और संवाद नीति रही है। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में एडीएम नमः शिवाय अरजरिया ने खुद पाठापुर गांव का दौरा कर ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाई थी। अफसरों ने जमीन पर बैठकर ग्रामीणों की हर शंका, डर और समस्या को सुना और उसका सकारात्मक समाधान निकाला। इसी संवेदनशीलता का असर भी दिखा। शिफ्टिंग के दौरान जिला प्रशासन की टीम ने खुद आगे बढ़कर मोर्चा संभाला। प्रशासनिक वाहनों के जरिए ग्रामीणों के पलंग, सोफे, अनाज और तमाम घरेलू सामान को पूरी सुरक्षा के साथ लोड कराया गया। सरकारी अमले ने खुद मुस्तैद रहकर सारा सामान किशनगढ़ स्थित नए और बेहतर आवासों तक पहुंचवाया।
जैसे ही इन 10 जागरूक परिवारों ने अपने-अपने मकानों को पूरी तरह खाली कर दिया, सुरक्षा और परियोजना की गाइडलाइन के अनुसार प्रशासनिक निगरानी में खाली पड़े पुराने मकानों को जमींदोज (ध्वस्त) कर दिया गया। इस कार्रवाई का उद्देश्य डैम निर्माण साइट को पूरी तरह क्लीयर करना है। इस शांतिपूर्ण सहयोग के बाद अब ढोड़न डैम का निर्माण कार्य बिना किसी गतिरोध या अवरोध के चौबीसों घंटे निरंतर जारी है।
इन 10 जागरूक परिवारों ने पेश की मिसालदेश के सबसे बड़े नदी जोड़ो प्रोजेक्ट में अपना सकारात्मक योगदान देकर विस्थापित होने वाले पाठापुर के इन परिवारों की हर तरफ सराहना हो रही है। नए आशियाने में कदम रखने वाले मुखियाओं में शामिल हैं।
-कोमल पिता रमसू गौड़-दयाल पिता किशोरी गौड़
-ब्यादीन पिता भगिया गौड़-हरिया पिता बुद्धा गौड़
-शिब्बा पिता बुद्धा गौड़-हक्का पिता बुद्धा गौड़
-मल्ला पिता अच्छेलाल गौड़-भग्गू पिता प्यारे गौड़
-संतोष पिता रामकुंवर गौड़-अंता पिता हरिया गौड़
विस्थापन से लेकर गृह प्रवेश की इस पूरी भावुक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दौरान कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सहयोग के लिए आला अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। इसमें मुख्य रूप से एडीएम नमः शिवाय अरजरिया, एसडीएम विजय द्विवेदी, जनपद सदस्य भगवानदास गौंड सहित क्षेत्रीय एसडीओपी, थाना प्रभारी (टीआई) और वन विभाग के रेंजर सहित अन्य विभागों का स्टाफ शामिल रहा। अधिकारियों ने नए घरों में दीप जलाकर और मिठाई बांटकर ग्रामीणों का स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
Updated on:
29 May 2026, 10:47 AM IST
Published on:
29 May 2026, 10:46 AM IST
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