छतरपुर

कई खर्च पर मिलती है आयकर में छूट

मेडिकल, एजूकेशन लोन, होम लोन के ब्याज, मकान किराया, दान पर भी मिलती है आयकर छूटइनकम टैक्स रिटर्न भरने की तारीख बढऩे के बाद 31 अगस्त तक है मौका

4 min read
Jul 30, 2019
income tax rebate

छतरपुर। सरकार द्वारा निर्धारित माध्यमों में निवेश कर करने पर टैक्स बचाया जा सकता है। ये डिडक्शन इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के अलग-अलग सेक्शन के हिसाब से होते हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय सेक्शन 80 सी है, जिसके तहत बच्चों की पढ़ाई पर होने वाले खर्च पर इनकम टैक्स में छूट मिलती है। लेकिन इसके अलावा भी कई सेक्शन हैं, जिनके तहत खर्च या निवेश पर टैक्स छूट हासिल की सकती है। आमतौर पर अधिकतर करदाताओं को आयकर अधिनियम की धारा 80 सी की ही जानकारी होती है। जबकि इसके अलावा भी कई सेक्शन हैं, जिनमें मेडिकल पॉलिसी, एजूकेशन लोन, होम लोन के ब्याज, मकान किराया, दान आदि पर भी आयकर छूट मिलती है।
सेक्शन 80 डी- मेडिकल इंश्योरेंस का प्रीमियम चुकाना
स्वयं और परिजनों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए लोग मेडिकल या हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेते हैं। मेडिकल इंश्योरेंस के प्रीमियम के रूप में खर्च की गई रकम पर आयकर कानून 1961 के सेक्शन 80 डी के तहत कर छूट मिलती है। मेडिकल पॉलिसी स्वयं के नाम पर या पति-पत्नी, पैरेंट्स और बच्चों के नाम ले सकते हैं। इस सेक्शन के तहत कर छूट पाने के लिए आपको पहले का भुगतान प्रीमियम चेक या डिजिटल मोड में करने की जरूरत है। इस सेक्शन के तहत आप या हिन्दू अविभाजित परिवार 60000 रुपए तक छूट पा सकते हैं।
सेक्शन 80 डीडी- दिव्यांग व्यक्ति के स्वास्थ्य पर खर्च
टैक्स चुकाने वाले व्यक्ति ने अगर किसी दिव्यांग के स्वास्थ्य पर खर्च किया है तो यह डिडक्शन उसे मिल सकता है। टैक्स चुकाने वाले व्यक्ति पर आश्रित पति-पत्नी, बच्चे, भाई-बहन हो सकते हैं. अगर हिन्दू अविभाजित परिवार है, तो दिव्यांग कोई भी हो सकता है। इस सेक्शन के तहत साल भर में अधिकतम 75000 रुपए छूट का दावा किया जा सकता है। यह क्लेम हासिल करने के लिए आपको मेडिकल अथॉरिटी (न्यूरोलोजिस्ट या सिविल सर्जन) द्वारा जारी सर्टिफिकेट के साथ फॉर्म 10-ए जमा करने की जरूरत है।
सेक्शन 80डीडीबी- किसी खास बीमारी पर किया गया खर्च
इस सेक्शन के तहत कर चुकाने वाले व्यक्ति द्वारा किसी खास बीमारी के इलाज पर किया गया खर्च छूट के दायरे में आता है। यह खर्च खुद, पति-पत्नी, आश्रित पैरेंट्स या भाई-बहन पर होने पर ही छूट मिलती है। एचयूएफ के मामले में यह डिडक्शन किसी भी व्यक्ति के इलाज पर किये गए खर्च पर पाया जा सकता है। यह डिडक्शन इलाज के वास्तविक खर्च या अधिकतम 40000 रुपए तक प्राप्त किया जा सकता है। सीनियर सिटीजन के मामले में छूट की सीमा 60000 रुपए तक के खर्च पर लागू है।
सेक्शन 80 इ - एजुकेशन लोन पर चुकाया गया ब्याज
अगर स्वयं, पति-पत्नी,बच्चे या लीगल गार्जियन के रूप में किसी छात्र के लिए एजुकेशन लोन लिया है, तो उसके ब्याज के रूप में चुकाई गई रकम पर छूट मिलती है। किसी एक वित्त वर्ष में चुकाए गए ब्याज पर कर छूट पाने की कोई सीमा नहीं है। यह छूट पाने के लिए जरुरी है कि उच्च शिक्षा के लिए ऋण लिया गया हो। यह पढ़ाई 12 वीं क्लास के बाद के किसी कोर्स के लिए हो सकती है।
सेक्शन 80 इइ- होम लोन के ब्याज भुगतान पर छूट
यह छूट किसी व्यक्ति के लिए रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदने के लिए लिए गए होम लोन पर चुकाई जाने वाली ब्याज पर मिलती है। इस सेक्शन के तहत सालना अधिकतम 50000 रुपए तक की छूट मिल सकती है। हालांकि, इस डिडक्शन को हासिल करने के लिए कई शर्तें भी हैं, जैसे लोन वित्त वर्ष में ही लिया गया हो,लोन की रकम 35 लाख रुपए से कम हो, इसके साथ ही मकान की कीमत 50 लाख रुपए से कम होना जरुरी है।
सेक्शन 80 जी- फंड या मंदिर को दिया गया चंदा
केंद्र सरकार द्वारा नोटिफायड किसी फंड को चंदा देते हैं तो इस सेक्शन के तहत आयकर छूट हासिल कर सकते हैं। इसमें एक सीमा यह है कि कुल आमदनी के 10 फीसदी से अधिक चंदा नहीं दे सकते। इसके तहत मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च या केंद्र द्वारा अप्रूव्ड किसी संस्था के रिनोवेशन के लिए चंदा दे सकते हैं। इसके साथ ही नेशनल डिफेंस फंड, जवाहर लाल नेहरु मेमोरियल फंड, प्राइम मिनिस्टर सूखा राहत फंड, नेशनल चिल्ड्रेन फंड, प्रधान मंत्री राहत कोष,स्वच्छ भारत कोष, साफ़ गंगा फंड आदि में दिए गए डोनेशन को भी छूट मिलती है।
सेक्शन 80 जीजी - रहने के लिए चुकाया गया किराया
आयकर दाता को अपने नियोक्ता से वेतन के एक पार्ट के रूप में एचआरए मिलता है, या आयकर दाता सैलरीड एम्प्लॉई नहीं हैं, तभी इस सेक्शन के तहत छूट मिलती है। यह छूट टैक्स चुकाने वाला व्यक्ति किसी वित्त वर्ष में चुकाए गए किराए की रकम पर हासिल कर सकता है। इसके लिए फॉर्म 10बीए जमा करना पड़ता है और किराया 5000 रुपए हर महीने तक ही छूट मिलती है।
सेक्शन 80 जीजीए- किसी संस्थान को दिया गया दान
सरकार द्वारा मंजूर किसी वैज्ञानिक अनुसन्धान करने वाली संस्था, यूनिवर्सिटी या कॉलेज को दान दिया है तो इस रकम पर कर छूट हासिल की जा सकती है। 10000 रुपए से अधिक के चंदे पर छूट तभी हासिल की जा कती है, जब दान नकदी के अलावा किसी माध्यम से दिया गया हो।
सेक्शन 80 टीटीए - बचत खाते पर ब्याज
बैंक के बचत खाते में मिले ब्याज पर भी टैक्स छूट हासिल कर सकते हैं। इस सेक्शन के तहत कर छूट की अधिकतम सीमा 10000 रुपए है। इसके लिए आयकर रिटर्न में इसे अन्य स्रोतों से आमदनी के रूप में दिखाना पड़ेगा और सेक्शन 80 टीटीए के तहत कर छूट का दावा करना पड़ेगा।
आयकर में छूट के है प्रावधान
इनकम टैक्स एक्ट 1961 के अलग-अलग सेक्शन के हिसाब से डिडेक्शन होते हैं। आयकर दाता को कई खर्च और उनके ब्याज पर एक निश्चित मात्रा में आयकर से छूट मिलती है। इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय इन सेक्शन के तहत छूट प्राप्त की जा सकती है।
दिनेश कुमार बिंदवार, आयकर अधिकारी, छतरपुर
दो बच्चों तक की ट्यूशन फीस, घर खरीदते समय लगी स्टांप ड्यूटी, मेडिकल पॉलिसी, एजूकेशन लोन, होम लोन के ब्याज, मकान किराया, दान समेत कई खर्च पर आयकर के विभिन्न सेक्शनों के तहत टैक्स रिबेट मिलती है। आयकर रिटर्न भरते समय इन छूट का लाभ लिया जा सकता है।
चंद्रशेखर शर्मा, चार्टर्ड एकाउंटेंट

Published on:
30 Jul 2019 06:00 am
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