
महिलाओं का समूह
जब इरादे नेक हों और हाथों में हुनर, तो समाज में बदलाव लाना मुश्किल नहीं होता। छतरपुर शहर की कुछ प्रेरणादायी महिलाओं ने इसे सच कर दिखाया है। संगम सेवालय संस्था से जुड़ी ये महिलाएं न केवल घर के पुराने और बेकार कपड़ों को नया जीवन दे रही हैं, बल्कि पर्यावरण के सबसे बड़े दुश्मन प्लास्टिक के खिलाफ एक मौन क्रांति का नेतृत्व भी कर रही हैं।
शहर को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए इन महिलाओं ने कपड़े के थैले बनाना शुरू किया है। संस्था की संचालिका अंजू अवस्थी के नेतृत्व में वर्तमान में 17 महिलाएं इस अभियान का हिस्सा हैं। ये महिलाएं स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर स्टॉल लगाकर लोगों को जागरूक करती हैं कि कैसे एक छोटा सा कपड़े का थैला हजारों प्लास्टिक की थैलियों का विकल्प बन सकता है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संस्था ने 10 सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई हैं। चौबे कॉलोनी स्थित एक निजी स्कूल में इन्हें बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद ये महिलाएं अपने घर के कामकाज के साथ-साथ प्रतिदिन 10 से 12 थैले तैयार कर रही हैं। इससे न केवल शहर को थैले मिल रहे हैं, बल्कि इन महिलाओं को अपने परिवार की आर्थिक मदद करने का एक मजबूत जरिया भी मिला है।
इन महिलाओं का हुनर सिर्फ थैलों तक सीमित नहीं है। ये महिलाएं भगवान की सुंदर पोशाकें भी तैयार कर रही हैं, जिनकी मांग स्थानीय मंदिरों और भक्तों के बीच काफी अधिक है। सिलाई के इस काम से होने वाली आय का एक हिस्सा समाज सेवा के कार्यों में भी खर्च किया जाता है। त्योहारों के समय जरूरतमंद बच्चों को कपड़े और उपहार बांटकर ये महिलाएं खुशियां बिखेर रही हैं।
संस्था का कार्य केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। ये महिलाएं शहर के संपन्न घरों से अनुपयोगी और पुराने कपड़े एकत्र करती हैं। इन कपड़ों की छंटनी कर इन्हें बिजावर क्षेत्र के दूरदराज के आदिवासी परिवारों तक पहुंचाया जाता है, ताकि कडकड़़ाती ठंड या गर्मी व बारिश के मौसम में वे कपड़े किसी जरूरतमंद के काम आ सकें।
Published on:
27 Apr 2026 10:46 am
बड़ी खबरें
View Allछतरपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
