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आसमान से बरस रही आग, पहली बार पारा 43.9 डिग्री, छतरपुर जिले में हीट वेव का अलर्ट, जिला अस्पताल पहुंचे लू की चपेट में आए 10 लोग

गर्मी की इसी तीव्रता का असर है कि जिला अस्पताल के ओपीडी में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ गई है और अब तक लू की चपेट में आए 10 गंभीर मामलों को डॉक्टरी निगरानी में उपचार देना पड़ा है।

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आसमान से बरस रही आग

बुंदेलखंड में सूर्यदेव के तीखे तेवरों ने अब आम जनजीवन को झुलसाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को खजुराहो में इस सीजन का सबसे उच्चतम तापमान 43.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने गर्मी के पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जिले के नौगांव में भी पारा 43.5 डिग्री तक जा पहुंचा है। आसमान से बरस रही इस आग और भीषण लू (हीट वेव) के चलते अब लोगों की सेहत बिगड़ने लगी है। गर्मी की इसी तीव्रता का असर है कि जिला अस्पताल के ओपीडी में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ गई है और अब तक लू की चपेट में आए 10 गंभीर मामलों को डॉक्टरी निगरानी में उपचार देना पड़ा है।

हीट वेव के बीच बढ़ी चिकित्सीय चुनौतियांजैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। डॉ. रोहित चतुर्वेदी के अनुसार, तेज बुखार, सिरदर्द और शरीर में पानी की अत्यधिक कमी होना इस मौसम की सबसे बड़ी समस्या बनकर उभर रही है।

सेहत वाली सलाह

भीषण गर्मी को देखते हुए डॉ. रोहित चतुर्वेदी ने नागरिकों को सावधानी से इस मौसम का सामना करने की सलाह दी है।धूप से दूरी ही बचाव: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच सूरज की किरणें सबसे ज्यादा मारक होती हैं। कोशिश करें कि इस दौरान घर से बाहर न निकलें।पानी को बनाएं ढाल: प्यास न भी लगे, तो भी नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। शरीर में तरलता बनाए रखने के लिए ओआरएस, नींबू पानी और मट्ठे का उपयोग करें।पोशाक का चयन: बाहर निकलते समय हल्के रंग के और सूती कपड़ों का ही चुनाव करें ताकि शरीर को हवा मिलती रहे। सिर और कान को कपड़े या टोपी से ढंकना न भूलें।

खेती और पशुओं पर भी संकट के बादल

भीषण गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि मूक पशुओं और गर्मियों की खड़ी फसलों पर भी पड़ रहा है। जारी की गई एडवाइजरी के अनुसार, किसान भाई अपनी फसलों में नमी बनाए रखने के लिए केवल सुबह या शाम के वक्त ही सिंचाई करें। वहीं पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने मवेशियों को दोपहर के समय चराने न ले जाएं और उन्हें दिन में कम से कम तीन से चार बार साफ पानी उपलब्ध कराएं।

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