छतरपुर

सागर में 70 फीसदी काम पूरा, छतरपुर में अब भी इंतजार: एनएचएआई की लचर व्यवस्था के कारण 2653 करोड़ की कबरई-सागर हाइवे परियोजना का निर्माण कार्य अधर में, प्रोजेक्ट मैनेजर की कुर्सी एक माह से खाली

हाइवे का सपना छतरपुर जिले के निवासियों के लिए एक लंबी प्रतीक्षा बन गया है। एनएचएआई की लचर व्यवस्था और प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर लंबे समय से चल रही रिक्तता ने इस महत्वपूर्ण परियोजना की गति पर विराम लगा दिया है।
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Jul 02, 2026
forlane
कबरई-सागर हाइवे परियोजना

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शुमार कबराई-सागर नेशनल हाइवे का फोरलेन निर्माण कार्य इन दिनों प्रशासनिक बदहाली और भारी लेटलतीफी की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। करोड़ों की लागत से तैयार हो रहे इस हाइवे का सपना छतरपुर जिले के निवासियों के लिए एक लंबी प्रतीक्षा बन गया है। एनएचएआई की लचर व्यवस्था और प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर लंबे समय से चल रही रिक्तता ने इस महत्वपूर्ण परियोजना की गति पर विराम लगा दिया है।

एनएचएआई कार्यालय में अस्थिरता का दो साल पुराना दौर

एनएचएआई के छतरपुर कार्यालय में पिछले दो वर्षों से किसी भी अधिकारी का टिक पाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो कार्यालय में मची उठापटक ने निर्माण कार्यों की देखरेख को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है। भ्रष्टाचार का ग्रहण इस परियोजना पर तब लगा जब प्रोजेक्ट मैनेजर पीके चौधरी को दस लाख रुपए की रिश्वतखोरी के मामले में सीबीआई ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इसके बाद दीपक चापेकर को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन वे भी मुश्किल से एक साल ही सेवाएं दे पाए और एक माह पूर्व उनका तबादला रतलाम कर दिया गया। तब से आज तक यह महत्वपूर्ण कुर्सी खाली पड़ी है, जिसका खामियाजा पूरे जिले की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

सागर बनाम छतरपुर- विकास का अंतर और धीमी रफ्तार

223.7 किलोमीटर लंबी यह परियोजना कबराई से शुरू होकर बंड़ा, दलपतपुर, शाहगढ़, हीरापुर, बड़ा मलहरा, गुलगंज, छतरपुर, गढ़ी मलहरा, उजरा और महोबा होते हुए कबरई तक जाती है। 2653 करोड़ रुपए की इस भारी-भरकम लागत वाली परियोजना की जमीनी हकीकत सागर और छतरपुर के बीच विकास की एक बड़ी खाई दिखाती है। सागर जिले की बात करें तो वहां 70 फीसदी से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और कर्रापुर के समीप टोल नाका भी चालू हो गया है, जो इस क्षेत्र में आवागमन को सुगम बना रहा है। इसके विपरीत, छतरपुर जिले में हाइवे का सबसे बड़ा हिस्सा होने के बावजूद काम की रफ्तार बेहद धीमी है। परियोजना के पांच फेजों में से फेज-3 और फेज-4 का निर्माण कार्य कछुआ चाल से चल रहा है, जिससे स्थानीय लोग बेहद परेशान हैं।

2026 की टाइमलाइन थी, एक साल पिछड़ गया काम

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोडऩे वाले इस 223.7 किलोमीटर लंबे फोरलेन हाइवे के लिए अप्रेल 2023 में डीपीआर मंजूर की गई थी। भूतल परिवहन विभाग ने इस फोरलेन के निर्माण को पूरा करने के लिए साल 2026 की टाइमलाइन तय की थी। लेकिन एनएचएआई की विभागीय लेत-लतीफी और प्रक्रियाओं को समय पर पूरा न कर पाने के कारण यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अपने तय समय से एक साल पिछड़ गया है। वर्तमान में छतरपुर जिले के अंतर्गत आने वाले फेज-3 और फेज-4 में निर्माण कार्य जारी है, जिसे अगले वर्ष (2027) तक पूरा करने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन अब फिर से काम ठप हो गया है।

व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ीं, पर सडक़ का अता-पता नहीं

हाईवे निर्माण की चर्चा मात्र से ही इसके किनारे व्यावसायिक गतिविधियों में उछाल आया है। होटल, रेस्टोरेंट और नई दुकानों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है और जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं। हालांकि, इन सब के बीच मुख्य बुनियादी ढांचा यानी सडक़ का निर्माण कहीं पीछे छूट गया है। भूतल परिवहन विभाग ने 2026 तक इस फोरलेन निर्माण को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन एनएचएआई की लचर कार्यप्रणाली और प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह परियोजना कम से कम एक साल पिछड़ गई है।यदि यही हाल रहा, तो जिले का व्यापारिक और आर्थिक विकास बाधित होगा और जनता को इस हाइवे की सुविधा के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा। सवाल यह उठता है कि क्या एनएचएआई प्रबंधन इस ओर ध्यान देगा और जल्द ही किसी स्थाई प्रोजेक्ट मैनेजर की नियुक्ति कर निर्माण कार्य में तेजी लाएगा?

Published on:
02 Jul 2026 10:54 am