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जानलेवा लापरवाही, छतरपुर में 25 में से 15 एम्बुलेंस कंडम, जो चल रही उनमें सीट टूटीे और उपकरण भी नदारद

जिला अस्पताल से रोजाना 10 से 11 मरीज ग्वालियर-झांसी रेफर किए जाते हैं। ऐसे में जिले में वर्तमान में चालू हालत में मौजूद 10 एम्बुलेंस या तो ग्वालियर भेजी जाती है, या जिले के अन्य इलाके में आपातकाल कॉल पर भेजी जाती है।
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108 ambulance

108 एम्बुलेंस सेवा का सच

जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा अब खुद ही गंभीर रूप से बीमार हो चुकी है। छतरपुर में आपातकालीन सेवाओं का संचालन करने वाली जय अम्बे इमरजेंसी सर्विसेज की लापरवाही के कारण जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। आलम यह है कि जिले की कुल 25 एम्बुलेंस में से 15 एम्बुलेंस पिछले लंबे समय से खराब (ऑफ रोड) पड़ी हैं, और जो गाडिय़ां किसी तरह चल रही हैं, वे भी इतनी जर्जर हालत में हैं कि मरीजों को समय से अस्पताल पहुंचाने के बजाय मौत के मुंह में धकेल रही हैं।

रोजाना 10 से 11 मरीज ग्वालियर-झांसी होते हैं रेफर

जिला अस्पताल से रोजाना 10 से 11 मरीज ग्वालियर-झांसी रेफर किए जाते हैं। ऐसे में जिले में वर्तमान में चालू हालत में मौजूद 10 एम्बुलेंस या तो ग्वालियर भेजी जाती है, या जिले के अन्य इलाके में आपातकाल कॉल पर भेजी जाती है। यदि एम्बुलेंस ग्वालियर भेजी जाती है तो बकस्वाहा, लवकुशनगर, राजनगर, हरपालपुर, नौगांव, गौरिहार में एम्बुलेंस सेवा नहीं मिल पाती। यदि जिले में एम्बुलेंस भेजी जाती है तो ग्वालियर के मरीज अटक जाते है और मजबूरन मरीजों के परिजन निजी एम्बुलेंस के सहारे हैं। जिससे न केवल जेब पर खर्च भारी पड़ रहा। बल्कि सरकारी एम्बुलेंस के इंतजार में कई बार मरीज की जान चली जा रही है।

ये खराब एंबुलेंस वर्कशॉप में खड़ी

पूर्ण निर्मल वर्कशॉप छतरपुर- सीजी 04 एनयू 5350, सीजी 04 एनएस 8053, सीजी 04 एनएस 4580, एमपी 02 एबी 7225, सीजी 04 एनडी 4597 और सीजी 04 एनडी 2980 लंबे समय से खड़ी हैं।नेहा ऑटोमोबाइल वर्कशॉप खजुराहो- सीजी 04 एनवी 6574, एमपी 02 एबी 7230 और सीजी 04 एनयू 5290 खड़ी हैं।

टीकमगढ़ वर्कशॉप- एम्बुलेंस क्रमांक 4538 से 4548 तक के वाहन मरम्मत के इंतजार में खड़े हैं।दमोह वर्कशॉप व अन्य- सीजी 04 एनयू 3972, सीजी 04 एनआर 5925, सीजी 04 एनबी 6404 और सीजी 04 एनयू 4335 जैसी गाडिय़ां या तो दमोह वर्कशॉप में हैं या रास्तों में खराब खड़ी हैं।

सीएमएचओ ने दिया था चेतावनी वाला पत्र

हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) छतरपुर ने 09 जून 2026 को मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया था। पत्र में स्पष्ट था कि 15 एम्बुलेंस के बंद होने से आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह चौपट हो चुकी हैं। इसके बाद 18 जून 2026 को सीएमएचओ ने पुन: पत्र भेजकर परियोजना प्रमुख की उदासीनता पर कड़े सवाल उठाए और जिले की रेफरल सेवाओं के सुचारू रूप से संचालित न हो पाने पर चिंता जताई।

जांच में ये हुए बड़े खुलासे

सीएमएचओ द्वारा सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों को 12 और 24 जून 2026 को पत्र लिखकर तलब की गई जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

उपकरणों का अभाव- एम्बुलेंसों में जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं और उपकरण काम नहीं कर रहे हैं।

जर्जर हालत- भीषण गर्मी में भी अधिकांश एम्बुलेंसों में पंखे तक खराब हैं, और एयर कंडीशनिंग की सुविधा तो दूर की बात है। स्ट्रेचर, अटेंडर सीटें और दरवाजे टूटे हुए हैं।निजी वाहनों की मजबूरी- एम्बुलेंस न मिलने के कारण गंभीर मरीजों के परिजन निजी वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हैं।

कर्मचारियों की मनमानी- महाराजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी ने 18 मई 2026 को शिकायत की थी कि 108 कर्मचारी मरीजों को बिना सहायता के अस्पताल के बाहर छोड़ रहे हैं।

जनता की जान से खिलवाड़ और कमीशनखोरी

सूत्रों का आरोप है कि वाहनों के रख-रखाव के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार हो रहा है। गाडिय़ोंं की मरम्मत अधिकृत वर्कशॉप के बजाय अकुशल दुकानों से कराई जा रही है। दो मामलों ने इस बदहाली को उजागर किया, मातुगुंवा क्षेत्र में एम्बुलेंस न मिलने पर रविंद्र सिंह की जान चली गई, और किशनगढ़ क्षेत्र में भी परिजनों को निजी वाहन का सहारा लेना पड़ा। हाल ही में बकस्वाहा में एम्बुलेंस न मिलने से एक वकील और एक गर्भवती महिला को जान गंवाना पड़ी। जिला प्रभारी ने अब इन खराब एम्बुलेंस के कारणों पर रिपोर्ट मांगी है और सुधार का आश्वासन दिया है। सवाल यह है कि प्रशासन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अब भी कब तक मूकदर्शक बने रहेंगे, जबकि जिले की जनता इन जर्जर गाडि़यों के भरोसे अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर है?

रिमांइडर भेजा जा रहा

एंम्बुलेंस 108 की अव्यवस्था को लेकर शासन को पत्र लिखा गया है। बीएमओ से मिली रिपोर्ट में वाहनों में भारी कमियां पाई गई हैं। कार्रवाई के लिए शासन को रिमांइडर भेजा जा रहा है।

डॉ. आरपी गुप्ता, सीएमएचओ

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