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अविकसित कॉलोनी में फंसी दर्जनों लोगों की जमापूंजी, फाइलों में दम घोंट रहीं शिकायतें, अवैध कॉलोनी के प्रकरण अधिक, काॅलोनाइजर पर नहीं कसी जा रही नकेल

अवैध कॉलोनी को लेकर शिकयतों की संख्या बीते एक साल में 890 हो गई हैं, इसमें से लगभग 656 शिकायतों पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
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अविकसित कॉलोनी

लोगों को त्वरित शिकायतों के निराकरण व समाधान देने के मकसद से शुरु हुई लोक सेवा गांरटी खुद कछुआ की चाल से चल रही है। यहां पर लोगों की शिकायतों और कॉलोनाइजर एनओसी के लिए 45 दिन के भीतर काम कराने का नियम है, लेकिन यहां चार-चार महीने से अधिक समय होने के बाद भी लोगों की शिकायतों का समाधान नहीं हो पाया है। लोगों के आवेदन फाइलों में ही दम तोड़ रहे हैं। सबसे अधिक प्रकरण अवैध कॉलोनी के हैं जहां कॉलोनाइजर ने लोगों की जमापूंजी से प्लॉट बेचे, लेकिन वे पूरी तरह से विकसित ही नहीं हो पाए जिससे न रहने योग्य हैं और न ही कारोबारियों पर कोई नकेल कसी गई। दर्जनों लोग लाखों रुपए देने के बाद मूलभूत सुविधाओं के अभाव में रहने को मजबूर हैं।

अवैध कॉलोनी को लेकर शिकयतों की संख्या बीते एक साल में 890 हो गई हैं, इसमें से लगभग 656 शिकायतों पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। वहीं लोगों की मांग को लेकर बीते एक साल में 243 आवेदन आए हैं जिसमें अविकसित कॉलोनी में रहने वाले रहवासियों ने कॉलोनी में व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने की मांग की है। हैरानी की बात तो यह है कि शहर में 85 से अधिक अविकसित कॉलोनी हैं जिसमें से 45 कॉलोनी पर शासन ने नकेल कसी, लेकिन फिर जांच ठंडे बस्ते में चली गई।

अवैध कॉलोनियों को विकसित किया जा रहा

शहर में करीब 85 कॉलोनियां ऐसी हैं जो पूर्ण रुप से विकसित नहीं की गई हैं और अवैध तरीके से बनाई गई हैं। इन कॉलोनियों को बिना नक्शा पास के और जो सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक नियम होनेे चाहिए उनके बिना ही लोगों को बेचा गया है। बीते साल प्रशासन ने करीब 45 कॉलोनी को अवैध रूप से विकसित करने को लेकर नोटिस भेजे गए थे, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई न होने से कारोबारियों द्वारा धड़ल्ले से प्लॉटिंग की जा रही है। जमीन कारोबारियों ने बिना नक्शा और सरकारी गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाते हुए इन कॉलोनियों को बनाकर करोड़ों रूपए अपनी जेब में डाल लिए हैं।

खेतों की जमीन पर खड़ी की कॉलोनीशहर में प्लाटिंग के नाम पर करोड़ो का कारोबार विकसित किया जा रहा है। कारोबारियों द्वारा बिना नक्शा और प्रशासन को जानकारी दिए बिना अवैध रूप से कॉलोनी बनाई जा रही हैं। इनमें न तो सुविधाओं का जायजा लिया जा रहा है और न ही लोगों को कोई सुविधा दी गई हैं। वहीं बिल्डरों को इसके बदले में ग्राहकों से मोटी रकम मिल चुकी है। इस मुद्दे पर जिला प्रशासन का कहना है कि अभी तक 45 से 50 अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ केस बनाकर कलेक्टर को भेजे गए हैं। इसके साथ ही पटवारियों की टीम शहरी और ग्रामीण इलाकों में लगातार सर्वे कर रही है। जो भी कॉलोनियां नियमों के विरुद्ध विकसित की जा रही हैं, उन्हें चिन्हित कर कार्रवाई की जा रही है।

45 कॉलोनी पर नकेल कसी

सितंबर 2025 में 45 भूमाफियाओं की अवैध कॉलोनियों को चिह्नित करते हुए उन्हें अवैध घोषित कर दिया है। इन कॉलोनियों के खिलाफ एक प्रतिवेदन तैयार कर छतरपुर कलेक्टर कार्यालय को भी भेजा गया। जबकि 4 कॉलोनाइजर को एसडीएम ने नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इसके बाद भी शहर में अन्य कॉलोनाइजर हैं जो धड़ल्ले से अवैध कॉलोनी को बना रहे हैं।

प्लॉट की रजिस्ट्री कई बार

शहर में ऐसी करीब 45 से 50 कॉलोनियों को चिह्नित किया गया है। प्रशासन ने चार कॉलोनाइजर को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। एसडीएम का कहना है कि उन्हें लगातार शिकायतें भी मिल रही थीं कि एक प्लाट की रजिस्ट्री कई कई लोगों को कर दी गई। वहीं, जमीन बेचने के बाद रोड का रकबा भी जमीन का कारोबार करने वालों ने बेच दिया।

केस-01

नौगांव रोड पर मेडिकल कॉलेज के पास चेतगिरी कॉलोनी के मुकेश यादव ने प्लॉट वर्ष 2024 में खरीदा था, आज वहां कॉलोनी विकसित नहीं हो पाई। ठेकेदार से बात करने पर वह भी घुमा रहा है। मुकेश ने इसकी शिकायत दिसंबर 2025 में की। आज करीब सात माह होने के बाद भी प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। मुकेश विभागों के चक्कर काट रहे हैं।

केस-02

सागर रोड पर बन रही कॉलोनी में देरी रोड वार्ड 27 के प्रीतम लोधी का पैसा फंस गया है। दो साल पहले उन्होंने 9 लाख रुपए में प्लॉट खरीदा था। बाद में उस कॉलोनी को अवैध करार दे दिया गया। अब प्रीतम वहां रह पा रहे हैं और न ही राशि लौटने की उम्मीद है। कॉलोनी बिना नक्शा के पास की गई थी तो शासन के पास रिकॉर्ड भी नहीं है। प्रीतम कहते हैं कि उनकी जमापूंजी अविकसित कॉलोनी की भेंट चढ़ रही है।

केस-03

शहर की अमलतास कॉलोनी शुरु से पेंच में फंसी हुई है। रहवासी बीरेंद्र खरे का कहना है कि उन्होंने यहां आवास खरीदा था। अब मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। शिकायतों के लिए कोई विभाग ही नहीं है। नपा के कार्यक्षेत्र में कॉलोनी है नहीं। वहीं हाउंसिंग बोर्ड उनकी सुनवाई नहीं कर रहा। शिकायत करने के लिए भी विभागों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

जिले में अवैध कॉलोनियों की स्थिति (कुल 223)

स्थान अवैध कॉलोनी शिकायतें

छतरपुर- 84 454

खजुराहो- 69 45

बिजावर- 26 56

नौगांव- 16 234

राजनगर- 16 45

हरपालपुर- 08 33

लवकुशनगर- 04 23

इनका कहना है

अवैघ कॉलोनियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मेरे आने के बाद अभी तो किसी भी कॉलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई। जल्द ही इस विषय में जिला प्रशासन अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।

प्रशांत अग्रवाल, एसडीएम