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‘उठ जा बेटे’…बिलखती हुई पुकारती रही मां, 5 बेटियों के बाद जन्मे बेटे की मौत, छतरपुर में डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप

Newborn Baby Death Case: परिजनों का आरोप- बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉक्टर नदारद थे और बिगड़ती हालत के बीच उसे बिना किसी सहयोग के दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया।
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छतरपुर

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Shailendra Sharma

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Updated: 27 Jun 2026, 8:46 PM IST

chhatarpur

newborn baby death doctor negligence allegation, बच्चे की मौत के बाद परिजन ने लगाए डॉक्टर पर लापरवाही के आरोप (Source- patrika)

Chhatarpur Newborn Baby Death Case: मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के ईशानगर में जिस घर में एक सप्ताह पहले इकलौते बेटे के जन्म पर बाजे-गाजे के साथ जश्न मनाया गया था, वहां अब पसरा सन्नाटा चीत्कार में बदल गया है। घर में पांच बेटियों के बाद जन्मे नवजात की 7 दिन में ही मौत होने ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है। बच्चे की मौत से स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। परिजनों का आरोप है कि शनिवार सुबह इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर नदारद मिले, और बिगड़ती हालत के बीच उसे बिना किसी सहयोग के दूसरे अस्पताल भेज दिया गया।

जश्न का माहौल बना मातम

ईशानगर क्षेत्र के ग्राम गोर (पंचायत बिहटा) निवासी कल्याण सिंह के परिवार में सात दिन पहले खुशियों का सैलाब आया था। लगातार पांच बेटियों के बाद घर में बेटे का जन्म हुआ था। परिवार इसे ईश्वर का आशीर्वाद मान रहा था। नवजात और मां को घर लाने के लिए परिजनों ने बैंड-बाजे के साथ जोरदार जश्न मनाया था, लेकिन यह खुशी महज एक सप्ताह ही टिक सकी।

परिजन का आरोप- अस्पताल में न डॉक्टर थे और न स्टाफ

पिता कल्याण सिंह ने बताया कि शनिवार सुबह साढ़े सात बजे बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ने पर वे उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ईशानगर पहुंचे। आरोप है कि उस समय अस्पताल में नाइट ड्यूटी डॉक्टर गिरीश साहू मौजूद नहीं थे और न ही स्टाफ मौजूद था। भुवानीदीन अनुरागी नाम का रिटायर्ड कर्मचारी मरीजों को दवा देते मिला। उसने डॉक्टर से फोन पर बात की और बच्चे को दवा पिलाई और कुछ देर रुकने को कहा। डॉक्टर सुबह 10.30 बजे आए और चेक करने के बाद रेफर कर दिया।

'एंबुलेंस के लिए मांगे 600 रुपये'

परिजनों का आरोप है कि रेफर किए जाने के बाद जब उन्होंने एंबुलेंस की मांग की, तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने 600 रुपए की मांग की। आर्थिक तंगी और समय की कमी के कारण परिजन मजबूरी में मोटरसाइकिल से ही जिला अस्पताल के लिए निकल पड़े, लेकिन रास्ते में ही मासूम ने दम तोड़ दिया।

परिजनों का फूटा गुस्सा, अस्पताल में जमकर हंगामा

बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिजनों और आक्रोशित ग्रामीणों ने अस्पताल पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि इस पूरी घटना के दौरान न तो खंड चिकित्सा अधिकारी और न ही कोई जिम्मेदार चिकित्सक अस्पताल में मौजूद था। स्थिति को बिगड़ता देख ईशानगर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को शांत कराकर मामले को संभाला।

कलेक्टर-मुख्य चिकित्सा अधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग

पीड़ित पिता कल्याण सिंह ने कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने अस्पताल की लचर कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को यह दिन न देखना पड़े। वहीं डॉ. गिरीश साहू, खंड चिकित्सा अधिकारी, ईशानगर ने बताया कि बच्चे में अत्यधिक खून की कमी थी और वह काफी पीला पड़ चुका था। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत जिला अस्पताल के लिए भेज दिया गया था।