बच्चों को गौरैया के लिए सुरक्षित और सुंदर घोंसले बनाना सिखाया गया। बच्चों द्वारा बनाए गए घोंसलों की प्रदर्शनी लगाई गई
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक एवं पत्रकारिता जगत के पुरोधा कपूर चन्द्र कुलिश के जन्मशती वर्ष के पावन अवसर पर सामाजिक सरोकारों की कड़ी में संगम सेवालय द्वारा एक विशेष जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कुलिश जी के प्रकृति प्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व के विचारों से प्रेरित होकर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय गौरैया संरक्षण रहा, जिसमें विलुप्त हो रही हाउस स्पैरो को बचाने हेतु जन-भागीदारी का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. पुष्पेन्द्र खरे ने अपने उद्बोधन में कुलिश जी के विचारों का स्मरण करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण ही भावी पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा उपहार है। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण और मोबाइल रेडिएशन के कारण गौरैया हमसे दूर होती जा रही है। यह केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारे ईको-सिस्टम की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसे बचाने के लिए हमें पारंपरिक घरों और पेड़ों की रक्षा करनी होगी।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. दीप्ति शर्मा, शंकर लाल सोनी, पाखी शुक्ला एवं इंदु प्रभा खरे ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने बताया कि छतों पर दाना-पानी रखना और कृत्रिम घोंसले लगाना छोटे लेकिन प्रभावी कदम हैं। उन्होंने युवाओं और बच्चों को इस अभियान का ब्रांड एम्बेसडर बनाने पर जोर दिया ताकि घर-घर में गौरैया की चहचहाहट वापस लौट सके।
कुलिश जन्मशती वर्ष के इस रचनात्मक आयोजन में सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश चंद्र जैन ने बच्चों के लिए एक विशेष कार्यशाला आयोजित की। इसमें बच्चों को गौरैया के लिए सुरक्षित और सुंदर घोंसले बनाना सिखाया गया। बच्चों द्वारा बनाए गए घोंसलों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसकी सभी ने मुक्तकंठ से सराहना की। बेहतर कार्य करने वाले बच्चों को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।
इस अवसर पर विपिन अवस्थी, अंजू अवस्थी, संविदा अवस्थी, डॉ. स्वतंत्र शर्मा, केएन सोमन, विमला सोमन, नीलम पाण्डेय, दिल्ला राम अहिरवार, लखन लाल अग्रवाल, प्रमोद खरे, किरण मिश्रा, प्रतीक्षा अरजरिया, नीतू सिंह एवं कल्पना चौरसिया सहित अनेक प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सुव्यवस्थित संचालन अजय चतुर्वेदी द्वारा किया गया। संगम सेवालय के पदाधिकारियों ने अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुए संकल्प लिया कि कुलिश जी के जन्मशती वर्ष में इस प्रकार के सामाजिक और पर्यावरणीय कार्यक्रम निरंतर जारी रहेंगे, ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।