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चैत्र नवरात्रि पर खुले मां जगदम्बी मंदिर के पट, नौ दिनों तक गर्भगृह में जल अर्पित कर सकेंगे श्रद्धालु

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल पश्चिमी मंदिर समूह के भीतर स्थित मां जगदम्बी मंदिर के गर्भगृह के कपाट विशेष रूप से नवरात्रि के नौ दिनों के लिए भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं।

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जगदम्बी मंदिर खजुराहो

विश्व पर्यटन नगरी खजुराहो अपनी चंदेलकालीन शिल्पकला और कामकला की मूर्तियों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, इन दिनों चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति के रंग में सराबोर है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल पश्चिमी मंदिर समूह के भीतर स्थित मां जगदम्बी मंदिर के गर्भगृह के कपाट विशेष रूप से नवरात्रि के नौ दिनों के लिए भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। आम दिनों में भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में बंद रहने वाले इस गर्भगृह में अब श्रद्धालु साक्षात देवी प्रतिमा के दर्शन और पूजन कर सकेंगे।

शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक है यह अद्भुत स्वरूप

इतिहासकारों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खजुराहो के मंदिरों का निर्माण 9वीं से 11वीं शताब्दी के बीच चंदेल राजाओं द्वारा कराया गया था। पश्चिमी समूह के अधिकांश मंदिर भगवान शिव और विष्णु को समर्पित हैं। माना जाता है कि सृष्टि की पूर्णता के लिए शिव के साथ शक्ति का होना अनिवार्य है, इसी उद्देश्य से इस समूह में देवी पार्वती का मंदिर स्थापित किया गया था। सन 1880 के आसपास तत्कालीन छतरपुर महाराजा ने खजुराहो से करीब 25 किलोमीटर दूर मनियागढ़ की पहाडिय़ों से मां पार्वती की यह अत्यंत प्राचीन और अलौकिक प्रतिमा लाकर यहां स्थापित करवाई थी। कालांतर में भक्त इन्हें मां जगदम्बी के रूप में पूजने लगे।

साल में केवल दो बार खुलता है गर्भ गृह

खजुराहो के मंदिर भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन होने के कारण सामान्यत: गर्भगृह बंद रहते हैं, लेकिन वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि में श्रद्धालुओं के लिए विशेष छूट दी जाती है। इन नौ दिनों में देवी भक्तों को मंदिर समूह में निशुल्क प्रवेश मिलता है। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक भक्त लंबी कतारों में लगकर मां जगदम्बी को जल अर्पित करते हैं और विशेष उपासना करते हैं।

चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ गुरुवार को अत्यंत उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ हुआ। सुबह के पहले पहर से ही जिले भर के देवी मंदिरों में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विशेष पूजा-अर्चना के साथ भक्तों ने अपने घरों और मंदिरों में घट स्थापना कर नौ दिवसीय अनुष्ठान प्रारंभ किया। शहर की गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक केवल माता के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है।

अखंड ज्योत और माता की चौकी की स्थापना

नवरात्रि के पहले दिन शहर के कई क्षेत्रों में भक्तों ने गाजे-बाजे और डीजे के साथ माता की चौकी स्थापित की। कई श्रद्धालु मंदिरों से अखंड ज्योति प्रज्वलित कर पैदल यात्रा करते हुए अपने निवास तक लाए और वहां विधि-विधान से ज्योति स्थापित की। मंदिरों में भी भक्तों ने अपनी श्रद्धा अनुसार घी और तेल के मनोकामना दीप प्रज्वलित किए हैं, जो अगले नौ दिनों तक अनवरत जलते रहेंगे। बहुत से श्रद्धालुओं ने नौ दिनों का कठिन व्रत शुरू किया है, जो अष्टमी के जागरण और कन्या भोज के साथ संपन्न होगा।

इन प्रमुख सिद्धपीठों पर उमड़ी भारी भीड़

जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं। शहर के बड़ी बगराजन माता मंदिर, फूलादेवी मंदिर, कालीमाता मंदिर हमा, और झनझन देवी मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने माथा टेका। इसके साथ ही बजरंग नगर स्थित देवी मंदिर, खैरी देवी और ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में भी उत्सव जैसा माहौल रहा। लवकुशनगर के ऐतिहासिक बंबरबैनी मंदिर और रामटौरिया स्थित अवार माता मंदिर में दूर-दराज के क्षेत्रों से आए भक्तों ने दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।