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नवरात्रि आज: त्रेतायुग की गवाह है यह पर्वत श्रृंखला: माता सीता के वनदेवी स्वरूप की पूजा, 360 सीढिय़ां चढकऱ सिद्ध मंदिर पहुंचते हैं श्रद्धालु

लवकुशनगर के 500 फीट ऊंचे पर्वत शिखर पर विराजीं मां बंबर वैनी, महर्षि वाल्मीकि के आश्रम और लव-कुश के जन्म की गौरवशाली गाथा समेटे है यह पावन धाम

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मां बंबर वैनी

बुंदेलखंड की पावन धरा पर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शक्ति का अद्भुत संगम लवकुशनगर के बावनवैणी पर्वत पर देखने को मिलता है। यहां 500 फीट ऊंचे विशाल पर्वत शिखर पर मां बंबर वैनी विराजमान हैं, जो न केवल लाखों लोगों की आस्था का केंद्र हैं, बल्कि त्रेतायुग के जीवंत इतिहास की साक्षी भी हैं। कठिन चढ़ाई के बावजूद नवरात्रि में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु 360 सीढिय़ां चढकऱ माता के चरणों में शीश नवाने पहुंचते हैं।

माता सीता का वनदेवी स्वरूप और वाल्मीकि आश्रम

पौराणिक मान्यताओं और किंवदंतियों के अनुसार इस पर्वत का सीधा संबंध रामायण काल से है। कहा जाता है कि जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने माता सीता का परित्याग किया था, तब माता सीता इसी पर्वत श्रृंखला पर स्थित महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहीं थीं। यहां प्रवास के दौरान महर्षि वाल्मीकि ने उन्हें वनदेवी का नाम दिया था। स्थानीय मान्यता है कि यही वनदेवी शब्द समय के साथ अपभ्रंश होकर बंबर वैनी बन गया। माता सीता के इसी वनदेवी स्वरूप की पूजा यहां सदियों से की जा रही है।


लव-कुश के जन्म की पावन स्थली


पहाड़ के नीचे स्थित प्राचीन लव-कुश मंदिर इस बात की पुष्टि करता है कि इसी पावन क्षेत्र में माता सीता ने लव और कुश को जन्म दिया था। बंबर वैनी पर्वत को इस दिव्य घटना का गवाह माना जाता है। पहाड़ की चोटी पर एक चट्टान के विवर (छिद्र) से माता का लेटी हुई मुद्रा में प्राकट्य हुआ था। विवर से प्रकट होने के कारण इन्हें प्रारंभ में विवरवैनी भी कहा जाता था।

पन्ना राजवंश ने कराया निर्माण

मंदिर के ऐतिहासिक पक्ष को देखें तो पन्ना महाराज हिंदूपत का नाम प्रमुखता से आता है। इतिहासकार डॉ. काशीप्रसाद त्रिपाठी की पुस्तक बुंदेलखंड का वृहद इतिहास में उल्लेख है कि 1758-76 ईस्वी के दौरान पन्ना महाराज को माता ने स्वप्न में दर्शन दिए थे। इसके बाद उन्होंने पर्वत के उत्तुंग शिखर पर इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर के भीतर एक छोटा सा कुंड है, जहां भक्त दूध, जल और पुष्प अर्पित करते हैं।


प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा करती है पर्वत श्रृंखला


लवकुशनगर के बीचों-बीच स्थित यह पर्वत और बावनवैणी पर्वत श्रृंखला यहां के पर्यावरण के लिए वरदान मानी जाती है। मान्यता है कि माता बंबर वैनी का यह पहाड़ नगर की प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा करता है और यहां के वातावरण को संतुलित रखता है। यही कारण है कि नगरवासी माता को अपनी कुलदेवी और रक्षक के रूप में पूजते हैं।

नवरात्रि पर उमडता रहा आस्था का सैलाब

वर्तमान में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं। पर्वत की ऊंची चोटियों पर माता के जयकारे गूंज रहे हैं। मंदिर समिति द्वारा माता का प्रतिदिन विशेष श्रृंगार किया जाता है और सुबह-शाम होने वाली महाआरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। प्रशासन द्वारा भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल और सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए जाते हैं।

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