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छतरपुर की रामनवमी शोभायात्रा में अब नहीं गूंजेगा डीजे का शोर, 20 साल पुरानी परंपरा में बड़ा बदलाव

ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर निकलेंगे प्रभु राम, बुजुर्गों और बच्चों की सुविधा के लिए समिति का ऐतिहासिक फैसला

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file photo

रामनवमी जुलूस फाइल फोटो

शहर की ऐतिहासिक और भव्य रामनवमी शोभायात्रा को लेकर इस वर्ष एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा निर्णय लिया गया है। पुलिस लाइन रोड स्थित लड्डू गोपाल मंदिर में आयोजित श्री राम सेवा समिति की बैठक में सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि इस बार शोभायात्रा में डीजे का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आधुनिक शोर-शराबे की जगह अब यह यात्रा बुंदेलखंड की माटी की खुशबू, पारंपरिक लोक वाद्यों और भक्तिमय जयकारों के साथ निकाली जाएगी।

परंपरा और आधुनिकता का संतुलन- डीजे की जगह ढोल-नगाड़े

समिति के पदाधिकारियों ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष शोभायात्रा को अधिक अनुशासित, भव्य और आध्यात्मिक बनाने के लिए डीजे को पूरी तरह हटा दिया गया है। इसकी जगह अब ढोल, नगाड़े, दलदल घोड़ी और बुंदेलखंड के अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जयकारों के साथ आगे बढ़ेंगे। कार्यक्रम प्रभारी पंकज पहारिया ने बताया कि छतरपुर की रामनवमी को महाराष्ट्र के गणपति महोत्सव और जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा की तर्ज पर एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान दिलाने का लक्ष्य है।


बुजुर्गों और बच्चों की सेहत का रखा ध्यान

समिति संयोजक राकेश तिवारी ने बताया कि पिछले 20 वर्षों से यह शोभायात्रा निरंतर निकाली जा रही है। पिछले कुछ वर्षों से डीजे की तेज आवाज को लेकर बुजुर्ग श्रद्धालुओं और छोटे बच्चों को होने वाली परेशानियों की शिकायतें सामने आ रही थीं। मीडिया प्रभारी अभिलेख खरे ने कहा कि समाज के हर वर्ग की सुविधा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए समिति ने यह सामाजिक संवेदनशीलता दिखाई है। तेज ध्वनि प्रदूषण मुक्त वातावरण में अब भक्त अधिक शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक माहौल का अनुभव कर सकेंगे।

मातृशक्ति की बढ़ेगी भागीदारी


इस बार की शोभायात्रा में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर यात्रा की सांस्कृतिक गरिमा को बढ़ाएंगी। समिति ने शहर के नागरिकों से अपील की है कि वे इस आयोजन को अपना निजी दायित्व मानें और इसे भव्य व दिव्य बनाने में सहयोग करें। भविष्य में इस यात्रा को इतना आकर्षक बनाने की योजना है कि इसकी भव्यता देशभर में मिसाल बने।


बुंदेलखंडी लोक संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा


डीजे बंद करने के फैसले का एक मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड की लुप्त होती लोक कलाओं और वाद्यों को मुख्यधारा में वापस लाना भी है। पारंपरिक संगीत और भक्ति गीतों के मेल से यह शोभायात्रा न केवल धार्मिक होगी, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोडऩे का एक सशक्त माध्यम भी बनेगी। समिति को विश्वास है कि इस अनुशासन और सादगी से शोभायात्रा की दिव्यता और अधिक बढ़ जाएगी।

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