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छतरपुर में मासूम बच्चों के साथ चिताओं पर लेट गईं दर्जनों महिलाएं, भारी पुलिसबल तैनात

Ken Betwa Project Uproar : आंदोलनकारी अमित भटनागर की गिरफ्तारी के विरोध में एसपी ऑफिस का घेराव करने पहुंची दर्जनों आदिवासी महिलाओं ने 'चिता आंदोलन' के तहत बच्चों के साथ चिताओं पर लेटकर प्रदर्शन किया।

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Ken Betwa Project Uproar

छतरपुर में मासूम बच्चों के साथ चिताओं पर लेट गईं दर्जनों महिलाएं (Photo Source- Input)

Ken Betwa Project Uproar : केन-बेतवा प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों की सीमा पर बन रहे ढोढन बांध स्थल पर आदिवासियों ने एक बार फिर से आंदोलन शुरू कर दिया है। यानी केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध एक बार फिर तेज हो गया है। इस बार आंदोलनकारी अमित भटनागर की गिरफ्तारी के विरोध में एसपी ऑफिस का घेराव करने पहुंची, साथ ही दर्जनों आदिवासी महिलाओं ने 'चिता आंदोलन' के तहत अपने अपने मासूम बच्चों के साथ चिताओं पर लेटकर विरोध प्रदर्शन किया।

गिरफ्तारी के विरोध में बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाओं ने पहले पन्ना एसपी कार्यालय का घेराव किया। इसके बाद महिलाएं परियोजना के निर्माण स्थल पर पहुंच गईं और अपने मासूम बच्चों के साथ जलने के लिए तैयार चिताओं पर लेट गईं।

भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात

आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि, जब तक समाज सेवी अमित भटनागर को रिहा नहीं किया जाएगा, तब तक उनका प्रदर्शन इसी तरह जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि, वो अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाली नहीं हैं। मौके पर भारी पुलिस बल के साथ - साथ प्रशासनिक अधिकारियों को तैनात किया गया है।

पहले भी हो चुका है प्रदर्शन

आपको याद दिला दें कि, इससे पहले पिछले महीने यानी अप्रैल में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहा आंदोलन निर्णायक और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया था। जहां प्रशासन द्वारा आंदोलन को दबाने की हर कोशिश के बावजूद हजारों आदिवासी किसान, विशेष रूप से महिलाएं, हिम्मत हारने के बजाय चिता आंदोलन तक पहुंच गई थी। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आदिवासी महिलाओं और जय किसान संगठन के नेता सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने सरकार के दमन के सामने आक्रामक रुख अपनाया था।

रोक-टोक और धारा 163 लागू हुआ था

आंदोलनकारियों का कहना था कि, उन्हें दिल्ली जाकर अपनी बात रखने से रोका गया, रास्तों में कई जगह रोका गया, राशन और पानी तक रोक दिया गया साथ ही धमकियां दी गई। अब प्रशासन ने अपने ही गांव और जंगल में धारा 163 लागू कर उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की है। आंदोलनकारियों ने इसे दमन की पराकाष्ठा बताया था।

तेज किया जाएगा आंदोलन

फिलहाल, प्रशासन की ओर से इन आंदोलनकारियों से कोई बातचीत नहीं की गई है, जिससे आदिवासियों के गुस्सा भड़क रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं दिव्या अहिरवार का कहना है कि, गांव-गांव से लोग पैदल चलकर बांध स्थल पर पहुंच रहे हैं। आगे आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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