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जानवरों और पक्षियों का सहारा बन रहा शहर के युवाओं का ग्रुप; कोई सकोरे बांट रहा तो कोई बन रहा बेजुबानों का मददगार

भीषण गर्मी के इस दौर में बेजुबानों की मदद करना ही सच्चा धर्म है, क्योंकि हर मजहब हमें परोपकार और दया की सीख देता है।

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Sakore

सकोरे

कहते हैं कि किसी भी जीव पर दया करना हमारा सबसे बड़ा धर्म होता है। यदि हम इंसानियत का पाठ सीख जाएं तो जीवन की राह आसान हो जाती है। भीषण गर्मी के इस दौर में बेजुबानों की मदद करना ही सच्चा धर्म है, क्योंकि हर मजहब हमें परोपकार और दया की सीख देता है। ऐसे में तपती गर्मी के बीच बेजुबान पक्षियों और पशुओं का सहारा बन रहे हैं—जीव दया के क्षेत्र में सक्रिय संस्था 'सार्थक प्रयास समिति' और विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र-छात्राओं का 'मानवता ग्रुप'। 'सार्थक संस्था' बीते कई वर्षों से नि:शुल्क सकोरे वितरित कर रही है, वहीं 'मानवता ग्रुप' नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहा है।

डेकोरेट कर बांटते हैं विशेष सकोरे

सार्थक समिति के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन ने बताया कि वे विशेष रूप से चार छेद वाले सकोरे जनवरी में ही ऑर्डर देकर बनवाते हैं। ये सकोरे बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं होते, जिन्हें संस्था नि:शुल्क प्रदान करती है। इन सकोरों पर पीला रंग किया जाता है ताकि ये आकर्षक लगें और पक्षी इन्हें फल समझकर आसानी से उन तक पहुंच सकें। सकोरों में तार बांधकर उन्हें पूरी तरह तैयार किया जाता है और स्कूलों में जाकर बच्चों व स्टाफ को घर ले जाने के लिए दिया जाता है, ताकि बच्चों में परमार्थ की भावना जागृत हो। प्रकाश जैन स्वयं भी उन स्थानों पर सकोरे लगाते हैं, जहाँ आसपास के लोग उनमें नियमित पानी भरने और साफ-सफाई की जिम्मेदारी लेते हैं।

नाटक के माध्यम से जीव दया का संदेश

'मानवता ग्रुप' के युवा सदस्य गांव और शहरों में जाकर जीवों के प्रति दया दिखाने का संदेश दे रहे हैं। टीम सदस्य देवाशीष और विश्वाजिता ने बताया कि उन्होंने सोशल वर्क में मास्टर डिग्री की है और जीव प्रेम के कारण ही समाज सेवा को चुना। गर्मी में भूख-प्यास से बेहाल पशुओं के लिए यह ग्रुप भोजन का प्रबंध करता है। धीरे-धीरे इस मुहिम में और भी युवा शामिल हो गए, जो अब पशु क्रूरता के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रहे हैं और सड़क हादसों में घायल पशुओं का उपचार भी कराते हैं।

इसके साथ ही यह ग्रुप तालाबों की सफाई का अभियान भी चला रहा है। हाल ही में भोपाल, जबलपुर, बिलासपुर, रायपुर और इंदौर में 'मानवता ग्रुप' ने नुक्कड़ नाटकों के जरिए जानवरों के प्रति सकारात्मक रवैया अपनाने का संदेश दिया। इस दौरान युवाओं ने छतरपुर के साथ-साथ पूरे बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व किया। मानवता यूथ विंग ग्रुप में तोरण सिंह, श्रेया सिंह, देवकुमार कुशवाहा, पूजा वर्मा, मयंक जैन जैसे अनेक युवा सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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