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छतरपुर नगर पालिका का भारी-भरकम बजट तैयार: इस बार 580 करोड़ रुपए का होगा प्रावधान, विकास कार्यों को गति देने की तैयारी

कागजी आंकड़ों पर पार्षदों का हल्लाबोल, बिना जन प्रतिनिधियों की राय के बजट तैयार करने का आरोप

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नगरपालिका

नगर पालिका परिषद छतरपुर आगामी वित्तीय वर्ष के लिए एक विशाल बजट पेश करने की तैयारी में है। प्रशासनिक स्तर पर चल रही तैयारियों के अनुसार, मार्च के अंतिम सप्ताह में लगभग 580 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट पेश किया जा सकता है। इस बार बजट का मुख्य केंद्र बिंदु शहर का विस्तार और अधोसंरचना विकास है। नगर पालिका प्रशासन का लक्ष्य है कि इस बड़ी राशि के माध्यम से शहर की मूलभूत सुविधाओं में इजाफा किया जाए।

पिछले साल की तुलना में बजट में बड़ी बढ़ोतरी

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष मार्च 2025 में बजट की राशि लगभग 370 करोड़ रुपए थी, जिसे इस बार बढ़ाकर 580 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है। बजट में हुई यह 210 करोड़ रुपए की बढ़ोत्तरी शहर के आगामी प्रोजेक्ट्स और संधारण कार्यों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) माधुरी शर्मा ने बजट राशि की पुष्टि करते हुए बताया कि बजट की बैठक 25 मार्च के आसपास होना प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि बजट पेश होने के बाद ही अलग-अलग मदों में होने वाला आवंटन पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा। सीएमओ के अनुसार पिछले सत्र के कुछ काम पूरे हो चुके हैं और कई महत्वपूर्ण कार्य वर्तमान में निर्माणाधीन हैं।

अटके पड़े हैं शहर के बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट्स

भले ही बजट की राशि में बड़ी बढ़ोत्तरी की जा रही है, लेकिन शहर के कई महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स अब भी फाइलों से बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं। इनमें 165 करोड़ रुपए की लागत वाली सीवर लाइन का प्रोजेक्ट सबसे प्रमुख है, जो ड्राइंग न बन पाने के कारण पिछले 3 साल से अटका हुआ है। इसी तरह 100 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला नया बस स्टैंड भी फिलहाल ठंडे बस्ते में है। इसके अलावा वार्ड नंबर 8 और 19 में बनने वाले सामुदायिक भवनों का काम भी वर्क ऑर्डर के इंतजार में अधूरा पड़ा है।

बजट पर पार्षदों का कड़ा ऐतराज और विरोध

एक तरफ प्रशासन 580 करोड़ रुपए के बजट की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ नगर पालिका के पार्षदों ने इस पर मोर्चा खोल दिया है। जनप्रतिनिधियों का सीधा आरोप है कि बजट की बैठक सिर पर है, लेकिन अधिकारियों ने अभी तक किसी भी वार्ड पार्षद से विकास कार्यों के लिए कोई एजेंडा या प्रस्ताव नहीं मांगे हैं। कांग्रेस पार्षद सुशील शिवहरे का कहना है कि अधिकारी एसी कमरों में बैठकर बजट का खाका खींच रहे हैं, जबकि वार्डों की जमीनी समस्याओं से उनका कोई सरोकार नहीं है।

विपक्षी पार्षदों ने इस बजट वृद्धि को आंकड़ों की बाजीगरी करार दिया है। पार्षद शिवसिंह यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि जब पिछले साल के 82 प्रस्तावों में से 40 फीसदी काम आज तक शुरू नहीं हो पाए, तो बजट राशि बढ़ाने का क्या औचित्य है? पार्षदों का आरोप है कि पुरानी बैठकों में स्वीकृत लाखों रुपए के काम अब तक धरातल पर नहीं आए हैं और सड़कों की हालत जर्जर बनी हुई है। जनप्रतिनिधियों की राय शामिल न होने के कारण इस 580 करोड़ रुपए के बजट की सार्थकता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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