छतरपुर

लंग्स कैंसर डे: तम्बाकू, सिगरेट और वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर के तीन खतरनाक दुश्मन, अब भी चेतें तो जीवन बच सकता है

एक अगस्त फेफड़ों के कैंसर दिवस के मौके पर यह समझना बेहद जरूरी हो गया है कि तम्बाकू, सिगरेट और वायु प्रदूषण किस तरह हमारे जीवन की डोर सांस पर हमला कर रहे हैं। छतरपुर जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले में भी अब यह बीमारी गंभीर रूप ले रही है।

2 min read
Aug 01, 2025
डॉ. राकेश चतुर्वेदी

एक अगस्त फेफड़ों के कैंसर दिवस के मौके पर यह समझना बेहद जरूरी हो गया है कि तम्बाकू, सिगरेट और वायु प्रदूषण किस तरह हमारे जीवन की डोर सांस पर हमला कर रहे हैं। छतरपुर जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले में भी अब यह बीमारी गंभीर रूप ले रही है। इन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए हमने बातचीत की नौगांव टीबी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश चतुर्वेदी से........

प्रश्न-पहले यह बीमारी केवल महानगरों में देखने को मिलती थी। अब छोटे जिलों और गांवों में भी इसके मामले सामने आने लगे हैं। क्या कहेंगे आप इस बदलती स्थिति पर?

उत्तर- जी हां, यह बदलाव चिंताजनक है। छतरपुर जिले में अब हर महीने करीब 10-15 मरीज ऐसे आते हैं जिनमें फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याएं होती हैं। इनमें से कई मामलों में कैंसर की पुष्टि होती है। खास बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तम्बाकू, बीड़ी-सिगरेट और गुटखा जैसी आदतों को लोग सामान्य मानते हैं, यही सबसे बड़ी वजह है।

प्रश्न- क्या लोग लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते?

उत्तर- बिल्कुल, यही सबसे बड़ा कारण है कि छतरपुर और आसपास के इलाकों में लगभग 70 प्रतिशत मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है। शुरुआत में खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द जैसे लक्षणों को सामान्य सर्दी-खांसी मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

प्रश्न- क्या इस दिशा में कोई जन-जागरूकता अभियान भी चल रहे हैं?

उत्तर- जन अभियान परिषद और स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और पंचायत सभाओं में नुक्कड़ नाटक, पोस्टर और स्लोगन के जरिए लोगों को बताया जा रहा है कि एक भी बीड़ी आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है।

प्रश्न- इस बीमारी से बचाव के लिए आम नागरिक क्या कर सकते हैं?

उत्तर- सबसे पहले तो धूम्रपान और तम्बाकू का पूर्ण त्याग करें। इसके अलावा वायु प्रदूषण से बचें, पौष्टिक आहार लें, व्यायाम करें और साल में एक बार चेस्ट एक्स-रे व मेडिकल चेकअप जरूर कराएं। यदि खांसी सप्ताह से अधिक बनी रहे, सांस लेने में तकलीफ हो या छाती में दर्द हो या खून आने लगे तो तुरंत जांच कराएं।

प्रश्न- फेफड़ों की देखभाल को लेकर आप क्या अंतिम संदेश देना चाहेंगे?

उत्तर- यह बात हमें गहराई से समझनी होगी कि फेफड़े सिर्फ अंग नहीं, जीवन की डोर हैं। यदि आप सांस ले पा रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आप जीवित हैं। इसलिए इस फेफड़ों के कैंसर दिवस पर सभी को यह संकल्प लेना चाहिए तम्बाकू छोड़ें, जीवन चुनें।

Published on:
01 Aug 2025 10:39 am
Also Read
View All

अगली खबर