संघर्ष और सुशासन को अब स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा। सीएम ने कहा कि महाराजा ने जिस प्रकार से मुगलों के अत्याचारों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
छतरपुर. महाराजा छत्रसाल जयंती पर मऊसहानियां में आयोजित विरासत कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि महाराजा छत्रसाल ने स्वाभिमान और सिंदूर की लड़ाई लड़ी। उनके मार्ग पर चलकर आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दुश्मनों को घर में घुसकर मार रहे हैं। यह उसी साहसी परंपरा की अगली कड़ी है। उनके संघर्ष और सुशासन को अब स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा। सीएम ने कहा कि महाराजा ने जिस प्रकार से मुगलों के अत्याचारों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराजा छत्रसाल ने मुगलों को तलवार के बल पर बुंदेलखंड से खदेड़ा और अपनी मिट्टी की रक्षा की। ऐसे बुंदेलखंड की वीरता को नमन ,यह धरती अनमोल रत्नों से भरी है। यहां न केवल वीर योद्धा पैदा हुए हैं, बल्कि इस धरती ने हमें हीरे भी दिए हैं। महाराजा छत्रसाल, रानी दुर्गावती, छत्रपति शिवाजी और अहिल्याबाई होल्कर जैसे महान शासकों ने इस देश को नेतृत्व और स्वाभिमान का पाठ पढ़ाया।
मुख्यमंत्री ने अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भारत की प्रगति को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, जब अंग्रेज भारत से गए, तब देश 15वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व को छोड़ दें तो लंबे समय तक कांग्रेस की सरकार रही और हम 15 वें से 11वें स्थान तक ही पहुंच सके। लेकिन पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। आज हम विरासत से विकास की यात्रा पर हैं। एक ओर हमारी संस्कृति, इतिहास और शौर्य है, तो दूसरी ओर आधुनिक भारत की आकांक्षाएं। हम दोनों को साथ लेकर चल रहे हैं।