शहर में इस समय करीब 31 हजार घरेलू नल कनेक्शन हैं। इनमें से 12 हजार उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्होंने वित्तीय वर्ष 2024-25 में एक रुपए भी जलकर नहीं चुकाया है। बाकी 19 हजार कनेक्शनधारियों ने आंशिक रूप से भुगतान किया है, जिससे केवल 1.61 करोड़ रुपए की ही वसूली हो सकी।
नगर पालिका ने शहर में जलकर और संपत्तिकर की गिरती वसूली को देखते हुए बड़ा निर्णय लिया है। आने वाले वर्ष 2025-26 में जलकर से 7.96 करोड़ रुपए की वसूली का लक्ष्य रखा गया है, जिसे हासिल करने के लिए नगर पालिका शहर के उन वार्डों में मीटर लगाने जा रही है जहां 24 घंटे पानी की सप्लाई की जा रही और की जाएगी। यह योजना आम जनता के लिए एक नई व्यवस्था लेकर आएगी, जिसमें जल उपभोग के अनुसार टैक्स देना अनिवार्य होगा।
नगर पालिका के अनुसार छतरपुर शहर में इस समय करीब 31 हजार घरेलू नल कनेक्शन हैं। इनमें से 12 हजार उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्होंने वित्तीय वर्ष 2024-25 में एक रुपए भी जलकर नहीं चुकाया है। बाकी 19 हजार कनेक्शनधारियों ने आंशिक रूप से भुगतान किया है, जिससे केवल 1.61 करोड़ रुपए की ही वसूली हो सकी। यह आंकड़ा पिछली योजना के 5 करोड़ के लक्ष्य से बेहद कम है।
अब नगर पालिका ने निर्णय लिया है कि जिन वार्डों में 24 घंटे पानी उपलब्ध होगा, वहां प्रत्येक नल कनेक्शन पर मीटर लगाए जाएंगे। इन मीटरों के माध्यम से हर उपभोक्ता से उसकी जल खपत के अनुसार शुल्क वसूला जाएगा। फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं से 160 रुपए प्रतिमाह की दर से टैक्स वसूला जा रहा है, लेकिन मीटर लगने के बाद यह राशि बढक़र 250 रुपए प्रति माह तक पहुंच सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां पानी की आपूर्ति नियमित होगी।
इस वर्ष कुल 46.30 करोड़ रुपए वसूली का लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें जलकर, संपत्तिकर और अन्य कर शामिल हैं। लेकिन नगर पालिका पर यह सवाल उठ रहे हैं कि जब पिछले वर्षों में बकायादारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो नए लक्ष्य कैसे हासिल होंगे? उदाहरण के तौर पर, सटई रोड स्थित मैरिज हाउस के संचालक परिजात सिंह पर 5.55 लाख, दीपचंद्र जैन के भवन पर 1.76 लाख, सुनीता जैन पर 3.53 लाख, कमल अग्रवाल के होटल पर 1.35 लाख और प्रियव्रत महिला उद्यान समिति पर 1 लाख से अधिक का संपत्तिकर बकाया है। शहर में 500 से अधिक बड़े बकायादार हैं, जिन पर प्रति व्यक्ति 1 लाख रुपए से ज्यादा का कर बकाया है।
नगर पालिका केवल नोटिस भेजने की औपचारिकता तक सीमित रह गई है। जब भी किसी बड़े बकायादार से सख्ती से वसूली की बात आती है, राजनीतिक दबाव सामने आ जाता है और कार्रवाई अधर में लटक जाती है। यही कारण है कि शहर के मैरिज हॉल, होटल, व्यवसायिक प्रतिष्ठान और आवासीय प्रॉपर्टीज़ पर करीब 4 करोड़ रुपए से अधिक कर बकाया है।
जलकर मीटर की योजना को अमल में लाने के लिए नगर पालिका जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगी। सर्वप्रथम घरों की संख्या निर्धारित की जाएगी, फिर ठेकेदारों के माध्यम से मीटर लगाने का कार्य करवाया जाएगा। साथ ही बकायादारों से वसूली सुनिश्चित करने के लिए डोर-टू-डोर अभियान शुरू किया जा रहा है। नगर पालिका के कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बकायादारों के घर जाकर टैक्स की जानकारी दें और भुगतान के लिए प्रेरित करें।
नगर पालिका सीएमओ माधुरी शर्मा ने बताया कि, नगर पालिका की जल सेवाएं केवल तभी सुचारु रूप से चल सकती हैं जब हम उपभोक्ताओं से उसकी लागत वसूल सकें। मीटर लगाने से पारदर्शिता आएगी और जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। हम पूरी कोशिश करेंगे कि वसूली में पिछड़े उपभोक्ताओं को भी इसमें शामिल करें।
छतरपुर नगर पालिका की यह योजना नगर की जल सेवा को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। हालांकि, यह तभी सफल होगी जब कर वसूली में पारदर्शिता और दृढ़ता दिखाई जाए। मीटर आधारित बिलिंग एक आवश्यक सुधार है, लेकिन इसके साथ-साथ नगर पालिका को पुराने और बड़े बकायादारों पर ठोस कार्रवाई करनी होगी, वरना नई योजनाएं भी पुराने ढर्रे पर ही रह जाएंगी।