छतरपुर

छतरपुर जिले में ढाई लाख उज्ज्वला कनेक्शनधारी, 63 फीसदी नहीं करा रहे रिफिल

जिले के कुल 2,50,312 लाभार्थियों में से 1,58,322 लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा रहे हैं, जिसका सीधा प्रतिशत 63.25 बैठता है।

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Jun 22, 2026
gas cyclender
एलपीजी गैस

छतरपुर जिले में कुल 2 लाख 50 हजार 312 उज्ज्वला योजना के कनेक्शनधारी हैं, जिनमें से 63.25 फीसदी लोगों ने बीते एक साल से एक बार भी अपने सिलेंडर को रिफिल नहीं कराया है। विडंबना यह है कि इन उज्ज्वला कनेक्शनधारियों को सामान्य वर्ग के गैस कनेक्शनों की सुविधाओं में कटौती करते हुए यह विशेष लाभ दिया जा रहा है, मगर फिर भी इसका बड़ा हिस्सा बेकार साबित हो रहा है। छतरपुर में उज्ज्वला के 6,453 परिवारों में से बीते एक साल में 1,543 लोगों ने कोई भी सिलेंडर रिफिल नहीं किया है।

करीब पौने दो लाख लोग नहीं ले रहे फायदा

आंकड़ों का विश्लेषण करें तो जिले के कुल 2,50,312 लाभार्थियों में से 1,58,322 लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा रहे हैं, जिसका सीधा प्रतिशत 63.25 बैठता है। कहने का आशय यह है कि एक बहुत बड़े पैमाने पर पात्र लोगों द्वारा इस सुविधा का उपयोग बंद कर दिया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रिफिलिंग का स्तर न के बराबर

जिले में सबसे ज्यादा सिलेंडर न भरवाने वाले लोग ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों के हैं। उज्ज्वला योजना की होड़ में सरकार ने गरीब परिवारों को गैस चूल्हा और सिलेंडर तो मुहैया करा दिया, लेकिन जमीनी हकीकत में लोगों ने इसकी उपयोगिता को बेहद कम कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार तो ऐसे भी हैं जिन्होंने आज तक एलपीजी पर बने भोजन को चखा तक नहीं है।ऐसे परिवार समय पर न तो रिफिलिंग कराते हैं और ना ही इस योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता की ओर ध्यान देते हैं, जबकि उन्हें सामान्य लोगों के हक को सीमित करके यह विशेष सुविधा दी गई थी। जिले के चंदला, बकस्वाहा और गौरिहार क्षेत्र में रिफिल कराने का प्रतिशत सबसे निचले स्तर पर है। बीते एक साल में यहां महज 22 प्रतिशत लोगों ने ही अपने सिलेंडर रिफिल कराए हैं।

दस्तावेजों की कमी और भौगोलिक दूरी बनी बाधा

जमीनी पड़ताल में यह बात सामने आई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गैस एजेंसियों की दूरी गांवों से काफी अधिक है। ऐसे में परिवहन के साधनों की कमी और आने-जाने के खर्च के कारण ग्रामीण गैस भरवाने से कतराते हैं।

अनिवार्य ई-केवाईसी : बार-बार होने वाली केवाईसी और अन्य आवश्यक शासकीय दस्तावेजों की जटिलता की वजह से कई कनेक्शनधारियों ने गैस को भरवाना ही पूरी तरह बंद कर दिया है।पारंपरिक चूल्हे को प्राथमिकता: गांवों में आज भी अधिकांश लोग पारंपरिक चूल्हे की लकड़ी पर पका हुआ भोजन अधिक पसंद करते हैं, जिस कारण वे गैस रीफिलिंग की किल्लत और भागदौड़ मोल लेना पसंद नहीं कर रहे हैं।

सामान्य उपभोक्ताओं को ऐसे लग रहा भारी घाटा

वर्तमान में जिले के सामान्य उपभोक्ताओं के लिए घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 937 है। मध्यमवर्गीय और सामान्य परिवारों में सालभर में औसतन 10 सिलेंडरों की खपत आसानी से हो जाती है, जिसके चलते उन्हें हर साल लगभग 10,000 गैस पर खर्च करने पड़ रहे हैं।

शासन द्वारा सामान्य लोगों को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर एक निश्चित सीमा तय कर दी गई और सामान्य वर्ग के हिस्से की चार सिलेंडरों की मदद काटकर उज्ज्वला धारियों के खाते में स्थानांतरित कर दी गई। नियमों के इस बदलाव के कारण सामान्य वर्ग के प्रत्येक परिवार को सीधे तौर पर सालाना लगभग 1200 का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

एक नजर में आंकड़े (फैक्ट फाइल)

विवरण | संख्या / प्रतिशत

जिले में कुल उज्ज्वला गैस कनेक्शन- 2,50,312

सालभर से रिफिल न कराने वाले कनेक्शन- 58,322

जिले में नो-रिफिल का कुल प्रतिशत- 63.25%

छतरपुर शहर में कुल उज्ज्वला कनेक्शन 6,453

शहर में रिफिल न कराने वाले उपभोक्ता 1,543

अधिकारियों का क्या है कहना

जिले में दो लाख से अधिक उज्ज्वला योजना के हितग्राही पंजीकृत हैं। लोगों द्वारा सिलेंडर रिफिल न कराने के पीछे कई स्थानीय और अलग-अलग कारण सामने आए हैं। कई बार ग्रामीण अंचलों से गैस एजेंसियों की भौगोलिक पहुंच का काफी दूर होना भी एक मुख्य वजह पाई गई है। हालांकि, छतरपुर शहरी क्षेत्र में उज्ज्वला के पात्र हितग्राहियों को इसका बेहतर लाभ मिल रहा है।

सीताराम कोठारे, जिला आपूर्ति अधिकारी , छतरपुर

Updated on:
22 Jun 2026 02:52 pm
Published on:
22 Jun 2026 11:34 am
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