उपभोक्ता कह रहे हैं कि यह व्यवस्था उनके बजट पर बोझ डाल रही है, उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 30 फीसदी तक की बढोत्तरी हुई है।
जिले में बिजली उपभोक्ताओं के बीच स्मार्ट मीटर को लेकर असंतोष चरम पर पहुंच गया है। जब सरकार ने इन मीटरों की स्थापना की थी, तो दावा किया गया था कि इससे बिलिंग प्रक्रिया पारदर्शी होगी, बिजली चोरी पर रोक लगेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिलेगी। लेकिन हकीकत में उपभोक्ता कह रहे हैं कि यह व्यवस्था उनके बजट पर बोझ डाल रही है, उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 30 फीसदी तक की बढोत्तरी हुई है।
पिछले कुछ महीनों से उपभोक्ता लगातार शिकायत कर रहे हैं कि स्मार्ट मीटर से आने वाले बिजली बिल उनकी आय की तुलना में कहीं अधिक हैं। खासकर मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवारों के लिए यह नई व्यवस्था सुविधा के बजाय सजा बन गई है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मामूली देरी पर बिजली काट दी जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर के रोजमर्रा के काम ठप हो जाते हैं।
लवकुशनगर निवासी लकी गुप्ता ने बताया अगर बिल 2000 रुपए से कम भी है, तो भी कभी-कभी बिना कारण बिजली काट दी जाती है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार पहले ही महंगाई से जूझ रहे हैं, ऊपर से यह स्मार्ट मीटर हमारे जीवन में नई मुसीबत बन गया है। रीडिंग और बिलिंग में पारदर्शिता नहीं है, और शिकायत करने पर केवल औपचारिक जवाब मिलते हैं।
छतरपुर के शिवकुमार का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनका बिजली बिल उनकी मासिक आय के बराबर आने लगा है। एक दिन की देरी से भी बिजली काट दी जाती है। पहले महीने का बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई और राशन पर खर्च होता था, लेकिन अब आधा पैसा बिजली के बिल में चला जाता है।
छत्रसाल नगर निवासी शिवम राजा बुंदेला ने भी आक्रोश जताते हुए कहा पुराने मीटर में बिल सामान्य आता था, लेकिन अब बिल दोगुना-तिगुना हो गया है। हमें समझ नहीं आता कि बिजली खपत अचानक इतनी कैसे बढ़ गई। लगता है तकनीकी खामी के नाम पर हमसे ज्यादा वसूली की जा रही है।
यह असंतोष केवल छतरपुर शहर तक सीमित नहीं है। बमीठा, घुवारा, नौगांव , हरपालपुर और बकस्वाहा जैसे क्षेत्रों से भी शिकायतें आ रही हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल 10 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। कई ग्रामीण इलाकों में तो लोग पहले ही मीटर हटाने की मांग कर रहे हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता राकेश पटेल का कहना है, यह सिर्फ बिजली का मुद्दा नहीं, यह आम आदमी के जीवन स्तर पर सीधा हमला है। तकनीक तभी फायदेमंद है, जब वह जनता का जीवन आसान करे, न कि उसे कर्ज और तनाव में डाले।
बिजली विभाग के ईई अमर श्रीवास्तव का कहना है कि स्मार्ट मीटर का उद्देश्य बिजली चोरी पर नियंत्रण और बिलिंग में पारदर्शिता लाना है। उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतें दर्ज की जा रही हैं और तकनीकी जांच करवाई जाएगी।